Mumbai News: गांधी जयंती पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन, शिवाजी पार्क की परमिशन रद्द होने पर जेल भरो आंदोलन
गांधी जयंती के पावन अवसर पर 2 अक्टूबर को मुंबई की धरती पर बड़ा राजनीतिक घमासान देखने को मिलने वाला है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
पार्टी ने पूर्व योजना के तहत दादर स्थित ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में दोपहर 3 बजे से शांतिपूर्ण धरने का कार्यक्रम तय किया था। हालांकि, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में आंदोलन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद पार्टी ने अपनी रणनीति को आक्रामक करते हुए ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा कर दी है।
🤝 आदित्य ठाकरे ने दिया आंदोलन को समर्थन: शिवसेना (UBT) और मनसे 4 अक्टूबर को करेंगी प्रदर्शन
विपक्ष का साथ और आगामी आंदोलन की रणनीति:
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आदित्य ठाकरे का खुला साथ: शिवसेना (UBT) के प्रमुख युवा नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने कॉकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन को अपना खुला समर्थन देने की घोषणा की है।
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4 अक्टूबर को अलग प्रदर्शन: इसके साथ ही शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 4 अक्टूबर को अलग से बड़े विरोध-प्रदर्शन का ऐलान कर रखा है।
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सियासी लामबंदी: मुंबई से शुरू हो रही यह सियासी हलचल आने वाले दिनों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।
📋 कॉकरोच जनता पार्टी की 3 प्रमुख मांगें: CEC के इस्तीफे और आपराधिक केस की मांग
पार्टी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के समक्ष रखी गई मुख्य शर्तें:
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ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दें।
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आपराधिक जांच व कार्रवाई: मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और एकतरफा निर्णयों को लेकर उनके खिलाफ औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
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SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की वर्तमान प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और जनवरी 2025 की पूर्व मतदाता सूची को बिना छेड़छाड़ के बहाल रखा जाए।
📢 अभिजीत दिपके की चेतावनी: ‘मांगें न मानीं तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर होगा घेराव’
पार्टी संस्थापक के तेवर और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा:
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प्रेस क्लब में गरजे संस्थापक: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुंबई प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त पद नहीं छोड़ते, आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
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कई राज्यों में विस्तार: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया, तो अक्टूबर के अंत से गोवा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में व्यापक प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।
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जंतर-मंतर पर कूच: इसके उपरांत देशभर के कार्यकर्ताओं के साथ राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन आयोजित होगा।
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पारदर्शी नियुक्ति और सूची फ्रीज करने की मांग: दिपके ने मांग की कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए जिसमें नागरिक समाज की भागीदारी हो, साथ ही 2025 की मतदाता सूची को पूरी तरह फ्रीज कर चुनावी निष्पक्षता की रक्षा की जाए।
🗳️ विपक्षी दलों ने भी खड़े किए सवाल: 10 महीनों में 14 बार आपत्तियों का खुलासा
चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेद और उठते विवाद:
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विपक्ष का तीखा प्रहार: कई प्रमुख विपक्षी दलों ने एसआईआर (SIR) की कवायद को लेकर ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली की तीखी आलोचना की है।
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सहयोगियों की असहमति: यह विवाद तब और ज्यादा गहरा गया जब यह तथ्य सामने आया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के भीतर कम से कम 14 बार मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
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जानकारी के बिना आदेश जारी करने का आरोप: रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से कई विवादास्पद आदेश अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों की पूर्व जानकारी और सहमति के बिना ही जारी कर दिए गए थे, जिससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।