Bharat Ratna CNR Rao: अंग्रेजी नाम में एक्स्ट्रा ‘f’ जुड़ने से भारत रत्न वैज्ञानिक सीएनआर राव को नोटिस, पहचान साबित करने की नौबत
बेंगलुरु (कर्नाटक): देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत विश्वविख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर सी.एन.आर. राव (Prof. C.N.R. Rao) को प्रशासनिक तकनीकी खामी के कारण अपनी ही पहचान सिद्ध करने के लिए सुनवाई में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के अंतर्गत उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज अंग्रेजी नाम में लिपिकीय त्रुटि (Clerical Error) पाई गई है। पुराने दस्तावेजों में उनका नाम ‘Prof. C.N.R. Rao’ दर्ज था, परंतु मौजूदा डिजिटल रिकॉर्ड में ‘Prof’ के साथ एक अतिरिक्त ‘f’ जुड़ जाने से वह ‘Proff. CNR Rao’ हो गया। इस तकनीकी विसंगति के आधार पर उन्हें नोटिस जारी कर यह प्रमाणित करने को कहा गया है कि वे वास्तव में वही वैज्ञानिक प्रो. सीएनआर राव हैं, जिनका जन्म बेंगलुरु के बसवनगुडी में हुआ और जिन्हें विज्ञान जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
📋 43 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस: 92 वर्षीय वैज्ञानिक की अस्वस्थता के बीच सुनवाई का बुलावा
एसआईआर विसंगति और प्रक्रिया का विवरण:
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मल्लेश्वरम में व्यक्तिगत पेशी की मांग: 92 वर्ष की आयु पार कर चुके प्रोफेसर राव को मल्लेश्वरम स्थित कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब किया गया है।
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स्वास्थ्य और जानकारी का अभाव: प्रो. राव के करीबियों के अनुसार, अस्वस्थता के चलते वे फोन का उपयोग बहुत सीमित करते हैं और ईमेल स्वयं नहीं देखते, जिसके कारण परिजनों व परिचितों को इस नोटिस की प्रारंभिक जानकारी नहीं मिल सकी।
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‘सेल्फ-मिसमैच’ का दायरा: एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भरे गए विवरणों में अंतर पाए जाने के कारण 43 लाख से अधिक मतदाताओं को ऐसे नोटिस प्रेषित किए गए हैं। वर्ष 2002 की ऐतिहासिक मतदाता सूची और वर्तमान डिजिटल डेटा में भिन्नता मिलने पर प्रणाली द्वारा इसे स्वतः विसंगति (Mismatch) के रूप में चिह्नित किया जा रहा है।
🔬 कौन हैं प्रोफेसर सी.एन.आर. राव: कलाम और रमन के बाद भारत रत्न पाने वाले तीसरे वैज्ञानिक
उपलब्धियां और वैश्विक योगदान:
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देश का सर्वोच्च सम्मान: 92 वर्षीय वैज्ञानिक प्रो. सीएनआर राव को भारत सरकार ने वर्ष 2014 में ‘भारत रत्न’ से नवाजा था। वे डॉ. सी.वी. रमन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले देश के तीसरे वैज्ञानिक हैं।
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रसायन शास्त्र में वैश्विक योगदान: सॉलिड स्टेट और मैटेरियल केमिस्ट्री के क्षेत्र में उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानक माना जाता है। वे इस विषय पर कई संदर्भ ग्रंथ एवं शोध पत्र लिख चुके हैं।
⚠️ दिग्गज हस्तियां भी नोटिस के दायरे में: मोहम्मद शमी और पूर्व राजदूत को भी मिल चुका है समन
प्रशासनिक त्रुटियों की जद में प्रमुख हस्तियां:
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पूर्व राजदूत नवदीप सूरी: तीन देशों में भारत के राजदूत रहे नवदीप सूरी को भी पंजाब एसआईआर प्रक्रिया के तहत अपनी नागरिकता सिद्ध करने संबंधी नोटिस भेजा गया था, जिस पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से तीव्र आपत्ति व्यक्त की थी।
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विशिष्ट नागरिक शामिल: कर्नाटक के एक पद्मश्री सम्मानित शिक्षाविद् और एक नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री को भी पूर्व में डेटा मिसमैच के आधार पर ऐसे नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
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क्रिकेटर मोहम्मद शमी: भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को भी इसी प्रकार की तकनीकी जांच प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान स्पष्ट करने का नोटिस भेजा गया था।