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Ranchi News: केंद्र पर बरसे JMM नेता सुप्रियो भट्टाचार्य; बोले—झारखंड का GST रोककर आर्थिक कमर तोड़ रही सरकार

रांची: झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोलते हुए बेहद तीखा हमला बोला है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्या ने शुक्रवार को रांची में आयोजित एक आपात संवाददाता सम्मेलन (प्रेस कॉन्फ्रेंस) को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में पूरा देश बेहद गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट के दौर से गुजर रहा है। महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, लेकिन देश के प्रधानमंत्री को इसकी रत्ती भर भी चिंता नहीं है। वे जमीनी हकीकत से आंखें मूंदकर बैठे हैं।

🎭 पीएम मोदी के विदेश दौरे पर साधा निशाना: झामुमो नेता का आरोप—विश्व स्तर पर प्रहसन के केंद्र बन गए प्रधानमंत्री

सुप्रियो भट्टाचार्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्रा और उनके राजनयिक बयानों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपने विदेश दौरे के अंतिम चरण में पीएम ने जिस तरह का व्यवहार और आचरण प्रदर्शित किया, उससे वे राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर प्रहसन (मजाक) के केंद्र बनकर रह गए हैं।

उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए पीएम मोदी की तुलना ‘नीरो’ से कर डाली। झामुमो नेता ने तंज कसते हुए कहा, “जब रोम जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था। आज देश के राज्य जल रहे हैं और संकट में हैं, ऐसे में बांसुरी बजाने की जगह प्रधानमंत्री की यह प्रहसन वाली हंसी राज्यों के लिए एक बेहद भयावह और गैर-जिम्मेदाराना संदेश है।”

📉 पिछले 12 वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति हुई बदतर: चुनाव जीतना और देश चलाना अलग बात

झामुमो नेता ने देश के वित्तीय हालातों पर बात करते हुए दावा किया कि पिछले 12 वर्षों के भाजपा शासनकाल में देश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से बदतर हो चुकी है। उन्होंने कहा, “हम पिछले एक दशक से यही बात चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे, लेकिन हमारी बात को अनसुना किया गया। अब तो खुद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़े और भाजपा समर्थित बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी दबी जुबान में यह मानने लगे हैं कि केवल चुनाव जीतना एक अलग कला है और देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना बिल्कुल अलग बात है।” सुप्रियो भट्टाचार्या ने आगे कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री द्वारा देश विकास का जो ‘छद्म प्रतिरूप’ (मॉडल) गढ़ने की कोशिश की गई थी, वह अब पूरी तरह असफल साबित हो चुकी है।

⚖️ पश्चिम बंगाल के घटनाक्रम पर दी प्रतिक्रिया: बोले—वहां लागू है आपातकाल जैसी दमनकारी स्थिति

सुप्रियो भट्टाचार्या ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम पर भी खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा की राजनीतिक बिसात और सरकार बनने के बावजूद सामाजिक हालात बेहद गंभीर और चिंताजनक बने हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, “बंगाल में बकरीद की कुर्बानियों और धार्मिक स्वतंत्रताओं पर तरह-तरह के अनुचित प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। आम जनता को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार भी नहीं मिल रहा है। वहां पूरी तरह से अघोषित आपातकाल (Emergency) जैसी दमनकारी स्थिति बनी हुई है।” उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर समाज इस तरह अस्थिर रहा और नागरिकों के बीच आपसी विश्वास समाप्त हुआ, तो यह देश की अखंडता के लिए बेहद खतरनाक होगा।

💰 झारखंड को केंद्र से नहीं मिल रहा उसका हक: राज्य का बकाया और GST की हिस्सेदारी रोकी गई

पार्टी ने झारखंड के साथ हो रहे कथित सौतेले व्यवहार और आर्थिक उपेक्षा के मुद्दे को एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाया। सुप्रियो भट्टाचार्या ने केंद्र पर राज्य की आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाते हुए कहा, “झारखंड को उसके हक का GST का पैसा समय पर नहीं मिल रहा है। किसी भी केंद्रीय या जनहित की योजना में केंद्र सरकार की ओर से एक रुपया भी आवंटित नहीं किया जा रहा है। हमारे पुराने कोल रॉयल्टी और अन्य बकाए तो बहुत दूर की बात है, अब वर्तमान में चालू जीएसटी में भी हमारी न्यायसंगत हिस्सेदारी को दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोका जा रहा है। यह सीधे तौर पर एक आदिवासी बहुल राज्य की आर्थिक कमर तोड़ने की सोची-समझी साजिश है।”

🤝 महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ जनता हो गोलबद्ध: केंद्र की तुलना ‘शुतुरमुर्ग’ से की

संवाददाता सम्मेलन के अंत में सुप्रियो भट्टाचार्या ने देश और राज्य की जनता से अपील करते हुए कहा कि बढ़ती कमरतोड़ महंगाई और खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी बेरोजगारी के खिलाफ अब जनता को खुद जागरूक होकर सड़कों पर गोलबद्ध (एकजुट) होना होगा। उन्होंने अंदेशा जताया कि आने वाले दिनों में अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सत्ता पक्ष द्वारा समाज को आपस में बांटने और काटने की कोशिशें और तेज की जाएंगी।

झामुमो ने केंद्र सरकार की प्रशासनिक नीति की तुलना एक ‘शुतुरमुर्ग’ से की, जो सामने आ रहे बड़े खतरे को नजरअंदाज कर अपना सिर रेत में छिपा लेता है और सोचता है कि संकट टल गया है। उन्होंने कहा कि झामुमो झारखंड के अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली तक संघर्ष जारी रखेगी।