ब्रेकिंग
Raipur Missing Persons Case: रायपुर पुलिस की बड़ी सफलता, सेंट्रल जोन में अभियान चलाकर 50 में से 39 ग... राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर विशेष, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का छत्तीसगढ़ से रहा है गहरा ऐतिह... Chhattisgarh School Bag Weight Limit: छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों के भारी बस्तों पर बाल संरक्षण आयोग... Balrampur Checkdam Corruption Action: बलरामपुर में चेकडैम निर्माण में धांधली पर कलेक्टर चंदन त्रिपाठ... Bastar Cyclone Damage Report: बस्तर में 'अर्नब' चक्रवाती तूफान का कहर, दो दिनों की भारी बारिश और तेज... Balrampur News Update: हाई स्कूल मैदान में 2 नवंबर को होगा भव्य आयोजन, सांसद चिंतामणि महाराज करेंगे ... Indore Unique Petrol Pump Owner: इंदौर के इस पेट्रोल पंप पर पिछले 20 सालों से गूंज रहा है रामचरितमान... Bhopal Ijtema 2026 Preparations: ईंटखेड़ी में 4 से 7 दिसंबर तक होने वाले इज्तिमा की तैयारियां तेज, क... Shahdol Drone Didi Success Story: शहडोल की किसान महिलाओं ने बदली खेती की तस्वीर, ड्रोन उड़ाकर और मशी... Faggan Singh Kulaste Statement: फग्गन सिंह कुलस्ते का दिग्विजय सिंह पर तंज, बोले— 'विकास की बात मत क...

Dungarpur News: पेसमेकर लगे बीमार पीटीआई की चुनाव ड्यूटी लगाने पर प्रशासन की संवेदनहीनता, ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत; अस्पताल में भर्ती

डूंगरपुर: राजस्थान के डूंगरपुर जिले के प्रशासनिक अमले की एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाली कार्यशैली का मामला प्रकाश में आया है। गंभीर हृदय की बीमारी से पीड़ित और शरीर में पेसमेकर लगवा चुके एक शारीरिक शिक्षक (PTI) द्वारा तमाम चिकित्सा दस्तावेजों के साथ चुनाव कार्य से छूट के लिए आवेदन दिए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने उनकी ड्यूटी निरस्त नहीं की। इसका नतीजा यह हुआ कि चुंडावाड़ा क्षेत्र में चुनाव ड्यूटी के दौरान अत्यधिक शारीरिक दबाव और बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण उक्त शिक्षक की अचानक तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई, जिन्हें आपातकालीन हालात में डूंगरपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

मार्च 2025 में हुआ था बड़ा ऑपरेशन, डॉक्टरों ने दी थी सख्त हिदायत

प्राप्त विवरण के अनुसार, बिछीवाड़ा पंचायत समिति के चुंडावाड़ा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे शारीरिक शिक्षक सोमेश्वर लंबे समय से दिल की गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। मार्च 2025 के दौरान उदयपुर के सुप्रसिद्ध गीतांजलि अस्पताल में उनके हृदय का एक बड़ा और जटिल ऑपरेशन किया गया था, जिसके तहत उनके शरीर में पेसमेकर प्रत्याशित किया गया था। चिकित्सकों द्वारा उन्हें स्पष्ट रूप से यह सलाह दी गई थी कि वे किसी भी प्रकार के अत्यधिक शारीरिक व मानसिक तनाव से दूर रहें, लगातार काम करने के बजाय हर दो घंटे पर पर्याप्त विश्राम करें और अपने खान-पान में विशेष सावधानी बरतें।

एडीएम प्रकाश रैगर पर गंभीर आरोप: ‘जब स्कूल जा सकते हैं तो चुनाव ड्यूटी क्यों नहीं?’

पीड़ित शिक्षक सोमेश्वर ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) प्रकाश रैगर पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षक ने अपनी लाइलाज बीमारी से जुड़ी सभी मेडिकल रिपोर्ट्स, अस्पताल के प्रमाण पत्र और पेसमेकर से जुड़े दस्तावेज एडीएम के समक्ष पेश करते हुए चुनाव कार्य से मुक्त करने की गुहार लगाई थी। आरोप है कि एडीएम प्रकाश रैगर ने शिक्षक की बीमारी की वास्तविकता को पूरी तरह दरकिनार करते हुए बेहद संवेदनहीन लहजे में कहा कि ‘जब आप इस शारीरिक स्थिति में स्कूल जाकर पढ़ा सकते हैं, तो चुनाव ड्यूटी क्यों नहीं कर सकते?’ इसके बाद उनका आवेदन पत्र खारिज कर दिया गया, जिससे विवश होकर शिक्षक को ड्यूटी पर जाना पड़ा।

ड्यूटी के दौरान हालत बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों ने की मदद, जिला अस्पताल रेफर

चुंडावाड़ा में चुनावी दायित्वों का निर्वहन करने के दौरान शिक्षक सोमेश्वर की सेहत तेजी से बिगड़ने लगी। अत्यधिक तनाव और स्वास्थ्य की उपेक्षा के चलते उन्हें गंभीर घबराहट, चक्कर आने, पेट में तकलीफ और भारी पसीने की शिकायत हुई, जिससे उनकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। मौके पर मौजूद सतर्क पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उनके जूते-मोजे उतारे और उनके पैरों की मालिश कर राहत देने का प्रयास किया। इसके पश्चात 108 एम्बुलेंस की मदद से उन्हें बिछीवाड़ा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार और ब्लड प्रेशर की जांच के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को भांपते हुए उन्हें फौरन डूंगरपुर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

कर्मचारी और शिक्षक संगठनों में जबरदस्त आक्रोश, प्रशासनिक रवैये पर उठ रहे हैं सवाल

इस अमानवीय और लापरवाह घटना के सामने आने के बाद डूंगरपुर जिले के तमाम शिक्षक संगठनों, कर्मचारी यूनियनों और आम नागरिकों के बीच भारी रोष व्याप्त है। एक गंभीर हृदय रोगी और पेसमेकर लगे कार्मिक की जीवन से जुड़ी गुहार को नजरअंदाज करने तथा आवेदन खारिज करने को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं।