Hisar Hansi Grappling Gold Medalist Khushi Controversy: हिसार की गोल्ड मेडलिस्ट खुशी के स्वागत विवाद पर सरपंच प्रतिनिधि ने दी सफाई, वायरल वीडियो की सच्चाई आई सामने
हिसार/हांसी: हिसार जिले के हांसी अंतर्गत आने वाले राजथल गांव की होनहार बेटी और गोल्ड मेडलिस्ट खुशी के स्वागत को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर ग्रेपलिंग रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली खुशी के माता-पिता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद कुछ पोस्ट्स के जरिए यह दावा किया जाने लगा कि गांव में इस प्रतिभावान बेटी का कोई स्वागत नहीं किया गया है। इन तमाम दावों और वायरल हो रही खबरों पर संज्ञान लेते हुए अब गांव के सरपंच प्रतिनिधि अनिल गोदारा ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है और वीडियो को पूरी तरह से गलत संदर्भ में प्रसारित किए जाने की बात कही है।
हरिद्वार में आयोजित ग्रेपलिंग रेसलिंग चैंपियनशिप में खुशी ने जीता था स्वर्ण पदक, माता-पिता का वीडियो हुआ था सोशल मीडिया पर वायरल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रतिभाशाली खिलाड़ी खुशी ने गत 24 से 26 अक्टूबर तक उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित ग्रेपलिंग रेसलिंग चैंपियनशिप के अंडर-17 आयु वर्ग और 52 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। उनकी इस बड़ी उपलब्धि से पूरे परिवार और ग्रामीण इलाके में उत्सव का माहौल था। इसी बीच, माता-पिता का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सामने आया, जिसे कुछ लोगों ने गांव की ओर से स्वागत न किए जाने की बात से जोड़कर सनसनीखेज रूप से पेश करना शुरू कर दिया।
सरपंच प्रतिनिधि अनिल गोदारा ने दी सफाई, कहा— ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ हुआ था गांव में भव्य स्वागत
वायरल हो रहे इस वीडियो पर अपनी सफाई देते हुए सरपंच प्रतिनिधि अनिल गोदारा ने स्पष्ट किया कि, “खुशी का गांव में पहुंचने पर भव्य तरीके से ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया गया था। सोशल मीडिया पर उसके माता-पिता के इस वीडियो को बिल्कुल गलत और तोड़-मरोड़कर दिखाया जा रहा है। असल में परिवार बेटी को पूजा-अर्चना के लिए एक स्थान पर लेकर गया था और वायरल वीडियो उसी दौरान का है।” उन्होंने सोशल मीडिया संचालकों से कड़े शब्दों में अपील की है कि किसी भी वीडियो या खबर को बिना पूरी सत्यता और जानकारी के सोशल मीडिया पर वायरल न किया जाए। गांव की इस बेटी ने स्वर्ण पदक जीतकर पूरे क्षेत्र का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है, इसलिए उसकी इस शानदार उपलब्धि को पूरा सम्मान मिलना चाहिए।
पिछले छह वर्षों से कर रही है कुश्ती का कड़ा अभ्यास, फिल्म ‘दंगल’ से प्रेरित होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने का है सपना
युवा खिलाड़ी खुशी पिछले छह लंबे वर्षों से कुश्ती का कड़ा प्रशिक्षण ले रही हैं। वह वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध ‘चंद्र अखाड़े’ में नियमित रूप से अभ्यास करती हैं और अपने खेल के साथ-साथ अपनी शैक्षणिक पढ़ाई भी पूरी लगन से जारी रखे हुए हैं। मशहूर बॉलीवुड फिल्म ‘दंगल’ से प्रेरणा पाकर कुश्ती के मैदान में कदम रखने वाली खुशी का अब मुख्य सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतकर तिरंगा लहराना है। स्वर्ण पदक जीतने के बाद गांव लौटने पर उनका पारंपरिक तरीके से सम्मान भी किया गया था। इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि अनिल गोदारा, सतरोल खाप के पूर्व उपप्रधान राजकुमार शर्मा समेत क्षेत्र के कई गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे। परिवार के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के एक स्थानीय नेता ने भी खुशी को 11 हजार रुपये का नकद चेक प्रदान कर सम्मानित किया था।
भ्रामक प्रचार करने वाले सोशल मीडिया संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग, परिवार और ग्रामीणों ने की अपील
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों की ओर से नारनौंद थाने में एक औपचारिक शिकायत देकर 20 से अधिक ऐसे सोशल मीडिया संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग किए जाने की बात कही गई है, जिन्होंने भ्रामक वीडियो फैलाया था। वहीं, खिलाड़ी खुशी और उनके पिता सुनील कुमार ने भी खुद आगे आकर इस वायरल वीडियो को लेकर अपना वास्तविक पक्ष रखा है। उन्होंने तमाम सोशल मीडिया यूजर्स से इस तरह की भ्रामक और नकारात्मक प्रचार सामग्री को तुरंत हटाने की अपील की है। परिवार और गांव के तमाम प्रतिनिधियों का एक ही स्वर में कहना है कि इस तरह के बेसिर-पैर के दावों के बजाय देश और समाज का नाम रोशन करने वाली खुशी की खेल की असाधारण उपलब्धि को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।