सागर (मध्य प्रदेश): बिहार के ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी की तर्ज पर मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल (सागर जिला) में एक बार फिर स्वाभिमान और जिजीविषा की अनोखी कहानी सामने आई है।
सागर जिले की नरयावली विधानसभा के इमलिया गांव निवासी 71 वर्षीय अजब सिंह आदिवासी ने 7 वर्षों तक निरंतर अथक परिश्रम कर अपनी ही जमीन पर विशाल कुआं खोद डाला। गांव में पीने के पानी की भीषण किल्लत थी और लोग दूसरों के निजी कुओं पर निर्भर थे। एक दिन पानी भरने के दौरान जब अजब सिंह की पत्नी का अपमान किया गया, तो आहत होकर उन्होंने अकेले ही अपनी मेहनत से कुआं खोदने का दृढ़ संकल्प ले लिया।
🏛️ सरकारी दफ्तरों के काटे दर्जनों चक्कर, प्रशासनिक बेरुखी के बाद खुद उठाया फावड़ा और कुदाल
अजब सिंह को अपनी जवानी के दिनों में 2 एकड़ सरकारी जमीन का पट्टा मिला था।
गांव में भीषण जलसंकट को देखते हुए उन्होंने कुआं निर्माण की सरकारी योजनाओं का लाभ पाने हेतु ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर जनपद पंचायत और कलेक्टर कार्यालय तक गुहार लगाई। किंतु हर बार प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी लालफीताशाही के चलते उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद जब कोई सरकारी मदद नहीं मिली, तो उन्होंने स्वयं अपने दम पर कुआं खोदने की ठान ली।
💔 “निजी कुएं पर सहना पड़ा था अपमान का घूंट”, पत्नी सदारानी ने सुनाई आपबीती
अजब सिंह की धर्मपत्नी सदारानी बताती हैं कि जब उनकी बेटियां बहुत छोटी थीं, तब पूरा गांव पानी की बूंद-बूंद को तरसता था।
लोग छोटे-छोटे नालों का गंदा पानी छानकर पीने को मजबूर थे। एक दिन जब वे गांव के एक दबंग के निजी कुएं पर पानी भरने गईं, तो उन्हें बुरी तरह अपमानित कर भगा दिया गया। सदारानी ने घर आकर यह बात अपने पति को बताई। पत्नी के इस अपमान ने अजब सिंह के अंदर आत्मसम्मान की ज्वाला जला दी और उन्होंने उसी दिन से बिना किसी की मदद के फावड़ा-कुदाल उठाकर जमीन खोदना शुरू कर दिया।
🌕 सुबह, शाम और चांदनी रातों में लगातार बहाया पसीना, 7 साल की कड़ी मेहनत रंग लाई
अजब सिंह याद करते हैं कि उन्होंने दिन-रात एक करके कुएं की खुदाई की।
यदि रात में चांदनी होती थी, तो वे रात भर भी कुआं खोदते रहते थे। शुरुआती वर्षों में भारी मानसून के कारण खोदे गए गड्ढे में बार-बार मिट्टी भर जाती थी और मलबा साफ करने में भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। किंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी जमा पूंजी लगाकर और 7 सालों तक लगातार पसीना बहाकर उन्होंने जमीन के सीने से मीठा पानी निकाल ही लिया। आज अजब सिंह का यह कुआं भीषण गर्मी में भी लबालब भरा रहता है।
💧 भीषण जलसंकट में गांव का सहारा बना अजब सिंह का कुआं, अब सता रहा है अधिग्रहण का डर
आज स्थिति यह है कि जब इमलिया गांव के सभी जलस्रोत सूख जाते हैं, तब केवल अजब सिंह के कुएं में प्रचुर मात्रा में जल उपलब्ध रहता है।
गर्मी के मौसम में प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण उनके कुएं के पानी पर ही आश्रित रहते हैं। हालांकि, भोले-भाले अजब सिंह और उनकी पत्नी को अब यह डर सता रहा है कि कहीं प्रशासन उनसे उनका यह कुआं पूरी तरह से छीन (अधिग्रहित) न ले। इसी आशंका के कारण वे कुएं में पंचायत की पक्की मोटर लगाने का विरोध करते हैं और चाहते हैं कि जिसको भी पानी चाहिए, वह कुएं में उतरकर या रस्सी से पानी भर ले।
🗣️ प्रशासन ने कराया कुएं का अधिग्रहण, स्थानीय सरपंच बोले— “अजब सिंह की मेहनत ने गांव को उबारा”
मामले में स्थानीय सरपंच हेमराज अहिरवार का कहना है कि गर्मी के दिनों में जब गांव में पेयजल का भयावह संकट उत्पन्न होता है, तब अजब सिंह का कुआं ही एकमात्र जीवनदायिनी सहारा बनता है।
ऐसे में सागर के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) के निर्देशानुसार कानून-व्यवस्था और जनहित के तहत कुएं से पानी की आपूर्ति गांव में कराई जाती है। सरपंच का कहना है कि कोई भी अजब सिंह का हक नहीं मारना चाहता, प्रशासन और ग्रामीण केवल जलसंकट के समय उनके इस कुएं से गांव की प्यास बुझाने का सहयोग चाहते हैं।