ब्रेकिंग
Jabalpur News: नगर निगम स्कूल के गरीब बच्चों ने भरी उड़ान, 85% से ज्यादा अंक लाने पर मिला फ्री हवाई ... MP Weather Update: मध्य प्रदेश में बदला मौसम का मिजाज, इन जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट; पचमढ़ी म... Sheopur News: जयपुर की रंजिश ने लिया खूनी रूप, मौत के बाद श्योपुर-सवाई माधोपुर हाईवे पर शव रखकर प्रद... Bhopal Road Accident: एयरपोर्ट रोड पर बड़ा हादसा, अनियंत्रित होकर 20 फीट नीचे सर्विस लेन पर गिरा तेज... Jabalpur High Court Order: श्रम आयुक्त के पास नहीं है ज्यूडिशियल पावर, हाईकोर्ट का अहम फैसला Shahdol Crime News: लग्जरी कार से नशीले कफ सिरप की तस्करी, पुलिस ने पीछा कर 2 आरोपियों को दबोचा Asaram Bapu Health Update: पैरोल पर उज्जैन आए आसाराम की बिगड़ी तबीयत, सीने में तेज दर्द के बाद आश्रम... MP Fisheries Scheme: एमपी में मछली पालन बनेगा बड़ा उद्योग, 4 बड़े बांधों में शुरू होगा 'केज कल्चर', ... Chhatarpur News: छतरपुर में नकली खाद सिंडिकेट का भंडाफोड़, पुलिस ने 650 बोरियां कीं जब्त Sanyam Lodha Threat: पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को लॉरेंस गैंग से मिली AK-47 से भूनने की धमकी, 2 शूटर ग...

Jabalpur High Court Order: श्रम आयुक्त के पास नहीं है ज्यूडिशियल पावर, हाईकोर्ट का अहम फैसला

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि श्रम आयुक्त (लेबर कमिश्नर) के पास किसी भी मामले में न्यायिक शक्तियां (ज्यूडिशियल पावर) नहीं होती हैं। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि श्रम आयुक्त की भूमिका केवल विवाद को संदर्भित (रेफर) करने वाले प्राधिकारी तक सीमित है। हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी लेबर कमिश्नर के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने विवादित मामले को श्रम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश देते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।

क्या है पूरा विवाद और याचिका का आधार?

जानकारी के अनुसार, यह याचिका मेसर्स पीबीएम पॉलीटैक्स लिमिटेड कंपनी की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने 29 जनवरी 2020 को तत्कालीन अतिरिक्त श्रम आयुक्त (इंदौर) द्वारा पारित किए गए एक आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दरअसल, कंपनी और ज्योत्सना सोमकुंवर के बीच चल रहे एक विवाद की सुनवाई करते हुए श्रम आयुक्त ने मामले को आगे की कार्यवाही के लिए श्रम न्यायालय के पास भेज दिया था। कंपनी की मुख्य आपत्ति यह थी कि लेबर कमिश्नर ने ‘औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947’ की धारा 2-ए की उपधारा (3) के तहत निर्धारित तीन साल की समय-सीमा पर विचार किए बिना ही यह मामला श्रम न्यायालय को ट्रांसफर कर दिया।

श्रम आयुक्त नहीं दे सकते अंतिम निर्णय

इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि श्रम आयुक्त को किसी भी विवाद में न्यायनिर्णायक प्राधिकारी की शक्तियां प्राप्त नहीं हैं। कोर्ट ने साफ किया कि श्रम आयुक्त किसी भी विवाद के गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर अंतिम फैसला सुनाने वाले जज नहीं हैं। इस कानूनी स्थिति को देखते हुए, श्रम आयुक्त द्वारा इस मामले को लेबर कोर्ट के पास भेजना पूरी तरह से सही कदम था।

श्रम न्यायालय को स्वतंत्र रूप से विचार करने के निर्देश

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने अंतिम आदेश में छिंदवाड़ा जिले में स्थित श्रम न्यायालय को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि श्रम न्यायालय इस मामले के मुख्य तथ्यों के साथ-साथ तीन वर्ष की समय-सीमा वाले महत्वपूर्ण प्रश्न पर भी पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से विचार करे। दोनों ही मुद्दों की गहन जांच और निष्कर्ष निकालने के बाद उचित आदेश पारित किया जाए। इन स्पष्ट निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने कंपनी की ओर से दायर याचिका को अंतिम रूप से निपटा दिया है।