ब्रेकिंग
चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: ऑनलाइन फॉर्म 6 से हटाई गई पूर्वजों से संबंधित अतिरिक्त घोषणा अक्टूबर आते ही दमघोंटू होने लगती है हवा: पॉल्यूशन बढ़ने से पहले ही दिल्ली-NCR में सिस्टम हुआ एक्टिव रबी सीजन 2027-28 के लिए 6 फसलों की MSP में बढ़ोतरी: किसानों को लागत पर मिलेगा 50% से 106% तक मुनाफा Gujarat Politics: पूर्व CM शंकर सिंह वाघेला की फिर होगी कांग्रेस में वापसी? नई पार्टी का ऐलान टाला; ... Jhalawar News: मां नेत्रहीन और पिता मूकबधिर, खेत से लापता 7 वर्षीय इकलौते बेटे का कुएं में मिला शव; ... Maharashtra Cannabis Bust: सोलापुर में गन्ने के खेत से ₹1.05 करोड़ का गांजा जब्त, 12 फीट ऊंचे 240 पौ... Bihar Flood Alert: नेपाल में बारिश से गंगा-गंडक उफान पर, सारण में तटबंध टूटने से दर्जनों गांव डूबे, ... Bareilly Cyber Crime News: बरेली में साइबर ठगों का बड़ा जाल, छह वारदातों में उड़ाए लाखों; टेलीग्राम ... UP Politics: 'नौकरी छोड़ ई-रिक्शा चलाओ' वाले बयान पर घिरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, बचाव में उतरे ओपी... अखिलेश यादव संग दिखे योगी के मंत्री राकेश सचान: राज्यसभा चुनाव के बीच तस्वीर ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: ऑनलाइन फॉर्म 6 से हटाई गई पूर्वजों से संबंधित अतिरिक्त घोषणा

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए वोटर कार्ड आवेदन हेतु प्रयुक्त होने वाले ऑनलाइन Form 6 से अतिरिक्त विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) संबंधित घोषणा (Declaration) को हटा लिया है, जहां यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

यह कदम आयोग के दो चुनाव आयुक्तों द्वारा Form 6 में बिना विधायी संशोधन के नए प्रावधान जोड़े जाने पर दर्ज कराई गई कड़ी आपत्ति के बाद उठाया गया है।

इस निर्णय के प्रभावी होने के बाद अब आम नागरिकों को नया वोटर पहचान पत्र (Voter ID Card) बनवाने के लिए अपने माता-पिता, दादा-दादी या पूर्वजों से जुड़े जटिल दस्तावेज और अतिरिक्त ब्योरा जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

⚖️ चुनाव आयुक्तों ने बदलाव पर जताई थी आपत्ति: नियमों में संशोधन के बिना लागू करने को बताया था गलत

आयोग की आंतरिक बैठक और आयुक्तों के रुख का ब्योरा:

  • दो आयुक्तों का कड़ा ऐतराज: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में से दो चुनाव आयुक्तों ने Form 6 में इस अतिरिक्त शर्त को जोड़े जाने का विरोध किया था।

  • नियम 1960 का हवाला: चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था कि ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के विधिक नियमों में औपचारिक संशोधन किए बिना Form 6 के मूल प्रारूप में कोई भी नया प्रावधान या शर्त नहीं जोड़ी जा सकती।

  • सुखबीर सिंह संधू की सहमति: दूसरे चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस रुख का पूर्ण समर्थन करते हुए ECINET पोर्टल पर ऑनलाइन प्रक्रिया में जोड़े गए इस बदलाव को अनुचित व गैर-कानूनी बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की थी।

  • पूर्ण आयोग की बैठक: 26 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण पीठ की उच्चस्तरीय बैठक में इस कानूनी और प्रक्रियागत विसंगति पर गहन चर्चा हुई थी।

📂 पिछले 10 महीनों में दर्ज कराई गई थीं आपत्तियां: ECINET और फॉर्म प्रक्रिया पर उठे सवाल

आंतरिक असहमतियों और आधिकारिक स्पष्टीकरण का घटनाक्रम:

  • कई नीतिगत मामलों पर असहमति: रिपोर्ट्स में यह तथ्य सामने आया कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और प्रक्रियागत मामलों में करीब 14 बार अपनी लिखित व मौखिक असहमति व्यक्त की थी।

  • ECINET पोर्टल का विवाद: इन विवादित विषयों में Form 6 का डिजिटल प्रारूप और आंतरिक पोर्टल ECINET की तकनीकी प्रक्रियाएं प्रमुख रूप से शामिल थीं।

  • प्रेस नोट के जरिए स्थिति स्पष्ट: हालांकि, 26 सितंबर को फुल कमीशन की बैठक संपन्न होने के बाद जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इन मतभेदों को सामान्य विभागीय व कार्मिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए स्पष्टीकरण दिया गया था।

📜 क्या थी Form 6 में जोड़ी गई अतिरिक्त शर्त? जानिए आवेदकों पर इसका असर

विवादित डिक्लेरेशन और उसके प्रावधान:

  • पूर्वजों से जोड़ने की बाध्यता: Form 6 में शामिल किए गए अतिरिक्त डिक्लेरेशन के तहत नया वोटर कार्ड बनवाने वाले आवेदकों को स्वयं को या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी/नाना-नानी को पूर्व में संपन्न हुए ‘इंटेंसिव रिविजन’ (गहन पुनरीक्षण) की मतदाता सूची से लिंक करने वाली विस्तृत जानकारी देनी अनिवार्य की गई थी।

  • केवल SIR वाले राज्यों में सीमित: अब यह विशेष डिक्लेरेशन केवल उन्हीं चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ECINET पोर्टल पर अनिवार्य रहेगा, जहां वर्तमान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अभी सक्रिय रूप से चल रही है।

  • पुराना प्रारूप पूरी तरह बहाल: आयोग ने यह स्पष्ट किया कि जिन राज्यों में SIR का कार्य संपन्न हो चुका है, वहां Form 6 को पूरी तरह उसके पुराने और सरल प्रारूप में पुनः बहाल कर दिया गया है ताकि नए मतदाताओं को पंजीकरण में कोई असुविधा न हो।