धनबाद: शहर के बारामुड़ी खटाल में रहने वाले करीब 200 परिवारों के सामने एक बार फिर विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है। इन परिवारों का दावा है कि वर्ष 2005 में तत्कालीन उपायुक्त डॉ. बीला राजेश के निर्देश पर उन्हें यहां बसाया गया था। तब से ये परिवार यहां पशुपालन कर अपना जीवनयापन कर रहे हैं, लेकिन अब प्रशासन ने करीब 15 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जमीन की नापी के साथ अतिक्रमण वाले हिस्सों को चिह्नित किया जा रहा है। इस कार्रवाई से यहां रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
🏠 2005 में लोगों को बारामुड़ी में किया गया था शिफ्ट
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2005 में उन्हें बेकारबांध से हटाकर बारामुड़ी में बसाया गया था। तब से वे यहां घर बनाकर रह रहे हैं और पशुपालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। अब 21 वर्षों बाद एक बार फिर हटाए जाने की आशंका से उनके सामने घर और रोजगार दोनों बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। लोगों का सवाल है कि जब उन्हें यहां से हटाना ही था, तो फिर यहां बसाया क्यों गया था? लोगों का कहना है कि बार-बार एक जगह से दूसरी जगह भेजे जाने से उनके बच्चों का भविष्य भी प्रभावित होगा। वर्ष 2005 में भी उन्हें अपनी जगह के लिए संघर्ष करना पड़ा था। अब दोबारा प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होने से पुराने अनुभव फिर ताजा हो गए हैं।
🚜 अतिक्रमण के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई: सीओ
धनबाद अंचल प्रशासन ने सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई तेज कर दी है। अंचल अधिकारी रामप्रवेश कुमार के मुताबिक, बारामुड़ी में करीब 200 घर सरकारी जमीन पर बने हुए हैं। करीब 20 एकड़ जमीन सरकारी है जिसकी नापी कर अतिक्रमण वाले हिस्सों को चिह्नित किया जा रहा है। इसके बाद संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। अंचल अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2005 में इन परिवारों को स्थायी रूप से बसाए जाने का कोई आदेश उनके संज्ञान में नहीं है। दस्तावेजों और जवाब की जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की कार्रवाई पंपू तालाब, लोको तालाब और राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारों पर भी होगी।
🗣️ प्रभावित लोग उपायुक्त से लगाएंगे गुहार
बारामुड़ी के प्रभावित परिवारों ने उपायुक्त से मिलकर अपनी समस्या रखने का निर्णय लिया है। उनकी मांग है कि यदि प्रशासन जमीन खाली कराता है, तो उनके लिए स्थायी पुनर्वास के साथ पशुओं को रखने और दूध का कारोबार जारी रखने की व्यवस्था भी की जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होती है और इन परिवारों के पुनर्वास को लेकर क्या पहल की जाती है।