Jharkhand Navratri Special: बिना चंदा उगही के सदियों से हो रही है यहां दुर्गा पूजा, तांत्रिक विधि से होती है आराधना
पूरे देश में शारदीय दुर्गा पूजा की धूम है और मां दुर्गा की आराधना को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। देवघर में भी जगह-जगह भव्य पूजा पंडाल सजाए गए हैं। आमतौर पर सभी जगहों पर पूजा समितियां मोहल्ले और समाज के लोगों से चंदा इकट्ठा करके पंडाल और प्रतिमा की व्यवस्था करती हैं, लेकिन देवघर के रोहिणी में एक ऐसी अनूठी परंपरा है जहाँ स्थानीय लोगों से एक रुपया भी चंदा लिए बिना सदियों से मां दुर्गा की पूजा होती चली आ रही है।
👑 अंग्रेजों के दौर से जुड़ी है मंदिर की मान्यता: रोहिणी स्टेट परिवार के सहयोग से होती है पूजा
रोहिणी स्थित इस प्राचीन दुर्गा मंदिर में पूजा का पूरा आयोजन रोहिणी स्टेट परिवार के सहयोग से किया जाता है। इस मंदिर की ख्याति इसकी प्राचीनता के साथ-साथ यहाँ होने वाली तांत्रिक विधि की पूजा के कारण भी है। किंवदंतियों और पुजारियों के अनुसार, अंग्रेजों के शासनकाल में जब मिट्टी की प्रतिमाओं की पूजा का विरोध किया गया था, तब तत्कालीन पुजारी चक्रधर चक्रवर्ती ने अंग्रेजों का सामना किया था। मंदिर बंद करने के आदेश के बाद प्रतिमा का चमत्कारिक रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर दिखाई देना अंग्रेजों के लिए भी अचरज का विषय बना था, जिसके बाद से वहां अंग्रेजों के भी पूजा करने की मान्यता जुड़ी है।
🛒 चंदे से नहीं, हाट-बाजार की आमदनी से चलते हैं धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक आयोजन
रोहिणी स्टेट परिवार के सदस्य संजीव देव बताते हैं कि यहाँ बाहरी दिखावे या सजावट के बजाय तांत्रिक विधि से होने वाले पारंपरिक अनुष्ठानों को मुख्य महत्व दिया जाता है। वर्षों से संचालित होने वाले स्थानीय हाट-बाजार से दुकानदारों द्वारा दिए जाने वाले किराए की आय को मंदिर के कल्याण और पूजा-पाठ के खर्चों में लगाया जाता है। यही कारण है कि इस मंदिर को अन्य पूजा स्थलों से अलग और विशिष्ट पहचान मिलती है, जहाँ आस्था और परंपरा का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।