Wildlife Success Story: मध्य प्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी! बाघों के गढ़ में आबाद हुआ बारहसिंगा का कुनबा, 48 से बढ़कर 62 हुई संख्या
उमरिया : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व यूं तो बाघों के लिए अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन यहां कई और वन्य प्राणियों को भी संरक्षण मिल रहा है. 90 के दशक में जब यहां से बायसन विलुप्त हुए थे, तो उनके संरक्षण के प्रयास फिर से शुरू हुए, और अब बांधवगढ टाइगर रिजर्व में काफी संख्या में बायसन पाए जाते हैं. इसी तरह कभी बारहसिंगा भी बांधवगढ़ के घने जंगलों में दिखाई देते थे लेकिन पिछले कुछ दशकों में वे भी विलुप्त होते चले गए. ऐसे में अब बांधवगढ़ में बारहसिंगा के पुनर्वास के लिए प्रयास जारी हैं, जो सफल होता दिख रहा है.
कान्हा से बांधवगढ़ लाए जा रहे बारहसिंगा
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय बताते हैं, ” बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा को फिर से बसाने के प्रयास पुरजोर तरीके से चल रहे हैं. साल 2023 और 2024 में 2 साल के दौरान कुल 48 बारहसिंगा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लाए गए थे, जिसमें 26 मादा और 22 नर शामिल थे, उनके परिवार में पिछले कुछ सालों से लगातार इजाफा भी हो रहा है.”
क्षेत्र संचालक बताते हैं कि बांधवगढ़ में बारहसिंगा को फिर से बसाने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व से कुल 100 बारहसिंगा लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अभी तक 48 ही ले जाए गए हैं, बाकी के 52 बारहसिंगा लाने की प्रक्रिया जारी है, भविष्य में चरणबद्ध तरीके से बारहसिंगा की बाकी और संख्या भी लाई जाएगी.
बांधवगढ़ में इतना बढ़ा बारहसिंगा का कुनबा
क्षेत्र संचालक के मुताबिक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में साल 2023-24 के दौरान कान्हा से जो 48 बारहसिंगा लाए गए थे, उनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, अब इनकी संख्या 62 से अधिक हो गई है. ये सभी बारहसिंगा वर्तमान में सुरक्षित एनक्लोजर में रखे गए हैं, जहां उनकी लगातार निगरानी हो रही है. उनके भोजन और स्वास्थ्य की देखभाल भी की जा रही है.
बारहसिंगा के लिए ऐसा है एन्क्लोजर
बांधवगढ़ में कान्हा टाइगर रिजर्व से लाए गए इन बारहसिंगा को विशेष एंक्लोजर में रखा गया है. इसके लिए बांधवगढ़ के मगधी कोर जोन में 50 हेक्टेयर का विशेष बाड़ा बनाया गया था. यहां सुरक्षा की दृष्टि से इसके चारों ओर सोलर फेंसिंग भी लगाई गई है. इसमें चार तालाब और एक स्टॉप डैम भी बनाया गया है, जिसमें बारहसिंगा के लिए पर्याप्त भोजन और पानी की उचित व्यवस्था हो सके.
बाघों के गढ़ में बारहसिंगा का पुनर्जन्म
कुल मिलाकर एंक्लोजर ठीक वैसा ही तैयार किया गया है, जैसा कि बारहसिंगा को रहने के लिए अनुकूल वातावरण चाहिए और इसमें अब तक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व सफल रहा है. क्योंकि जितने भी बारहसिंगा अबतक लाए गए हैं, उनका कुनबा लगातार बढ़ रहा है. बारहसिंगा बांधवगढ़ में मस्त मौला अंदाज में रह रहे हैं, और जिस अंदाज में इनका कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है वह बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा के पुनर्वास के लिहाज से अच्छा संकेत है.
खुले जंगल में कब छोड़े जाएंगे बारहसिंगा?
क्षेत्र संचालक बताते हैं, ” बारहसिंगा को सीधे जंगल में छोड़ने के बजाय उन्हें छोड़ने के लिए चरणबद्ध योजना अपनाई जा रही है. इसमें पहले एंक्लोजर में एडॉप्शन अनुकूलन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है. फिर प्राकृतिक भोजन और व्यवहार का विकास, प्रिडेटर रिस्क का आंकलन और बारहसिंगा बाड़े के अलावा अनुकूल प्राकृतिक आवास तैयार किया जा रहा है. कुल मिलाकर देखा जाए तो जब संख्या और सर्वाइवल की स्थिति अनुकूल हो जाएगी, तब उन्हें चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा.”
बांधवगढ़ में बारहसिंगा क्यों जरूरी?
बारहसिंगा एक दुर्लभ प्रजाति है, जिसे संरक्षण की आवश्यकता है. ये मुख्यतः मध्य भारत के ग्रास लैंड ईकोसिस्टम और दलदली क्षेत्रों में पाए जाते हैं. जंगल के ईकोसिस्टम और फूडचेन में इनकी अहम भूमिका होती है. कान्हा टाइगर रिजर्व में इनका सफल संरक्षण हुआ है, जिससे इनकी संख्या में काफी इजाफा हुआ है. बांधवगढ़ में इनके पुनर्वास की परियोजना बांधवगढ़ की जैव विविधता बढ़ाने और घास भूमि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए बहुत आवश्यक मानी जा रही है.