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Delhi Voter List SIR Notice: वीआईपी कल्चर पर भड़के खरगे; कहा- क्या अब देश में आम और VIP मतदाता की नई श्रेणी बन गई है?

नई दिल्ली। दिल्ली में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान के तहत कई बड़े राजनेताओं व वीआईपी हस्तियों को नोटिस जारी होने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। नोटिस पाने वालों में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, एन्यूमरेशन (गणना) फॉर्म में दर्ज जानकारियों में कुछ विसंगतियां मिलने के कारण ये नोटिस भेजे गए हैं। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

⚡ खरगे का बीजेपी पर तीखा हमला: कहा- ‘बीजेपी का बनाया फ्रैंकनस्टीन मॉन्स्टर अब उसी के नेताओं को निगल रहा है’

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और आयोग को कठघरे में खड़ा किया है।

खरगे ने तंज कसते हुए कहा, “बिहार से शुरू हुआ SIR का यह flawed (त्रुटिपूर्ण) प्रोसेस जब दिल्ली पहुंचा, तब जाकर सत्ताधीशों को समझ आ रहा है कि कांग्रेस शुरुआत से इसका विरोध क्यों कर रही थी। SIR केवल वोट चोरी और लोकतंत्र को कमजोर करने का औजार ही नहीं है, बल्कि यह एक ‘फ्रैंकनस्टीन मॉन्स्टर’ (खुद की बनाई मुसीबत) बन चुका है, जिसने अब बीजेपी के ही अपने नेताओं को फंसाना शुरू कर दिया है।”

📜 वरिष्ठ नेताओं और हस्तियों को नोटिस पर घेरा: पूर्व नौसेना प्रमुख और भारत रत्न का भी किया जिक्र

कांग्रेस अध्यक्ष ने उजागर किया कि इस प्रक्रिया के तहत बीजेपी के कई शीर्ष नेताओं, मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को नोटिस थमाए गए हैं।

इनमें पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) तरनजीत सिंह संधू, कई पूर्व केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं। खरगे ने कहा कि स्थिति यह है कि इससे पूर्व भारत रत्न से सम्मानित प्रख्यात वैज्ञानिकों और देश के पूर्व नौसेना प्रमुख तक को ऐसे नोटिस जारी कर परेशान किया जा चुका है।

❌ ‘बंगाल में 93% मामलों में खारिज नाम फिर जुड़े’: खरगे ने वोट काटने की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल

मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा, “बंगाल में जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटकर उन्हें मतदान से वंचित करने का प्रयास किया गया था, उनमें से अब तक निस्तारित हुए मामलों में 93% अपीलकर्ता केस जीत चुके हैं। इसका सीधा अर्थ है कि 1,13,943 वैध नागरिकों को जबरन लिस्ट से बाहर किया गया था, जिन्हें अब दोबारा शामिल किया जा रहा है। आयोग जवाब दे कि किस आधार पर वैध भारतीय नागरिकों का संवैधानिक मताधिकार छीना गया था?”

🏛️ ‘क्या अब देश में आम और VIP मतदाता की अलग श्रेणी है?’: चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति पर बरसे

खरगे ने चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में ‘VIP / marked electors’ शब्दावली का प्रयोग किए जाने पर सख्त आपत्ति जताई।

उन्होंने पूछा, “क्या भारत के सर्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) के सिद्धांत के बीच अब ‘VIP मतदाता’ और ‘आम मतदाता’ जैसी कोई नई व्यवस्था बना दी गई है? हमारे संविधान ने ‘One Person, One Vote, One Value’ (एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य) का जो समतावादी सिद्धांत दिया था, क्या यह उसकी सीधी अवहेलना नहीं है? क्या अब वीआईपी लोगों का वोट ज्यादा कीमती हो गया है?”

उन्होंने आगे कहा कि SIR के शुरुआती तीन चरणों में 31 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 13.8 करोड़ मतदाताओं (कुल 94.78 करोड़ का करीब 14.61%) को सूची से बाहर कर दिया गया, लेकिन आयोग चुपचाप देखता रहा। वीआईपी लोगों के लिए तुरंत प्रेस रिलीज जारी होती है, जबकि करोड़ों आम जनता के लिए पूरी खामोशी छाई रहती है।

👹 जानिए क्या होता है ‘फ्रैंकनस्टीन का राक्षस’ (Frankenstein Monster): मुहावरे का सही अर्थ

राजनीतिक बयानों में इस्तेमाल होने वाला ‘फ्रैंकनस्टीन का राक्षस’ (Frankenstein’s Monster) वास्तव में अंग्रेजी साहित्य का एक बेहद चर्चित मुहावरा है।

इसका उपयोग ऐसी स्थिति को दर्शाने के लिए किया जाता है जब कोई व्यक्ति, संगठन या सरकार किसी ऐसी तकनीक, नियम या व्यवस्था का निर्माण करती है, जो आगे चलकर नियंत्रण से बाहर हो जाती है और खुद अपने ही निर्माता के लिए विनाशकारी साबित होने लगती है। यह नाम मैरी शेली के प्रसिद्ध उपन्यास के वैज्ञानिक पात्र ‘विक्टर फ्रैंकनस्टीन’ से आया है, जिसने एक जीव (राक्षस) की रचना की थी, जो अंततः उसी के विनाश का कारण बना।