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Ranchi SSC Scam: रांची में SSC परीक्षा का हाईटेक फर्जीवाड़ा उजागर; सिस्टम हैक कर पेपर सॉल्व कराने वाले 4 गिरफ्तार

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में एसएससी (SSC) परीक्षा के नाम पर चल रहे एक बहुत बड़े हाईटेक फर्जीवाड़े का पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पर्दाफाश किया है। ऑनलाइन परीक्षा केंद्र के भीतर आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर सिस्टम हैकिंग, स्क्रीन मिररिंग और रिमोट एक्सेस के जरिए अभ्यर्थियों को पास कराने का एक संगठित व अवैध खेल धड़ल्ले से चल रहा था। रांची पुलिस ने इस मामले में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए गिरोह के मुख्य सरगनाओं समेत चार लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक परीक्षार्थी, इनविजिलेटर (वीक्षक), परीक्षा केंद्र का केंद्राधीक्षक (सेंटर सुपरिटेंडेंट) और मुख्य आईटी कर्मी शामिल हैं। यह पूरा मामला टाटीसिल्वे थाना क्षेत्र स्थित ‘जीनियस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ में आयोजित की जा रही एसएससी (जीडी/कॉन्स्टेबल) सीएपीएफ परीक्षा-2026 से सीधा जुड़ा हुआ है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 21 मई 2026 की सुबह करीब 10 बजे जिला पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि उक्त परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर सिस्टम को रिमोट सॉफ्टवेयर के जरिए हैक करने की कोशिश की जा रही है। सूचना मिलते ही रांची पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और एसएसपी के निर्देश पर एक विशेष टेक्निकल टीम का गठन कर परीक्षा केंद्र में औचक छापेमारी की गई। सघन जांच के दौरान पुलिस की नजर लैब-1 में बैठे एक संदिग्ध परीक्षार्थी पर गई। तकनीकी फॉरेंसिक जांच में पता चला कि परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले उसके कंप्यूटर सिस्टम को दोबारा री-स्टार्ट कराया गया था, जो कि परीक्षा के तय नियमों और सुरक्षा मानकों के सख्त खिलाफ था।

💻 परीक्षा केंद्र के ठीक सामने किराए के मकान में बना था हैकिंग का मुख्य कंट्रोल रूम: अभ्यर्थी और इनविजिलेटर ने उगला राज

जब पुलिस ने उस कंप्यूटर की गहराई से तकनीकी जांच की, तो सामने आया कि सिस्टम को किसी बाहरी लोकेशन से रिमोटली एक्सेस (Remotely Accessed) किया जा रहा था। इससे स्क्रीन मिररिंग और सिस्टम हैकिंग की आशंका पूरी तरह से सच साबित हो गई। पुलिस ने मौके पर ही संबंधित अभ्यर्थी मृत्युंजय कुमार यादव और ड्यूटी पर तैनात इनविजिलेटर संजीत कुमार को हिरासत में ले लिया।

कड़ाई से की गई पूछताछ में दोनों ने पुलिस के सामने पूरे हाईटेक नेटवर्क का राज उगल दिया। दोनों ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि परीक्षा केंद्र के ठीक सामने सड़क पार एक किराए के मकान में पूरा अवैध कंट्रोल रूम और टेक सेटअप तैयार किया गया था। वहां परीक्षा केंद्र का केंद्राधीक्षक विकाश कुमार और मुख्य आईटी कर्मी मुन्ना राज अत्याधुनिक सिस्टम के साथ मौजूद रहते थे। वहीं से हाई-स्पीड इंटरनेट और रिमोट कंप्यूटर सिस्टम के जरिए परीक्षा केंद्र के कंप्यूटरों को हैक कर प्रश्नों को बाहर बैठे सॉल्वरों से हल कराया जाता था।

💰 बिहार के बड़े बिचौलियों ने 6 लाख रुपए में कराई थी फाइनल सेटिंग: गिरोह जब्त रखता था ओरिजिनल सर्टिफिकेट

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस टीम ने तुरंत सड़क पार स्थित उस खुफिया ठिकाने पर छापेमारी की और केंद्राधीक्षक विकाश कुमार व आईटी कर्मी मुन्ना राज को भी रंगे हाथों दबोच लिया। पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि यह एक अंतरराज्यीय संगठित आपराधिक गिरोह है, जो सीधे-साधे अभ्यर्थियों से सरकारी नौकरी दिलाने और परीक्षा पास कराने के नाम पर 6 लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक की मोटी रकम वसूलता था।

इस गिरोह का पूरा नेटवर्क पड़ोसी राज्य बिहार के बड़े बिचौलियों के जरिए संचालित किया जा रहा था। सौदे की सुरक्षा और पैसे की गारंटी पक्की करने के लिए यह गिरोह अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र (ओरिजिनल सर्टिफिकेट) भी एडवांस में अपने कब्जे में सुरक्षित रख लेता था। गिरफ्तार परीक्षार्थी मृत्युंजय ने पुलिस को बताया कि बिहार के एक नामी बिचौलिये ने 6 लाख रुपए में परीक्षा पास कराने की उसकी पूरी सेटिंग कराई थी, जिसके एवज में उसने एडवांस पैसे और सर्टिफिकेट दिए थे।

📁 भारी मात्रा में कंप्यूटर, एडमिट कार्ड और बैंक चेक बरामद: नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत केस दर्ज

इस हाईटेक छापेमारी के दौरान रांची पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में अवैध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गैजेट्स और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद किए गए सामानों में कई कंप्यूटर मॉनिटर, सीपीयू, हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड डिवाइस, दर्जनों मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों के ब्लैंक चेक, अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड और बड़ी संख्या में मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र शामिल हैं।

फिलहाल, इस गंभीर धोखाधड़ी को लेकर टाटीसिल्वे थाना में नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2) तथा देश में कड़े किए गए ‘द पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024’ के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच तेजी से की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस गिरोह के तार बिहार और झारखंड के कई अन्य ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों से भी जुड़े होने की पूरी आशंका है, जिसकी कड़ियों को जोड़ने और अन्य फरार सदस्यों की तलाश के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।