Bank Strike Alert: आज देशभर में बैंकों का कामकाज ठप, 28 से 30 सितंबर को भी हड़ताल; UFBU ने दी चेतावनी
रायपुर (छत्तीसगढ़): संयुक्त बैंक यूनियनों के शीर्ष मंच ‘यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स’ (UFBU) के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबित मांगों को लेकर आज देशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया गया है।
इस राष्ट्रव्यापी कार्य बहिष्कार के चलते सार्वजनिक और अन्य बैंकों के लगभग 8 लाख अधिकारी व कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर हैं। इसके कारण देश भर की बैंक शाखाओं में वित्तीय लेनदेन, चेक क्लियरिंग और काउंटर से जुड़े रोजमर्रा के कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।
यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यह गतिरोध यहीं नहीं थमेगा; इसके बाद 28, 29 और 30 सितंबर को भी क्रमिक एक-दिवसीय हड़तालें की जाएंगी। यदि केंद्र सरकार ने 25 अक्टूबर तक उनकी वैधानिक मांगों का निराकरण नहीं किया, तो 26 अक्टूबर से संपूर्ण बैंकिंग क्षेत्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चला जाएगा।
📅 शनिवार के अवकाश का प्रस्ताव अधर में: ढाई साल से वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार
हड़ताल की मुख्य वजह और समझौते की पृष्ठभूमि:
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5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह का मुद्दा: हड़ताल का मुख्य कारण बैंकों में 5-दिवसीय कार्य सप्ताह (Five-Day Work Week) को लागू करने में केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय द्वारा की जा रही अत्यधिक देरी है।
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मार्च 2024 का द्विपक्षीय समझौता: भारतीय बैंक संघ (IBA) और कर्मचारी यूनियनों के बीच मार्च 2024 में हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में सभी शनिवारों को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने पर सहमति बन चुकी थी।
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40 मिनट अतिरिक्त कार्य की शर्त: समझौते के तहत कर्मचारियों ने शनिवार की छुट्टी के बदले सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने पर लिखित रजामंदी दी थी।
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स्वीकृति का इंतजार: यह प्रस्ताव अंतिम अनुमोदन के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भेजा गया था, परंतु ढाई वर्ष से अधिक की समयावधि बीत जाने के बाद भी इसे आधिकारिक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
📋 पुरानी पेंशन और भर्तियों समेत कई मुद्दे लंबित: मुख्य श्रम आयुक्त से वार्ता भी रही बेअसर
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें और विफल सुलह बैठक:
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OPS और पेंशन अपडेशन: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को निरस्त कर ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को पुनः लागू करना, पेंशन अपडेशन, सभी पेंशनर्स को एक समान महंगाई भत्ता (DA) तथा ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में वृद्धि करना।
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पर्याप्त मानव संसाधन: शाखाओं में कार्यभार के अनुपात में नई स्थायी भर्तियां करना और सेवानिवृत्त कर्मियों के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम का वहन संबंधित बैंकों द्वारा किया जाना।
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पीएलआई पर आपत्ति: यूनियनों का तर्क है कि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना से कर्मचारियों के बीच असमानता और असंतोष बढ़ रहा है।
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सुलह वार्ता रही विफल: 8 और 9 सितंबर को नई दिल्ली में मुख्य श्रम आयुक्त (CLC) और उप मुख्य श्रम आयुक्त की मध्यस्थता में हुई सुलह वार्ता में सरकार की ओर से 5-दिवसीय बैंकिंग पर कोई स्पष्ट और समयबद्ध आश्वासन नहीं मिला, जिससे हड़ताल टालने की सहमति नहीं बन सकी।
📢 ‘बढ़ते तनाव के बीच 5-डे बैंकिंग न्यायोचित मांग’: UFBU ने सरकार के रवैये पर उठाए सवाल
यूनियन का पक्ष और सेवाओं पर असर:
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कार्यभार और मानसिक दबाव: UFBU के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर सरकारी वित्तीय योजनाओं के क्रियान्वयन तक बैंककर्मियों ने हर विषम परिस्थिति में उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं। डिजिटलीकरण और बढ़ते वर्कलोड को देखते हुए शनिवार का अवकाश एक न्यायसंगत और वैधानिक अधिकार है।
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असहयोगपूर्ण रुख: यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार और बैंक प्रबंधन के उदासीन और असहयोगपूर्ण रवैये ने उन्हें लोकतांत्रिक हड़ताल के रास्ते पर जाने के लिए विवश किया है।
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शाखाएं बंद, सेवाएं प्रभावित: आंदोलन के दिनों में बैंक शाखाएं पूर्णतः बंद रहेंगी, जिससे सामान्य बैंकिंग व प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित होंगे। आम जनता को डिजिटल चैनलों (UPI/Net Banking) का सहारा लेना पड़ेगा।