घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण (DTES) का खुलासा: भारत में आधी से ज्यादा ओवरनाइट यात्राओं का मकसद धार्मिक और तीर्थयात्रा
नई दिल्ली: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किए गए घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण (DTES) के आंकड़े सामने आए हैं, जो भारतीयों की यात्रा प्राथमिकताओं के बारे में एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। सर्वे के अनुसार, जब देश के लोग एक रात के लिए भी घर से बाहर निकलते हैं, तो लगभग आधे मामलों में उनका मुख्य उद्देश्य धार्मिक यात्रा या तीर्थाटन होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर 100 में से 48 ओवरनाइट यात्राएं धार्मिक उद्देश्यों के लिए की जाती हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में ‘स्वास्थ्य और चिकित्सा’ (38.4%) और शहरी क्षेत्रों में ‘छुट्टियों, मनोरंजन और आराम’ (36.4%) के लिए की जाने वाली यात्राएं दूसरे प्रमुख स्थान पर रहीं।
इस सर्वे से जुड़े कुछ अन्य मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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औसतन यात्री: एक यात्रा में औसतन 2.03 लोग शामिल होते हैं।
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ठहरने की अवधि: करीब 80 प्रतिशत यात्री अपनी यात्रा के दौरान 5 दिन या उससे कम समय तक ही रुकना पसंद करते हैं।
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पसंदीदा महीने: छुट्टियों और मनोरंजन के लिए मई और अक्टूबर का महीना सबसे ज्यादा पसंद किया गया।
🗺️ सबसे ज्यादा यात्री वाले राज्य: उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर
देश के भीतर और बाहर से आने वाले आगंतुकों को मिलाकर कुल यात्री यात्राओं के मामले में राज्यों की स्थिति इस प्रकार रही:
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उत्तर प्रदेश: कुल यात्राओं का सबसे बड़ा हिस्सा (15.7%) दर्ज किया गया।
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तमिलनाडु: 13.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
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राजस्थान: इस सूची में 8.0 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है।
🚆 यातयात और ठहरने के साधन: ग्रामीण और शहरी पसंद में अंतर
यात्रा के दौरान लोगों के आवागमन और ठहरने के तरीके अलग-अलग रहे:
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यातायात के साधन: ग्रामीण परिवारों के लिए बस सबसे पसंदीदा विकल्प रहा, जिसकी हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी परिवारों ने यात्रा के लिए ट्रेन को सबसे अधिक प्राथमिकता दी, जिसकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत दर्ज की गई।
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ठहरने की जगह: शहरी ट्रैवलर्स के बीच होटल और गेस्ट हाउस सबसे लोकप्रिय विकल्प थे (36%)। दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों में ‘अन्य गैर वाणिज्यिक आवास’ का हिस्सा सबसे बड़ा (28%) रहा, जिसमें खुद का हॉलिडे होम, नियोक्ताओं द्वारा दिया गया अस्थायी आवास या धार्मिक/मिशनरी संगठनों द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराया गया आवास शामिल है।
💰 सबसे महंगे सफर और एक दिन की यात्राएं
रिपोर्ट के अनुसार चिकित्सा और स्वास्थ्य संबंधी यात्राओं में सबसे अधिक खर्च हुआ, जो ग्रामीण इलाकों में 29,454 रुपये और शहरी इलाकों में 41,649 रुपये दर्ज किया गया। इसके अलावा, पिछले 30 दिनों के भीतर 65.1 प्रतिशत ग्रामीण और 46.2 प्रतिशत शहरी परिवारों ने कम से कम एक ‘एक दिन की यात्रा’ (ऐसी यात्राएं जिनमें रात भर रुकने की जरूरत नहीं होती) की थी। इनमें ‘सामाजिक’ (33%) और ‘खरीदारी’ (26%) सबसे आम यात्राएं रहीं, और खरीदारी पर दोनों ही क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खर्च किया गया।