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भाई की हार के बाद छलका मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का दर्द, भीतरघात को बताया हार की वजह

राजस्थान में विधानसभा की 7 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं, यहां भारतीय जनता पार्टी ने 5 सीटें, भारत आदिवासी पार्टी और कांग्रेस ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की है. दौसा विधानसभा सीट से बीजेपी ने कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा को मैदान में उतारा था,लेकिन उन्हें कांग्रेस के दीन दयाल बैरवा ने करीब 2300 वोटों से चुनाव हरा दिया है. भाई की हार के बाद किरोड़ी लाल मीणा का दर्द छलका है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर पोस्ट में दौसा सीट पर अपने भाई की हार के लिए भितरघातियों को दोषी ठहराया है.

राजस्थान के ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपने लोगों पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए लिखा, ’45 साल हो गए. राजनीति के सफर के दौरान सभी वर्गों के लिए संघर्ष किया. जनहित में सैंकड़ों आंदोलन किए, साहस से लड़ा. बदले में पुलिस के हाथों अनगिनत चोटें खाईं. आज भी बदरा घिरते हैं तो समूचा बदन कराह उठता है. मीसा से लेकर जनता की खातिर दर्जनों बार जेल की सलाखों के पीछे रहा.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘संघर्ष की इसी मजबूत नींव और सशक्त धरातल के बूते दौसा का उपचुनाव लड़ा. जनता के आगे संघर्ष की दास्तां रखी. घर-घर जाकर वोटों की भीख भी मांगी. फिर भी कुछ लोगों का दिल नहीं पसीजा. भितरघाती मेरे सीने में वाणों की वर्षा कर देते तो मैं दर्द को सीने में दबा सारी बातों को दफन कर देता. लेकिन उन्होंने मेघनाथ बनकर मेरे लक्ष्मण जैसे भाई पर शक्ति का बाण चला डाला. साढ़े चार दशक के संघर्ष से न तो हताश हूं और न ही निराश. पराजय ने मुझे सबक अवश्य सिखाया है लेकिन विचलित नहीं हूं.’

गैरों में कहां दम था, मुझे तो अपनों ने ही मारा – मंत्री

किरोड़ी लाल मीणा ने लिखा, ‘आगे भी संघर्ष के इसी पथ पर बढते रहने के लिए कृतसंकल्पित हूं. गरीब, मजदूर, किसान और हरेक दुखिया की सेवा के व्रत को कभी नहीं छोड़ सकता. परंतु ह्रदय में एक पीड़ा अवश्य है. यह बहुत गहरी भी है और पल-प्रति-पल सताने वाली भी. जिस भाई ने परछाईं बनकर जीवन भर मेरा साथ दिया, मेरी हर पीड़ा का शमन किया, उऋण होने का मौका आया तो कुछ जयचंदों के कारण मैं उसके ऋण को चुका नहीं पाया. मुझमें बस एक ही कमी है कि मैं चाटुकारिता नहीं करता और इसी प्रवृत्ति के चलते मैंने राजनीतिक जीवन में बहुत नुकसान उठाया है. स्वाभिमानी हूं. जनता की खातिर जान की बाजी लगा सकता हूं. गैरों में कहां दम था, मुझे तो सदा ही अपनों ने ही मारा है.

लोकसभा के बाद उपचुनाव में फिर झटका

किरोड़ी लाल मीणा पूर्वी राजस्थान के भाजपा के कद्दावर नेता हैं. लोकसभा चुनावों में भी पूर्वी राजस्थान में भाजपा को शिकस्त मिली थी. अब एक बार फिर दौसा विधानसभा के उपचुनाव में किरोड़ी लाल मीणा के जगमोहन मीना को शिकस्त मिली है, जो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था. राजनीतिक पंडित इसे किरोड़ी लाल मीणा की हार मान रहे हैं, दौसा की हार का असर साफ तौर पर सवाईमाधोपुर विधानसभा में देखने को मिला है.

दोबारा काउंटिंग के बाद भी कांग्रेस की जीत

दौसा सीट पर कांग्रेस के दीन दयाल 2300 वोटों से जीत गए. कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार को कुल 75,536 वोट मिले. दूसरे नंबर पर बीजेपी के जगमोहन मीणा रहे जिन्हें 73,236 वोट मिले. 1369 वोटों के साथ विपरा गोयल तीसरे नंबर पर रहे. बता दें कि दौसा सीट पर बीजेपी ने दोबारा काउंटिंग की मांग की थी. दोबारा काउंटिंग के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार को ही विजेता घोषित किया गया.