ब्रेकिंग
Surat Textile News: देश का पहला विशेष टेक्सटाइल पुलिस स्टेशन सूरत में; कपड़ा व्यापारियों को धोखाधड़ी स... Gurugram Metro News: सोहना रोड के निवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी; 17 स्टेशन वाले नए मेट्रो कॉरिडोर का ... Ayodhya Ram Mandir Investigation: चढ़ावे में गड़बड़ी मामले की जांच तेज; अब डॉ. अनिल कुमार मिश्र से पूछत... Ayodhya Ram Mandir Gold Scam: राम मंदिर में सोना घोटाला? करोड़ों के दान पर सवाल, SIT की जांच तेज Noida International Airport: कार्गो सेवा की शानदार शुरुआत; दिल्ली एयरपोर्ट से 20 रुपये सस्ती माल ढुल... Abhishek Banerjee Arrest Warrant: TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें; मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने... IMD Weather Alert: अगले 4 दिनों तक होगी झमाझम बारिश; जानें बिहार, झारखंड और राजस्थान में कैसा रहेगा ... Defence Production: भारत के रक्षा उत्पादन ने छुई नई ऊंचाई; 1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा ... Regional Parties vs Congress: क्षेत्रीय दलों में टूट का किसे मिलेगा फायदा? भारतीय राजनीति में कांग्र... Political Shift in India: INDIA गठबंधन को बड़ा झटका; टीएमसी और शिवसेना (UBT) में टूट के बाद NDA हुआ औ...

एक रबर की ट्यूब बचा सकती थी युवराज की जान…’ 5 टीमें और 80 जवान भी रहे नाकाम, चश्मदीद ने खोल दी रेस्क्यू ऑपरेशन की पोल

नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं. जब युवराज जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था, उस वक्त पुलिस, फायर ब्रिगेड एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की करीब पांच टीमों सहित 80 से ज्यादा जवान वहां पर मौजूद थे. युवराज बार-बार कहता रहा- हेल्प मी, हेल्प मी. प्लीज मुझे बचा लो. फिर भी उसकी जान नहीं बच सकी. हैरानी की बात ये है कि 5 घंटे तक रेस्क्यू चला. मगर पुलिस के पास एक रबड़ की ट्यूब भी नहीं थीं. अगर रबर की ट्यूब होती तो शायद आसानी से युवराज तक पहुंचा जा सकता था और उसकी जान बचाई जा सकती थी. लेकिन सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज सिस्टम की भेट चढ़ गया.

घटना के चश्मदीद मुनेंद्र ने बताया- किसी भी टीम के पास पर्याप्त रस्सी भी नहीं थी, जिसे फेंककर युवराज को बचाया जा सकता था. वह गाड़ी पर बैठकर जोर-जोर से चिल्ला रहा था कि मुझे दलदल से बाहर निकालो. मैं डूब रहा हूं. सारा मंजर उसके पिता राजकुमार मेहता भी खड़े हुए देख रहे थे. जब तक फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे तब तक युवराज पूरी तरह से डूब चुका था उसकी सांसे बंद हो चुकी थीं.

न रस्सी, न ट्यूब और न नाव… कैसे बचती युवराज की जान?

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस के जवानों ने रस्सी फेंकने की तो कोशिश की लेकिन बिना ट्यूब और फ्लोटेशन स्पोर्ट के रस्सी युवराज तक नहीं पहुंच पाई. मौके पर भारी उपकरण क्रेन की मदद भी ली गई. लेकिन उससे भी कोई कामयाबी नहीं मिल पाई. एसडीआरएफ के पास कोई बोट या नाव भी नहीं थी, जिससे पानी में अंदर उतरकर युवराज के पास तक जाया जाता.

दो विभागों की लापरवाही में डूब गई युवराज की जिंदगी

इस घटना में नोएडा प्राधिकरण और सिंचाई विभाग की बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई. दरअसल, 2023 में प्राधिकरण ने दावा किया था कि नोएडा सेक्टर-150 में 4.5 करोड़ रुपए की लागत से सीवर लाइन को बिछाया गया, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली. सेक्टर-150 के आसपास जब सोसाइटी से निकलने वाले पानी की पड़ताल की तो पता चला कि है पानी नालों की बजाय इस गहरे गड्ढे में भर रहा है. प्राधिकरण ने सिंचाई विभाग को बिना जानकारी दिए वहां पर सीवर की लाइन बिछाने का काम कर दिया.

सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी थी कि वह सेक्टर-150 से निकलने वाली सीवर लाइन को हरनंदी या किसी अन्य ड्रोनेज सिस्टम से जोड़े. जांच पड़ताल में यह भी सामने आया यहां से निकलने वाला प्रतिदिन 28 लाख लीटर पानी सीवर से निकलकर सीधा इन खाली पड़े भूखंडों और ग्रीन बेल्टो में भरता है. यही कारण है की इस 70 फीट खोदे गए गड्ढे में ये पानी भर गया और 2 साल बाद एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की डूब कर मौत हो गई.

युवराज के पिता को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का मिला संदेश

इस घटना ने प्रदेश नहीं बल्कि देश-विदेश और लाचार सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब ऐसे में खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान लिया और उन्होंने एसआईटी की पांच सदस्य टीम का गठन किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के विधायक पंकज सिंह से फोन पर बात की है और पीड़ित पिता से जल्द मिलने के बाद कही है. हालांकि, अभी समय और दिन निर्धारित नहीं हुआ है. वहीं, मृतक के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि उन्हें किसी मुआवजे या मदद की जरूरत नहीं है. बस वह ये चाहते है कि जो भी इस लापरवाही के पीछे जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.