ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...

लखीसराय अशोकधाम भगदड़: जांच रिपोर्ट में अफसरों को क्लीन चिट, बिजली के पोल और बैरिकेडिंग पर फोड़ा ठीकरा

लखीसराय (बिहार): सुप्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में बीते सोमवार को मची भयानक भगदड़ में 7 बेकसूर महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे की पड़ताल के लिए एपर समाहर्ता (ADM) नीरज कुमार के नेतृत्व में गठित जिलास्तरीय जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी (DM) शैलेंद्र कुमार को सौंप दी है। हालांकि, जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि रिपोर्ट में वास्तविक प्रशासनिक चूक को छिपाते हुए मुख्य अधिकारियों और मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई है।

⚡ बिजली का खंभा और कमजोर बैरिकेडिंग को बताया हादसे का मुख्य कारण

जांच दल द्वारा दिए गए निष्कर्षों का विवरण:

  • पोल गिरने से मची भगदड़: जांच रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में अचानक बिजली का एक खंभा गिरने से श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी और डर का माहौल बन गया।

  • बैरिकेडिंग का टूटना: अचानक बढ़े भीड़ के दबाव को बांस-बल्लों से बनी कमजोर बैरिकेडिंग संभाल नहीं सकी, जिससे लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए।

  • जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना: रिपोर्ट में सारा ठीकरा बिजली विभाग और भवन निर्माण प्रमंडल की व्यवस्थाओं पर फोड़ दिया गया है, जबकि भीड़ प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं की गई।

🤐 सुरक्षा बलों की भूमिका और अहम बिंदुओं पर साधी गई चुप्पी

जांच प्रक्रिया में छूटे अहम पहलू:

  • 7 बिंदुओं पर जांच का दावा: जांच दल का कहना है कि उन्होंने पोल गिरने के कारणों, मौके पर मौजूद कर्मियों की भूमिका और भविष्य के सुरक्षा उपायों सहित सात बिंदुओं पर पड़ताल की है।

  • गेटों की सुरक्षा पर चुप्पी: हादसे के वक्त मंदिर के प्रवेश (Entry) और निकास (Exit) द्वारों पर तैनात पुलिस और सुरक्षा बलों की क्या स्थिति थी, इस पर रिपोर्ट पूरी तरह खामोश है।

  • डीएम की समीक्षा: एडीएम नीरज कुमार का कहना है कि जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है और अब जिलाधिकारी के स्तर पर समीक्षा के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

❓ क्राउड मैनेजमेंट का अभाव: सवालों के घेरे में प्रशासनिक लापरवाही

सावन मेले की पूर्व तैयारियों पर उठते गंभीर सवाल:

  • भीड़ का पूर्व अनुमान: सावन के महीने में लाखों श्रद्धालुओं के आने की पहले से जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा प्रबंध क्यों नहीं किए गए?

  • एंट्री प्लान का अभाव: संकरे रास्तों पर अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए होल्डिंग एरिया या चरणबद्ध प्रवेश का कोई ठोस प्लान मौजूद नहीं था।

  • परिजनों का दर्द: अपने प्रियजनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों और घायलों के लिए यह रिपोर्ट वास्तविक न्याय के बजाय मात्र एक कागजी खानापूर्ति नजर आ रही है।