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पटना कंज्यूमर कोर्ट का फैसला: बिना नोटिस बाइक जब्त करना फाइनेंसर को पड़ा भारी

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ऋण की किस्तों के भुगतान में चूक के आधार पर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना दोपहिया वाहन जब्त करने को सेवा में कमी माना है। आयोग ने शिकायतकर्ता सौरभ राज की परिवाद याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित फाइनेंसर को जब्त की गई मोटरसाइकिल को पूर्ण सर्विसिंग के बाद चालू हालत में वापस करने तथा मानसिक परेशानी एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए ₹10,000 मुआवजा और ₹10,000 मुकदमा खर्च के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया है।

🏍️ बिना नोटिस बाइक जब्त करना पड़ा भारी

मामले के अनुसार शिकायतकर्ता ने 31 जुलाई 2013 को एक मोटरसाइकिल खरीदी थी। इसके लिए संबंधित फाइनेंसर से ₹65,000 का ऋण लिया गया था, जिसे ₹3,245 की 20 समान मासिक किस्तों में चुकाया जाना था। किस्तों के भुगतान में चूक होने पर 18 अगस्त 2014 को फाइनेंसर ने संबंधित पक्षों के माध्यम से मोटरसाइकिल जब्त कर ली। शिकायतकर्ता का आरोप था कि वाहन जब्त करने से पहले नियमानुसार आवश्यक नोटिस की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

⚖️ उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वाहन जब्त करने से पहले बकाया राशि की मांग का नोटिस, ऋण वापसी (लोन रिकॉल) नोटिस तथा वाहन जब्त करने के आशय से संबंधित नोटिस की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। संबंधित फाइनेंसर द्वारा वाहन जब्त करने के आशय से जारी नोटिस प्रस्तुत नहीं किया जा सका। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया। आयोग ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 120 दिनों के भीतर मोटरसाइकिल की पूर्ण सर्विसिंग कराकर उसे चालू हालत में शिकायतकर्ता को वापस किया जाए तथा ₹10,000 मुआवजा और ₹10,000 मुकदमा खर्च का भुगतान किया जाए। निर्धारित अवधि में आदेश का अनुपालन नहीं होने पर तीन माह बाद से वास्तविक भुगतान अथवा वाहन की सुपुर्दगी तक देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू होगा।

💰 आदेश न मानने पर फाइनेंसर को देने होंगे ₹50,000

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित फाइनेंसर मोटरसाइकिल को सर्विसिंग के बाद चालू हालत में वापस करने में विफल रहता है, तो उसे वाहन की लागत के मद में ₹50,000 का भुगतान करना होगा। यह निर्णय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र एवं सदस्य रजनीश कुमार द्वारा पारित किया गया।