Kanker News Today: हायटेक क्लासरूम के दावों की खुली पोल! कांकेर के प्राथमिक स्कूल में बदहाली के साये में 9 बच्चे
कांकेर। अच्छी पढ़ाई और हाईटेक क्लासरूम के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तर बस्तर कांकेर जिले के पूसाझर गांव से बदहाल शिक्षा व्यवस्था की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां का शासकीय प्राथमिक शाला का मूल भवन पूरी तरह जर्जर होकर ध्वस्त हो चुका है। इसके बाद से ही पिछले करीब 6 सालों से स्कूल का संचालन गांव के एक वैकल्पिक गोटूल भवन में किया जा रहा है। बरसात के मौसम में गोटूल भवन की जमीन और दीवारों में अत्यधिक नमी बढ़ने के कारण कमरों के अंदर जगह-जगह जहरीले मशरूम उग आए हैं। ऐसे खतरनाक माहौल में छोटे-छोटे मासूम बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहां लगातार सांप और बिच्छू का जानलेवा खतरा बना हुआ है।
👦 2020-21 से गोटूल भवन में लग रही कक्षाएं: 9 बच्चों के भरोसे चल रहा दो शिक्षकों का स्कूल
पूसाझर प्राथमिक शाला में पहली से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई कराई जाती है।
वर्तमान में इस स्कूल में कुल 9 बच्चे दर्ज हैं और दो शिक्षक पदस्थ हैं। कक्षा पहली में 2, दूसरी में 1, तीसरी में 3 और चौथी में 3 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि पांचवीं कक्षा में इस साल एक भी बच्चा नामांकित नहीं है।
स्कूल के प्रधान पाठक प्रह्लाद सिंह नरेटी ने बताया कि पूसाझर में प्राथमिक शाला का संचालन वर्ष 2007 से किया जा रहा है। पुराना भवन पूरी तरह जर्जर होकर टूट गया था, जिसके बाद मजबूरीवश वर्ष 2020-21 से गांव के सामाजिक गोटूल भवन में स्कूल चलाया जा रहा है। गांव वालों ने व्यवस्था के तहत यह भवन दिया था, जहां अब बच्चों को कुर्सियों पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
🧱 नए अतिरिक्त कक्ष का निर्माण अंतिम चरण में: अगले सत्र से शिफ्ट होने की उम्मीद
स्कूल के प्रधान पाठक ने आगे बताया कि जमीन पर काफी नमी रहने और गीली होने के कारण बच्चों को जमीन के बजाय कुर्सी-टेबल पर बैठाकर अध्यापन कराया जाता है।
राहत की बात यह है कि स्कूल के लिए नए अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य प्रशासन द्वारा कराया जा रहा है, जो फिलहाल अपने अंतिम चरण में है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले शैक्षणिक सत्र से बच्चों की कक्षाएं इस नए अतिरिक्त कक्ष में सुरक्षित रूप से संचालित की जा सकेंगी।
🐍 बरसात में मंडराया सांप-बिच्छू का खतरा: ग्रामीणों ने उठाई पक्के भवन की मांग
बरसात के मौसम में गोटूल की जमीन में नमी अत्यधिक बढ़ जाने से बच्चों के बैठने की जगह तक मशरूम और काई उग आई है।
मुरागांव के सरपंच ललित कुमार कवाची ने बताया कि स्कूल भवन ध्वस्त होने के बाद ग्रामीणों की सर्वसम्मति से गोटूल भवन में जगह दी गई थी। लेकिन नमी और जमीन में बने बिलों के कारण हर समय सांप और बिच्छू निकलने का खतरा मंडराता रहता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मासूमों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द स्थायी और पक्का स्कूल भवन उपलब्ध कराया जाए।
🔍 जिला शिक्षा अधिकारी बोले— ‘जांच कराकर करेंगे कार्रवाई’: 6 साल से बुनियादी सुरक्षा पर सवाल
इस गंभीर मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रमेश कुमार निषाद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली है। स्कूल वर्तमान में किस परिस्थिति और जगह में संचालित हो रहा है, इसकी तत्काल जांच कराई जाएगी।
बहरहाल, पिछले छह सालों से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चल रहे इस स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका स्थायी स्कूल भवन कब पूरी तरह तैयार होगा? फिलहाल बच्चों को नमी, गंदगी और जहरीले जीवों के साये में पढ़ाई करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।