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Sidhi Agriculture Department Advisory: धान का रकबा बढ़कर पहुंचा 1.20 लाख हेक्टेयर, कीट नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने दी ये खास सलाह

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में इस वर्ष धान की फसल पर पत्ती लपेटक कीट (लीफ फोल्डर) का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। किसानों से लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मैदानी अमले के साथ खेतों का औचक भ्रमण किया और धान की फसलों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने किसानों को फसल में इस कीट के संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने और संक्रमण की शुरुआती अवस्था में ही इसके नियंत्रण के जरूरी उपाय अपनाने की विशेष सलाह दी है।

🔍 कैसे पहचानें धान की फसल में लगा है पत्ती लपेटक कीट? जानिए इसके नुकसान और रकबे की स्थिति

सीधी जिले में इस बार धान का कुल रकबा बढ़कर लगभग 1.20 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह करीब 94 हजार हेक्टेयर था। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पंकज सिंह ने फसल की विशेषता बताते हुए कहा कि यह कीट धान की हरी पत्तियों को आपस में जोड़कर लपेट लेता है और फिर उसी के भीतर छिपकर पत्ती के हरे हिस्से को खुरच-खुरच कर खाता है। इसके प्रभाव से पत्तियों पर लंबी-लंबी सफेद और पारदर्शी धारियां उभर आती हैं। यदि इस प्रकोप को समय रहते न रोका जाए, तो संक्रमण बढ़ने पर खेत का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह सफेद या झुलसा हुआ नजर आने लगता है, जिससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) की प्रक्रिया बाधित होती है और अंततः उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

🧪 कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने दिए बचाव के उपाय, यूरिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की सलाह

फसल को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। किसानों से कहा गया है कि वे अपने खेतों और मेड़ों को हमेशा साफ-सुथरा रखें तथा आसपास उगने वाले अनावश्यक खरपतवारों को तुरंत नष्ट करें। शुरुआती दौर में कीट से प्रभावित लपेटी हुई पत्तियों को सुंडी सहित तोड़कर नष्ट किया जा सकता है। इसके अलावा, खेत के ऊपर दोनों सिरों से रस्सी पकड़कर खींचने (रस्सी चलाने) से पत्ती के भीतर छिपी सुंडियां नीचे पानी में गिर जाती हैं, जिससे कीट का प्रकोप कम होता है। अधिकारियों ने किसानों को यह भी चेतावनी दी है कि वे फसल में आवश्यकता से अधिक मात्रा में नाइट्रोजन या यूरिया का प्रयोग बिल्कुल न करें। यदि प्रति पौधा 2 से अधिक पत्तियां प्रभावित दिखें, तो विभागीय संस्तुति के आधार पर उचित कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है।

💊 कीट से निपटने के लिए कृषि विभाग ने सुझाए ये प्रभावी कीटनाशक और छिड़काव का सही तरीका

फसल को सुरक्षित रखने के लिए कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ चुनिंदा और प्रभावी दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दी है:

  • क्लोरोपायरीफॉस 20%: 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से उपयोग करें।

  • कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 50%: 400 ग्राम प्रति एकड़ की मात्रा मिलाएं।

  • क्लोरांट्रानिलिप्रोल 18.5%: 60 मिलीलीटर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।

  • फिप्रोनिल 5% एससी: 400 से 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ का प्रयोग करें।

कृषि विभाग ने किसानों को निर्देश दिए हैं कि इन सभी कीटनाशकों का घोल तैयार करते समय 150 से 200 लीटर पानी प्रति एकड़ का उपयोग करें और हमेशा शाम के समय ही छिड़काव करें। किसानों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की दुविधा होने पर वे अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर फसल की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त करें।