Karnal Grain Market Inspection: देर रात करनाल मंडी पहुंचे कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, धान खरीद और पराली पर बड़ा बयान
हरियाणा में धान की सरकारी खरीद शुरू होते ही प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा एक्शन मोड में नजर आए। कृषि मंत्री ने देर रात करनाल की अनाज मंडी का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसान भाइयों, आढ़तियों और राइस मिलर्स को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
कृषि मंत्री ने बताया कि मंडियों में व्यवस्थाएं सुचारू रखने के लिए पूरे खरीद सीजन के दौरान प्रदेश भर की अनाज मंडियों में इसी तरह लगातार औचक दौरे किए जाएंगे।
🚪 फर्जीवाड़े पर नकेल: मंडी गेट पर ही कटेगा गेट पास, घर बैठे नहीं खुलेगा पोर्टल
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई सख्त व्यवस्था:
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जियो फेंसिंग व्यवस्था लागू: पिछले वर्ष करनाल अनाज मंडी में धान खरीद के दौरान सामने आई अनियमितताओं को रोकने के लिए सरकार ने मंडियों में कड़े कदम उठाए हैं। गेहूं खरीद की तर्ज पर अब धान खरीद के लिए भी मंडियों को जियो फेंसिंग (Geo-fencing) तकनीक से जोड़ दिया गया है।
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गेट पर ही एंट्री: कृषि मंत्री ने साफ किया कि किसान जब अपनी फसल लेकर भौतिक रूप से मंडी पहुंचेगा, तभी मुख्य गेट पर उसका गेट पास कटेगा।
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पोर्टल पर रोक: घर बैठे किसी भी किसान या बिचौलिए का गेट पास नहीं काटा जा सकेगा। मंडी गेट पर सत्यापन होने के बाद ही संबंधित किसान का पोर्टल खुलेगा।
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केंद्र के निर्देश पर शुरुआत: उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से अनुमति पत्र मिलते ही राज्य में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद विधिवत शुरू कर दी गई है।
🚜 पराली जलाने का लक्ष्य ‘जीरो’: प्रबंधन करने वाले किसानों को ₹1200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन
पर्यावरण संरक्षण और पराली प्रबंधन पर सरकार का फोकस:
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जीरो बर्निंग का लक्ष्य: कृषि मंत्री ने किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा कि फसल कटाई के बाद खेतों में पराली बिल्कुल न जलाएं। सरकार का इस बार पराली जलाने की घटनाओं को शून्य (Zero) पर लाने का लक्ष्य है।
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प्रति एकड़ आर्थिक मदद: पराली का उचित इन-सीटू या एक्स-सीटू प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार की ओर से ₹1,200 प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
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सब्सिडी पर मशीनरी: पराली प्रबंधन को आसान बनाने के लिए सरकार द्वारा अब तक किसानों और कस्टम हायरिंग सेंटर्स को लगभग 5,154 आधुनिक कृषि यंत्र सब्सिडी पर उपलब्ध कराए गए हैं।
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अवशेषों से दोहरा लाभ: उन्होंने कहा कि किसान पराली की बेलिंग (गांठें) बनाकर सीधे बायोमास प्लांटों व मिलों को बेच सकते हैं या अवशेषों को खेत की मिट्टी में मिलाकर जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकते हैं।
🌧️ बारिश से हुए नुकसान पर संवेदना: मंडियों में किसानों के लिए खाने-पीने के पुख्ता इंतजाम
मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति:
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बारिश और कटाई पर असर: हाल ही में हुई बेमौसम बारिश पर बोलते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदा किसी के वश में नहीं होती। इस बारिश से धान की पकी फसल को नुकसान हुआ है और कटाई कार्य में दो-चार दिन का विलंब अवश्य होगा।
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मंडी में सभी सुविधाएं दुरुस्त: उन्होंने आश्वस्त किया कि अनाज मंडियों में अपनी उपज लेकर आने वाले किसानों के लिए स्वच्छ पेयजल, छायादार बैठने की जगह और रियायती भोजन (अटल कैंटीन) के व्यापक प्रबंध किए गए हैं, ताकि उन्हें किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।