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Supreme Court Verdict: तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट का झटका, धर्म बदलकर मुसलमान बने लोग BC(M) आरक्षण के हकदार नहीं

तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका मिला है। सर्वोच्च अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बने लोग राज्य में बीसी-मुस्लिम (BC-M) आरक्षण का लाभ प्राप्त नहीं कर सकते हैं। दरअसल, तमिलनाडु में पिछड़े वर्गों की श्रेणी के अंतर्गत विशेष रूप से BC-मुसलमानों के लिए 3.5% का एक अलग उप-कोटा निर्धारित किया गया है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस चन्द्रशेखर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें यह अनुमति दी गई थी।

इससे पहले तमिलनाडु सरकार ने 9 मार्च 2024 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत पिछड़े वर्ग (BC), अति पिछड़े वर्ग (MBC), विमुक्त समुदाय (DNC) और अनुसूचित जाति (SC) से इस्लाम अपनाने वाले व्यक्तियों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी के अंतर्गत जाति प्रमाण पत्र और आरक्षण का लाभ देने की अनुमति दी गई थी।

🔍 जस्टिस मिश्रा ने सुनाई फैसले की मुख्य बातें और कानूनी पहलू

फैसले का मुख्य हिस्सा पढ़ते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि किसी भी समुदाय को आरक्षण का लाभ देने के लिए उसे ‘पिछड़ा’ घोषित करने से पहले कानूनी तौर पर सामाजिक जाँच और डेटा की पुख्ता गणना की जानी चाहिए। राज्य सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

  • मद्रास हाईकोर्ट का फैसला: हाईकोर्ट ने समीर अहमद की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिन्होंने साल 2015 में हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लिया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 9 मार्च 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया था कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े समुदायों के लोग केवल इस्लाम अपनाने की वजह से आरक्षण से वंचित न रहें।

  • अदालत की टिप्पणियाँ: हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलकर मुस्लिम बनता है, तो वह अपनी पिछली जाति के आधार पर मुस्लिम पिछड़े वर्ग (BC-M) का दावा नहीं कर सकता। धर्म परिवर्तन के बाद उसकी पुरानी जाति का कोई कानूनी व सामाजिक आधार नहीं रह जाता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि इस्लाम में सभी इंसान बराबर हैं और इसके मूल सिद्धांतों में सामाजिक स्तर पर किसी भी प्रकार की ऊंच-नीच या जातियों का भेद नहीं होता है।