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Gwalior Master Plan 2035 Controversy: बिल्डरों और अफसरों की मिलीभगत पर शासन की मुहर, टीएंडसीपी आयुक्त को दिए गए जांच के आदेश

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के पॉश इलाके चेतकपुरी रोड के किनारे नाले के अस्तित्व को मिटाकर वहां अवैध रूप से कॉलोनी बसाने के बहुचर्चित मामले में अब शासन स्तर से भी सख्त कार्रवाई की मुहर लग गई है। इस गंभीर प्रकरण में हैरान करने वाली बात यह है कि ग्वालियर के मास्टर प्लान 2035 से चेतकपुरी के मुख्य नाले को ही पूरी तरह से गायब कर दिया गया था। इस पूरे खेल के खुलासे के बाद भोपाल तक प्रशासनिक हलकों में भारी हड़कंप मच गया है, जिसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) के आयुक्त सह संचालक को पत्र लिखकर इस क्षेत्र में जारी सभी विकास अनुमतियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने तथा दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

🔍 एसीएस संजय दुबे के ग्वालियर दौरे के बाद खुला राज, मास्टर प्लान के नक्शों में मिला बड़ा हेरफेर

बीते मई महीने में नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे ग्वालियर के आधिकारिक दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने चेतकपुरी स्थित नाले के आसपास कॉलोनियों के कटने और नाले के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र को बदले जाने की गंभीर स्थिति को अपनी आँखों से देखा था। उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए तुरंत संबंधित सभी फाइलें तलब कर ली थीं। इस मामले से जुड़े कई प्रकरण पहले से ही लोकायुक्त और माननीय न्यायालय में भी विचाराधीन हैं। इसके बाद, दो जुलाई को उन्होंने संयुक्त संचालक टीएंडसीपी केएस गवली को भोपाल तलब कर मास्टर प्लान से जुड़े दस्तावेजों की बारीक समीक्षा की थी।

📋 मास्टर प्लान 2021 में दर्ज था नाला, लेकिन 2035 के नक्शे से कर दिया गया गायब

समीक्षा के दौरान संयुक्त संचालक ने यह स्वीकार किया था कि मास्टर प्लान 2005 के रंगीन मानचित्र पर यह जलस्रोत स्पष्ट रूप से अंकित नहीं था, लेकिन पैनल मानचित्र पर यह दर्ज था। इसके बाद मास्टर प्लान 2021 के रंगीन नक्शे में भी यह जलप्रवाह स्रोत पूरी तरह अंकित था, परंतु मास्टर प्लान 2035 के नए नक्शे से इस महत्वपूर्ण नाले को सुनियोजित तरीके से हटा दिया गया था। इस गंभीर गड़बड़ी का संज्ञान लेते हुए नगरीय प्रशासन विभाग की अवर सचिव सुप्रिया पेंडके ने टीएंडसीपी आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि ग्वालियर के मास्टर प्लान 2021 के आधार पर चेतकपुरी नाले या जलप्रवाह स्रोत को मास्टर प्लान 2035 के पैनल मानचित्र पर यथावत फिर से दर्ज किया जाए।

🛑 भविष्य में किसी भी निर्माण पर रोक, त्रुटिपूर्ण विकास अनुज्ञाओं को निरस्त करने के प्रस्ताव भेजने के आदेश

शासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि इस नाले के रेखांकन क्षेत्र के अंतर्गत भविष्य में कोई भी नई विकास अनुज्ञा (डेवलपमेंट परमिशन) जारी न की जाए। इसके अलावा, जिला कार्यालय द्वारा इस विवादित क्षेत्र में पूर्व में जारी की गईं सभी त्रुटिपूर्ण विकास अनुज्ञाओं को निरस्त करने के वास्ते विभाग को तुरंत प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मास्टर प्लान 2035 से नाले को हटाने की इस साजिश में संलिप्त पाए जाने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ गहन जांच कर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव एक महीने के भीतर शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

🏗️ इन लोगों के नाम पर जारी हुई थीं छह विवादित विकास अनुज्ञाएं

जांच में सामने आया है कि चेतकपुरी जलस्रोत के आसपास पिछले कुछ वर्षों के दौरान कुल छह विकास अनुज्ञाएं जारी की गई थीं, जिनके आधार पर नगर निगम की तरफ से भी धड़ल्ले से प्लॉटिंग और निर्माण की अनुमतियां दे दी गई थीं। इनमें विद्युत गृह निर्माण समिति के सुरेंद्र सिंह भदौरिया के नाम पर तीन विकास अनुज्ञा, दीपक सचेती के नाम पर एक, परिकल्प रियलिटी के राकेश शर्मा के नाम पर एक तथा अर्जुन कपूर के नाम पर एक विकास अनुज्ञा जारी की गई थी, जिनकी अब जांच की जा रही है।