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हरिद्वार कांवड़ मेले में डीजे के शोर से भारी ध्वनि प्रदूषण, तीर्थनगरी छोड़ भागे पक्षी

हरिद्वार (उत्तराखंड): धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ मेले के दौरान वाहनों पर लगे भीमकाय साउंड सिस्टम और डीजे के कारण बड़े पैमाने पर ध्वनि प्रदूषण का मामला सामने आया है।

अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक एवं गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश चंद्र भट्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डाक कांवड़ के नाम पर बजने वाले अनियंत्रित डीजे से पर्यावरण और इंसानी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इस भीषण शोर के कारण मनुष्य के स्वास्थ्य के साथ-साथ वन्यजीवों और पशु-पक्षियों की दैनिक दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई, जिसके चलते हरिद्वार और ऋषिकेश के अधिकांश पक्षी क्षेत्र छोड़कर दूर पलायन कर गए।

📈 ध्वनि प्रदूषण 100 से 110 डेसिबल तक पहुंचा, हृदय रोगियों और कानों के लिए बेहद खतरनाक

प्रोफेसर भट्ट ने वैज्ञानिक आंकड़ों का हवाला देते हुए ध्वनि प्रदूषण के खतरनाक स्तर को रेखांकित किया:

  • मानकों का उल्लंघन: आवासीय क्षेत्रों में निर्धारित मानक दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल हैं, जबकि कांवड़ यात्रा मार्गों और शिविरों में यह स्तर 100 से 110 डेसिबल तक दर्ज किया गया।

  • स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव: डीजे का अत्यधिक बेस और तेज शोर हृदय रोगियों, बुजुर्गों, बच्चों के कानों और सामान्य नींद के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हुआ।

  • सरकारों से प्रतिबंध की अपील: प्रोफेसर भट्ट ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को सुझाव दिया है कि आगामी कांवड़ मेलों में विशाल डीजे पर पूर्ण और सख्त प्रतिबंध लगाया जाए।

🌳 पेड़ों से गायब हुए पक्षी, खेतों में गंदगी से महामारी फैलने की आशंका

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने भी मेले के दौरान हुई असुविधाओं को साझा किया:

  • पक्षी हुए गायब: लक्सर-हरिद्वार मार्ग स्थित मिस्सरपुर गांव निवासी व राष्ट्रीय आत्मरक्षा कोच आरती सैनी ने बताया कि डीजे के असहनीय कंपन और कानफोड़ू शोर के कारण खेतों और पेड़ों पर बैठने वाले पक्षी पूरी तरह गायब हो गए।

  • सफाई की गंभीर समस्या: आरती सैनी ने बताया कि कांवड़ियों द्वारा खुले खेतों में शौच किए जाने से पूरे इलाके में तीव्र दुर्गंध फैल गई, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया।

🚫 200 से अधिक बड़े डीजे सीमा से बाहर लौटाए गए, ‘डीजे वॉर’ पर प्रशासन ने कसी नकेल

हरिद्वार जिला प्रशासन और पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण व विवादों को रोकने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए:

  • ऊंचाई और डीजे पर नियम: जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नवनीत सिंह भुल्लर ने जानकारी दी कि प्रशासन ने 12 फीट से ऊंची कांवड़ और अनियंत्रित बड़े डीजे पर रोक लगाई थी।

  • सीमा पर की गई वापसी: नियमों का उल्लंघन करने वाले 200 से अधिक बड़े डीजे वाहनों को हरिद्वार की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही रोककर वापस लौटा दिया गया।

  • डीजे प्रतियोगिता पर रोक: टोल प्लाजा और मुख्य मार्गों पर कांवड़ियों के बीच होने वाली तेज आवाज की डीजे प्रतियोगिताओं (DJ War) पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई, जिससे इस वर्ष कांवड़ दलों के बीच होने वाले आपसी झगड़ों और हिंसक टकराव पर प्रभावी रोक लगी।