हरियाणा का ₹657 करोड़ का बैंक घोटाला: CBI की रडार पर एक और वरिष्ठ IAS अधिकारी, जांच के दायरे में आए कुल 8 अफसर
चंडीगढ़: हरियाणा के बहुचर्चित ₹657 करोड़ के आईडीएफसी (IDFC) फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच लगातार नए और गंभीर मोड़ ले रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अब हरियाणा कैडर के एक और वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी की भूमिका पर अपनी जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, संबंधित अधिकारी की कथित भूमिका विकास एवं पंचायत विभाग का आधिकारिक खाता चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में खुलवाने से जुड़ी बताई जा रही है। जिस समय यह कथित घोटाला घटित हुआ, उस दौरान संबंधित अधिकारी मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव (APS) के साथ-साथ विकास एवं पंचायत विभाग के प्रशासनिक प्रमुख का दायित्व संभाल रहे थे।
🏛️ 8 IAS अधिकारियों तक पहुंची जांच की आंच, 3 अफसर पहले ही भेजे जा चुके हैं न्यायिक हिरासत में
सीबीआई की विस्तृत जांच में अब तक कुल आठ (8) आईएएस अधिकारियों के नाम सीधे तौर पर जांच के दायरे में आ चुके हैं।
इनमें से एक अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इससे पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, राम कुमार सिंह तथा सेवानिवृत्त आईएएस प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त मणीराम शर्मा, डी.के. बेहरा, मोहम्मद शायिन और विनीत गर्ग की भूमिका भी जांच एजेंसियों की रडार पर है। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17-ए के तहत आवश्यक पूर्व अनुमति प्राप्त करने के पश्चात इन अधिकारियों के विरुद्ध औपचारिक जांच आगे बढ़ाई है।
🏦 10 सरकारी विभागों के खातों से ₹657 करोड़ की भारी हेराफेरी, ED कर रही है मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से हरियाणा सरकार के 8 प्रमुख विभागों तथा चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों के खातों से करीब ₹657 करोड़ की अवैध हेराफेरी की गई।
इस विशाल वित्तीय घोटाले की आपराधिक जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और अवैध वित्तीय लेन-देन के कोणों से पूरे मामले का पर्दाफाश करने में जुटा हुआ है।
📜 फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR), RTGS और बैंक लेटर्स बनाकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गई राशि
प्रारंभिक जांच और साक्ष्यों के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया है कि इस सुनियोजित घोटाले को अंजाम देने के लिए फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDR), फर्जी आरटीजीएस (RTGS) व एनईएफटी (NEFT) अनुरोध पत्र, डेबिट नोट, बैंक के आधिकारिक पत्र तथा फर्जी बैंक स्टेटमेंट तक तैयार किए गए।
इन कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी खजाने से धनराशि अवैध रूप से विभिन्न शेल (मुखौटा) कंपनियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की गई।
💎 ज्वेलर्स, रियल एस्टेट कारोबारियों और बिचौलियों के नेटवर्क को खंगाल रही हैं जांच एजेंसियां
जांच एजेंसियों का दावा है कि शेल कंपनियों के खातों में पहुंचाई गई सरकारी राशि बाद में देश के प्रमुख ज्वेलर्स, रियल एस्टेट कारोबारियों और अन्य व्यावसायिक संस्थाओं तक घुमाकर पहुंचाई गई।
इस पूरे अंतर्राज्यीय सिंडिकेट में बैंक अधिकारियों, बिचौलियों, बड़े कारोबारी समूहों और कुछ भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों की सांठगांठ की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
⚖️ CBI और ED की समानांतर कार्रवाई जारी, आने वाले दिनों में हो सकते हैं बड़े खुलासे
मामले में सीबीआई आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के कोण पर कार्रवाई कर रही है, तो वहीं ईडी अवैध वित्तीय साम्राज्य को ध्वस्त करने हेतु जगह-जगह संपत्तियों को चिह्नित कर रही है।
जांच एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में शामिल कुछ और प्रभावशाली चेहरे बेनकाब हो सकते हैं और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।