Shastra Puja Muhurat 2026: विजयादशमी पर कब है शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त? जानिए सही समय, महत्व और रावण दहन का समय
विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व हिंदू धर्म में बहुत खास और पावन माना जाता है. यह त्योहार हर साल आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया था, वहीं मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत करके संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी. इसी वजह से दशहरे को विजय, साहस और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में कई परंपराएं निभाई जाती हैं, जैसे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाना या देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करना. इसी दिन शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व होता है, जिसमें हथियारों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करके शक्ति, सुरक्षा और सफलता की कामना की जाती है.
⏰ साल 2026 में शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय
साल 2026 में विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. इस दिन शस्त्र पूजा करने वाले लोगों के लिए विजय मुहूर्त को सबसे खास माना गया है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजय मुहूर्त में किए गए शुभ कार्य सफलता प्रदान करते हैं. पंचांग के अनुसार, शस्त्र पूजा का शुभ समय दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि लगभग 45 मिनट है. इसके अलावा, विजयादशमी के मौके पर होने वाले रावण दहन के लिए प्रदोष काल का विशेष महत्व रहेगा, और पंचांग के अनुसार शाम 5:47 बजे के बाद रावण दहन किया जा सकता है, हालांकि स्थानीय सूर्यास्त के समय के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है.
⚔️ शस्त्र पूजा की परंपरा और ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
शस्त्र पूजा की परंपरा का सीधा संबंध शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा से है. प्राचीन काल में राजा और योद्धा युद्ध में जाने से पहले अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते थे, क्योंकि वे मानते थे कि शस्त्र केवल युद्ध का साधन नहीं बल्कि अन्याय से मुकाबला करने की शक्ति का प्रतीक हैं. आज भी सेना, पुलिस और सुरक्षा से जुड़े लोग इस परंपरा को निभाते हैं, जबकि आम लोग अपने व्यवसाय में काम आने वाले औजारों, मशीनों और वाहनों की पूजा कर अपनी आजीविका के प्रति सम्मान जताते हैं. पूजा करते समय सबसे पहले स्थान को स्वच्छ कर लें, शस्त्रों को साफ करके व्यवस्थित रखें और रोली, अक्षत, फूल, दीपक व धूप से पूजा कर अपने इष्ट देव का स्मरण करते हुए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.