Navratri 2026: गरबा में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर गरमाई सियासत, VHP की गाइडलाइन के बीच अमृता फडणवीस बोलीं- ‘त्योहार सबके लिए’
मुंबई/चंद्रपुर (महाराष्ट्र): पावन पर्व नवरात्रि के आगमन से पूर्व महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया पंडालों में गैर-हिंदुओं, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के प्रवेश को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
इस संवेदनशील मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ नेताओं और विभिन्न हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा कड़े प्रतिबंधों की मांग की जा रही है। इसी माहौल के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस द्वारा चंद्रपुर में दिया गया बयान सार्वजनिक विमर्श का केंद्र बन गया है। जहां एक ओर पंडालों में प्रवेश से पहले पहचान पत्रों की सघन जांच और माथे पर तिलक लगाने जैसी शर्तें थोपने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर अमृता फडणवीस ने सनातन व भारतीय पर्वों की सर्वसमावेशी संस्कृति का हवाला देते हुए एक संतुलित और उदारवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
🌸 ‘भारतीय त्योहार सभी को जोड़ने वाले’: अमृता फडणवीस ने समावेशी परंपरा का किया समर्थन
अमृता फडणवीस का बयान और वैचारिक दृष्टिकोण:
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पर्वों की सर्वसमावेशी भावना: अमृता फडणवीस ने कहा कि भारत के पारंपरिक त्योहार सभी वर्गों और समुदायों को साथ लेकर चलने की समृद्ध संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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सद्भाव और नियमों का पालन: उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा पंडाल में आता है, आयोजकों द्वारा तय किए गए नियमों और मर्यादा का पूरी तरह पालन करता है और उत्सव की खुशी में शामिल होता है, तो इसमें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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बहस को मिला नया मोड़: विगत वर्षों में गरबा आयोजनों के दौरान ‘पहचान छिपाकर प्रवेश’ और ‘लव जिहाद’ जैसे आरोपों के चलते गैर-हिंदुओं के प्रवेश का कड़ा विरोध होता रहा है, ऐसे में अमृता फडणवीस का यह वक्तव्य राजनीतिक हलकों में एक नए विमर्श को जन्म दे रहा है।
⚡ पार्टी लाइन से अलग राय पर सियासी चर्चा: विपक्ष साध सकता है निशाना
राजनीतिक समीकरण और मतभेद के संकेत:
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पार्टी के भीतर अलग स्वर: अमृता फडणवीस के इस खुले रुख ने भाजपा और उससे संबद्ध संगठनों के भीतर इस विषय पर विचारों की भिन्नता को उजागर कर दिया है।
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विपक्ष उठा सकता है सवाल: कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) जैसे विपक्षी दल अब इस विरोधाभास को लेकर भाजपा को घेर सकते हैं कि यदि मुख्यमंत्री परिवार से ही समावेशी सोच का संदेश आ रहा है, तो फिर हर वर्ष पंडालों में प्रतिबंध को लेकर विवाद क्यों खड़ा किया जाता है।
📜 वीएचपी की सख्त गाइडलाइन और नितेश राणे का कड़ा रुख: तिलक और पहचान पत्र की शर्त
संगठनों की रणनीति और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया:
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नितेश राणे की दो टूक: भाजपा विधायक नितेश राणे ने सार्वजनिक तौर पर गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई थी।
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VHP की आचार संहिता: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने गरबा आयोजकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें पंडालों में प्रवेश पाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के माथे पर तिलक लगाने और गेट पर पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड) की अनिवार्य जांच करने की अपील की गई है ताकि पहचान छिपाकर कोई प्रवेश न कर सके।
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विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया: उद्धव गुट, शरद पवार गुट और कांग्रेस ने विहिप की इन गाइडलाइंस को समाज को बांटने वाला कदम बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और इसे नागरिकों की स्वतंत्रता पर अनुचित पहरा करार दिया है।