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जामताड़ा के नाला में 50 एकड़ में होती है काजू की खेती, प्रोसेसिंग प्लांट न होने से औने-पौने दाम में बेचने को मजबूर हैं किसान

जामताड़ा: झारखंड जिले का नाला प्रखंड पूरे क्षेत्र में ‘काजू नगरी’ के नाम से जाना जाता है। यहां लगभग 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में काजू की भरपूर खेती होती है। लेकिन विडंबना यह है कि आज तक यहां कोई प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित नहीं हो पाया है। इसका नतीजा यह है कि स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को अपना कीमती काजू बहुत कम और औने-पौने दामों में बेचना पड़ता है। हालांकि, अब जामताड़ा जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लिया है।

📉 कौड़ी के दाम बिकता है जामताड़ा का काजू, पश्चिम बंगाल के व्यापारी उठाते हैं फायदा

प्रोसेसिंग प्लांट न होने के कारण नाला प्रखंड में काजू की खेती को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। काजू की पैदावार बहुत अच्छी होने के बावजूद यह कौड़ी के भाव बिक जाता है। आसपास के ग्रामीण जंगलों और बागानों से काजू इकट्ठा कर बोरियों में भरकर रखते हैं और पश्चिम बंगाल से आने वाले व्यापारियों के हाथों औने-पौने दामों में बेच देते हैं। इससे न तो किसानों को मेहनत की सही आमदनी मिलती है और न ही स्थानीय लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल पाता है। वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार को भी हर साल भारी राजस्व (Revenue) का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

🌱 नाला प्रखंड में काजू की खेती की अपार संभावनाएं, प्रोसेसिंग प्लांट से बढ़ेगा रोजगार

नाला प्रखंड की उपजाऊ मिट्टी काजू की बागवानी के लिए बेहद अनुकूल और लाभकारी मानी जाती है। यदि सरकार और प्रशासन का ध्यान यहां प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने पर केंद्रित हो जाए, तो किसानों को काजू की खेती से न सिर्फ बंपर मुनाफा और अच्छी आमदनी होगी, बल्कि क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही सरकार को भी हर साल अच्छा-खासा राजस्व प्राप्त होगा।

🏛️ झारखंड सरकार और जिला प्रशासन ने लिया संज्ञान, उपायुक्त ने अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

काजू की खेती को व्यवसायिक रूप से बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब झारखंड सरकार और जामताड़ा जिला प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। जिला प्रशासन की टीम ने जिला कृषि पदाधिकारी और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नाला के काजू बागानों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना और काजू उत्पादन को बढ़ाने पर गहन चर्चा हुई। उपायुक्त ने मौके पर ही वन एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में अविलंब आवश्यक प्रस्ताव और कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए।

उपायुक्त आलोक कुमार का वक्तव्य: “नाला में काजू की खेती की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री स्तर से संज्ञान लिया गया है। जिला प्रशासन किसानों को जागरूक करने, वैज्ञानिक तरीके से खेती को प्रोत्साहित करने और प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करेगा। इस संबंध में जल्द ही एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जा रहा है।”

📊 काजू के साथ हल्दी और ओल की अंतरफसली खेती की संभावनाएं, सर्वे के लिए पहुंचेगी विशेषज्ञ टीम

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि काजू की खेती के साथ-साथ इस मिट्टी में हल्दी और ओल की खेती की भी काफी अच्छी संभावनाएं हैं। काजू के पेड़ों के बीच अंतरफसली (Intercropping) के रूप में हल्दी उगाने से किसानों को दोहरी आमदनी होगी। उन्होंने जानकारी दी कि यहां की मिट्टी काजू, हल्दी और ओल तीनों के लिए उपजाऊ है।

जल्द ही एक विशेषज्ञ कंपनी की टीम प्रोसेसिंग प्लांट की जगह और संभावनाओं का सर्वे करने जामताड़ा पहुंचेगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे काजू की खेती को लेकर आगे आएं, सरकारी तंत्र हर कदम पर उनके साथ मुस्तैदी से खड़ा है।