हरियाणा में निजी कंपनी को बिजली वितरण लाइसेंस देने का मामला दिल्ली पहुंचा, ट्रिब्यूनल में कैविएट दाखिल
चंडीगढ़: हरियाणा के औद्योगिक शहर गुरुग्राम और नूंह जिलों में एक निजी कंपनी ‘इलेवन पावर’ को 25 वर्षों की लंबी अवधि के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने का बहुचर्चित मामला अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक जा पहुंचा है। उल्लेखनीय है कि हरियाणा बिजली नियामक आयोग द्वारा गत 19 अक्तूबर को इस निजी कंपनी को समानांतर (पैरेलल) बिजली वितरण का लाइसेंस जारी किया गया था, लेकिन भारी विरोध के बाद 28 अक्तूबर को इस फैसले पर रोक लगा दी गई थी। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कानूनी सरगर्मी तेज हो गई है।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम और पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी में दायर की अलग-अलग कैविएट
इस प्रशासनिक और व्यावसायिक फैसले को लेकर दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) तथा ‘ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन’ ने नई दिल्ली स्थित अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) में अलग-अलग कैविएट दाखिल कर दी हैं। इन निगमों और संगठनों को इस बात की प्रबल आशंका थी कि निजी कंपनी इलेवन पावर, आयोग द्वारा 28 अक्तूबर को लगाई गई रोक के आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर सकती है। इसके अलावा, हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक संपत सिंह ने भी आयोग के 19 अक्तूबर वाले मूल लाइसेंस आदेश को आधिकारिक रूप से चुनौती दी है।
19 अक्तूबर को जारी हुआ था 25 साल का लाइसेंस, भारी विरोध और विवाद के बाद 28 अक्तूबर को लगाई गई थी रोक
प्राप्त विवरण के अनुसार, हरियाणा बिजली नियामक आयोग ने निजी क्षेत्र की कंपनी ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को गुरुग्राम और नूंह के इलाकों में अगले 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण का अधिकार देने का निर्णय लिया था। इसका सीधा मतलब यह था कि कंपनी को पहले से मौजूद सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था के साथ ही अपने स्तर पर बिजली वितरण करने की अनुमति मिल जाती। हालांकि, इस निर्णय के सामने आते ही विरोध के सुर उठने लगे, जिसके चलते आयोग ने 28 अक्तूबर को अपने ही पिछले आदेश पर रोक लगाने का बड़ा कदम उठाया और इसके बाद से मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
निगम की मांग— कंपनी की अपील पर कोई भी एकतरफा फैसला सुनाने से पहले ट्रिब्यूनल सुने उनका पक्ष
निजी कंपनी द्वारा 28 अक्तूबर के स्थगन आदेश को अदालत या ट्रिब्यूनल में चुनौती दिए जाने की संभावना को देखते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने कानूनी सुरक्षा के तहत कैविएट दाखिल की है। निगम की ओर से आग्रह किया गया है कि यदि संबंधित निजी कंपनी इस आदेश के खिलाफ कोई भी याचिका या अपील दायर करती है, तो ट्रिब्यूनल बिना उनका पक्ष सुने किसी भी प्रकार का एकतरफा आदेश पारित न करे। इस मामले में अब आगे की कानूनी लड़ाइयों और बहसों के दौरान कई नए खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।