GST New Rules 2026: केंद्र सरकार ने जीएसटी नियमों में किए बड़े बदलाव, रिफंड प्रक्रिया तेज और ट्रैक्टर टायर हुए सस्ते
चंडीगढ़: देश की कर प्रणाली को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के नियमों में बड़े पैमाने पर संशोधनों को अधिसूचित किया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से कारोबारियों को जीएसटी रिफंड पाने की प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी का सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपने उत्पादों का व्यापार करने वाले पात्र छोटे विक्रेताओं के लिए नया पंजीकरण कराना काफी सुगम हो जाएगा। इसके अलावा, कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायरों पर कर की दरों में कटौती की गई है, जबकि दूसरी ओर कबाड़ और विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों के व्यापार में टैक्स अनुपालन को और अधिक सख्त बना दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जीएसटी परिषद की सिफारिशों के आधार पर तैयार किए गए ये सभी बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे हैं, जिनमें से कई महत्वपूर्ण प्रावधान आगामी 1 नवंबर 2026 से प्रभावी हो चुके हैं।
रिफंड प्रक्रिया में लाई गई तेजी, पावती जारी करने की समय-सीमा घटाकर की गई 10 दिन
संशोधित नियमों के अनुसार, जीएसटी रिफंड के लिए दिए जाने वाले आवेदन पर पावती (acknowledgement) जारी करने की समय-सीमा को 15 दिन से घटाकर अब 10 दिन कर दिया गया है। संबंधित कर अधिकारियों को इसी तय अवधि के भीतर आवेदन पत्र में मौजूद कमियों की जानकारी भी आवेदक को देनी होगी। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर न तो कोई पावती जारी की जाती है और न ही किसी प्रकार की कमी से अवगत कराया जाता है, तो उस आवेदन को स्वतः स्वीकृत पावती वाला मान लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पावती जारी होने के तीन कार्य दिवसों के भीतर जीएसटी पोर्टल के माध्यम से जोखिम-आधारित प्रणाली के तहत अनंतिम रिफंड स्वीकृति आदेश जारी करने का प्रावधान किया गया है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि रिफंड की पूरी राशि महज तीन दिन के भीतर सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा हुआ विस्तृत, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत मिलेगी राहत
सरकार की ओर से इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के अंतर्गत रिफंड की गणना के दायरे को भी बढ़ा दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत तैयार उत्पाद पर देय कर की तुलना में कच्चे माल या इनपुट पर अधिक जीएसटी चुकाना पड़ता है। अब 1 नवंबर 2026 या उसके बाद से पात्र इनपुट सेवाओं पर प्राप्त होने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को भी संशोधित गणना के दायरे में शामिल किया जाएगा। वहीं, पात्र पूंजीगत वस्तुओं पर मिलने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट को रिफंड गणना में शामिल करने से जुड़े नियम निर्धारित शर्तों के तहत 1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह लागू किए जाएंगे।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए व्यापार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए विशेष पंजीकरण व्यवस्था
ऑनलाइन मार्केटप्लेस या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सामान बेचने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के वास्ते सरकार ने एक विशेष पंजीकरण प्रणाली की शुरुआत की है। नए नियम 14बी के अंतर्गत ऐसे विक्रेता ई-कॉमर्स ऑपरेटर के गोदाम या वेयरहाउस को अपना मुख्य व्यावसायिक ठिकाना घोषित करके उन राज्यों में भी आसानी से जीएसटी पंजीकरण प्राप्त कर सकेंगे, जहां उनका अपना कोई भौतिक कारोबारी कार्यालय या दुकान मौजूद नहीं है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए संबंधित ई-कॉमर्स ऑपरेटर की सहमति होना अनिवार्य है। साथ ही, इस प्रकार की आपूर्ति पर मासिक आउटपुट टैक्स की देनदारी 2.5 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। ई-कॉमर्स ऑपरेटर को सात कार्य दिवसों के भीतर अपनी सहमति या असहमति की सूचना देनी होगी, और इस प्रक्रिया में आधार प्रमाणीकरण, दस्तावेजों की जांच व भौतिक सत्यापन के नियम भी लागू रहेंगे।
रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायर पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत किया गया, बायोस्टिमुलेंट्स और इसबगोल को भी राहत
कर की दरों में किए गए संशोधनों के तहत रीट्रेडेड ट्रैक्टर टायरों पर लगने वाले जीएसटी को 18 प्रतिशत से भारी कटौती करते हुए सीधे 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बड़े फैसले से कृषि क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों और देश के अन्नदाता किसानों को काफी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, पहले से पैक और लेबल किए गए पशु, वनस्पति एवं जैविक उर्वरक 5 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में ही बने रहेंगे। पंजीकृत समुद्री शैवाल अर्क (सीवीweed एक्सट्रैक्ट) आधारित बायोस्टिमुलेंट्स को भी संबंधित कर प्रविष्टि में स्पष्ट रूप से स्थान दिया गया है। इसके अलावा, औषधीय महत्व रखने वाले इसबगोल (साइलियम बीज) को पूरी तरह से जीएसटी मुक्त सूची में जोड़ दिया गया है।
कबाड़ और अपशिष्ट पदार्थों के कारोबार में बढ़ाई गई जवाबदेही, रिवर्स चार्ज का दायरा विस्तृत
कर चोरी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के अंतर्गत कर भुगतान की जिम्मेदारी के दायरे को काफी बढ़ा दिया है। अब अपंजीकृत विक्रेताओं की ओर से पंजीकृत कारोबारियों को इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल, प्लास्टिक कचरे, टायर स्क्रैप तथा विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ की आपूर्ति किए जाने पर निर्धारित शर्तों के तहत रिवर्स चार्ज लागू होगा। इस नई व्यवस्था के तहत जीएसटी जमा कराने की मुख्य जिम्मेदारी अपंजीकृत विक्रेता की बजाय सीधे पंजीकृत खरीदार की होगी। इसके अलावा, धातु के कबाड़ सहित कुछ विशिष्ट लेन-देन में पंजीकरण से मिलने वाली छूट और स्रोत पर कर कटौती (TCS) से जुड़े नियमों में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं।
अलग-अलग चरणों में धरातल पर उतरेंगे नए प्रावधान, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी के इन नए प्रावधानों को अलग-अलग तिथियों से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। अधिकांश प्रमुख बदलाव 1 नवंबर 2026 से प्रभावी हो चुके हैं, जबकि पंजीकरण और रिफंड के दस्तावेजों से जुड़े कुछ संशोधन 1 दिसंबर 2026 से लागू होंगे। अपंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से संबंधित रिवर्स चार्ज लेन-देन तथा सेवाओं के आयात के लिए अधिसूचित ई-इनवॉइसिंग श्रेणियों का दायरा 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। वहीं, पूंजीगत वस्तुओं के इनपुट टैक्स क्रेडिट और पंजीकरण रद्द करने से जुड़ी कुछ प्रक्रियाएं 1 अप्रैल 2027 से लागू की जाएंगी। समग्र रूप से देखा जाए तो जीएसटी नियमों में किए गए ये दूरगामी संशोधन व्यापारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाने और कर प्रणाली में जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।