Muzaffarpur School Violence: मूक-बधिर विद्यालय में दिव्यांग बच्चों की बेरहमी से पिटाई, वीडियो वायरल होने पर FIR
बिहार के मुजफ्फरपुर से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। मिठनपुरा थाना क्षेत्र के चर्च रोड स्थित बागेश्वरी मूक-बधिर आवासीय विद्यालय में दिव्यांग बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
📹 वायरल वीडियो में खौफनाक मंजर: बच्चों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया
वायरल वीडियो में स्कूल के कर्मचारी बच्चों को बेरहमी से पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक फुटेज में कर्मचारी एक छात्र को दौड़ा-दौड़ाकर पीट रहा है, जबकि दूसरे वीडियो में एक बच्चे को बेड पर अर्धनग्न अवस्था में मारते हुए देखा जा सकता है। वहीं, एक अन्य वीडियो में एक छोटी बच्ची को पास बुलाकर उसकी पिटाई की जा रही है। इन दृश्यों ने पूरे जिले में आक्रोश और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
🏢 50 दिव्यांग बच्चों का आशियाना बना डर का केंद्र: डीएम ने गठित की जांच टीम
बताया जा रहा है कि इस आवासीय विद्यालय में करीब 50 दिव्यांग बच्चे रहते हैं, जिनमें कई किशोरियां भी शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम सुब्रत कुमार सेन ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस टीम में पूर्वी एसडीओ, सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक, मुसहरी बीडीओ और मिठनपुरा थानाध्यक्ष को शामिल किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
⚖️ स्कूल संचालक और कर्मचारी पर FIR: गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू
इस मामले में स्कूल संचालक संजय कुमार और आरोपी कर्मचारी राजू कुमार के खिलाफ मिठनपुरा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। स्कूल प्रबंधन ने आरोपी कर्मचारी को हटाने की बात कही है, लेकिन प्रशासन ने इसे पर्याप्त नहीं माना है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे संस्थान की कार्यप्रणाली की जांच होगी। सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी ने बताया कि वीडियो का सत्यापन कर एफआईआर दर्ज की गई है और आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
🗣️ प्रशासन का कड़ा रुख: दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि यह अत्यंत दुखद घटना है और जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई होगी। वायरल वीडियो के बाद अभिभावकों में भारी गुस्सा और डर है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब विशेष देखभाल वाले संस्थान ही बच्चों के लिए यातना केंद्र बन जाएं, तो जिम्मेदारी कौन लेगा? फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रहे हैं।