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Supreme Court on Bar Council: बार काउंसिल में महिलाओं के लिए 10% को-ऑप्शन; सुप्रीम कोर्ट ने दी निष्पक्ष प्रक्रिया को मंजूरी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए 10 प्रतिशत को-ऑप्शन (सह-चयन) सीटें भरने हेतु एक समान, पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया तैयार करने की अनुमति दे दी है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बीसीआई के सुझाव को निष्पक्ष मानते हुए इसे लागू करने का मार्ग प्रशस्त किया है।

📊 क्या है प्रतिनिधित्व का फार्मूला?

पीठ ने याद दिलाया कि उनके पूर्व निर्देशों के अनुसार, महिला वकीलों के लिए कुल 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना है। इसका गणित इस प्रकार तय किया गया है:

  • 20 प्रतिशत: चुनाव के माध्यम से।

  • 10 प्रतिशत: को-ऑप्शन (सह-चयन) के माध्यम से। कोर्ट ने बीसीआई की वकील राधिका गौतम को निर्देश दिया कि वे राज्य बार काउंसिल के नवनिर्वाचित सदस्यों और अन्य पक्षों से परामर्श करने के बाद इस 10 प्रतिशत कोटा को भरने के लिए एक एकसमान प्रक्रिया तैयार करें।

🌍 छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की चिंताओं पर सुनवाई

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे गोवा, दमन-दीव और पूर्वोत्तर राज्य) के वकीलों के कम प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बड़ी काउंसिल में इन छोटे राज्यों की आवाज़ अक्सर दब जाती है।

🤝 भविष्य की राह

चीफ जस्टिस ने इन चिंताओं को वास्तविक माना और बीसीआई को निर्देश दिया कि को-ऑप्शन प्रक्रिया को अंतिम रूप देते समय राज्य-विशेष के कारकों पर भी ध्यान दिया जाए। इसके लिए बीसीआई को संबंधित राज्य बार काउंसिलों से विचार-विमर्श करने की सलाह दी गई है। यह कदम देश भर में महिला वकीलों को मुख्यधारा में लाने और बार एसोसिएशनों को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।