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Punjab and Haryana High Court: तेल संकट के बीच हाईकोर्ट का बड़ा आदेश; जजों के लिए कार पूलिंग और 33% स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम

चंडीगढ़: दुनिया भर में गहराते तेल संकट (Global Oil Crisis) को देखते हुए और ईंधन की खपत को नियंत्रित व आसान बनाने के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बड़ा और अनुकरणीय कदम उठाया है। हाईकोर्ट प्रशासन ने डिजिटल और शेयर्ड रिसोर्स (साझा संसाधनों) पर ज्यादा भरोसा करने के सख्त और विशेष आदेश जारी किए हैं। इन पर्यावरण-अनुकूल उपायों के तहत माननीय जजों से आपस में कार पूलिंग (Car Pooling) को बढ़ावा देने की विशेष अपील की गई है। इसके साथ ही, ईंधन और समय की बचत के लिए कोर्ट के सामने लिस्टेड (सूचीबद्ध) ज्यादातर मामलों की नियमित सुनवाई अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल मोड) के जरिए करने का भी आधिकारिक आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक मोर्चे पर बड़ा बदलाव करते हुए कोर्ट के 33 परसेंट कर्मचारियों को घर से काम (Work From Home) करने की मंजूरी दे दी गई है।

💻 वर्चुअल सुनवाई के लिए रजिस्ट्री को टेक्निकल सपोर्ट पुख्ता करने के निर्देश: बार एसोसिएशन से भी मांगा सहयोग

हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक गाइडलाइन में स्पष्ट कहा गया है कि अदालती रजिस्ट्री को सभी संबंधित पक्षों को समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लिंक बांटना होगा। इसके अलावा, वर्चुअल सुनवाई के दौरान कोर्ट या बार के सदस्यों को किसी भी प्रकार की तकनीकी परेशानी न हो, इसके लिए स्थिर इंटरनेट सुविधाएं और जरूरी टेक्निकल सपोर्ट हर हाल में पक्का करना होगा।

हाईकोर्ट ने बार के सम्मानित सदस्यों (वकीलों) से भी अपील की है कि वे इस तेल संकट के दौर में डिजिटल माध्यम से होने वाली वर्चुअल सुनवाई को असरदार तरीके से चलाने के लिए प्रशासन को अपना पूरा सहयोग दें, ताकि पेंडिंग मामलों का निपटारा बिना किसी रुकावट के त्वरित गति से किया जा सके।

🏠 एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर 33% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम: रजिस्ट्रार तैयार करेंगे वीकली रोस्टर, फोन पर रहना होगा उपलब्ध

प्रशासनिक (एडमिनिस्ट्रेटिव) स्तर पर की गई व्यवस्था के अनुसार, हाईकोर्ट की हर ब्रांच या सेक्शन में, जहां तक ​​संभव हो, कुल कार्यबल के 33 परसेंट तक कर्मचारियों को घर से काम करने की इजाज़त दी जा सकती है। हालांकि, यह भी कड़ाई से पक्का किया जाएगा कि दफ्तर का काम प्रभावित न हो और बाकी के कर्मचारी बिना किसी रुकावट के रूटीन काम करने के लिए ऑफिस आते रहें।

इस संबंध में संबंधित रजिस्ट्रार को पूरे हफ्ते का काम का एडवांस शेड्यूल (रोस्टर) पहले से तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश में साफ किया गया है कि जो भी कर्मचारी दूर से (वर्क फ्रॉम होम) काम कर रहे हैं, वे ऑन-ड्यूटी माने जाएंगे और उन्हें हर समय फोन पर उपलब्ध रहना होगा, ताकि इमरजेंसी या जरूरत पड़ने पर वे तुरंत ऑफिस पहुंच सकें।

🚲 काम प्रभावित होने पर रद्द हो सकेगा वर्क फ्रॉम होम: ऑफिस आने वाले कर्मियों को साइकिल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल की सलाह

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह क्लॉज (शर्त) भी साफ तौर पर जोड़ा है कि अगर किसी विशेष ब्रांच या सेक्शन में काम की प्रकृति के असेसमेंट (मूल्यांकन) के आधार पर घर से काम करने का इंतजाम बेअसर पाया जाता है या इससे न्याय प्रक्रिया धीमी होती है, तो संबंधित रजिस्ट्रार के पास यह अधिकार होगा कि वह रजिस्ट्रार-जनरल से विशेष अनुमति लेकर ऐसे घर से काम करने के प्रबंधों पर तुरंत रोक लगा सकता है या उनमें जरूरी बदलाव कर सकता है।

इसके साथ ही, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का ऑफिस आना बेहद जरूरी है, उन्हें फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) बचाने के अनूठे तरीके अपनाने के लिए लगातार मोटिवेट किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें कार पूलिंग करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सरकारी बसों या मेट्रो) का इस्तेमाल करने और व्यक्तिगत वाहनों के स्थान पर साइकिल या इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।