नालंदा में मिड डे मील में नमक की जगह मिलाया सर्फ: 24 से अधिक स्कूली बच्चों की बिगड़ी तबीयत, मची अफरा-तफरी
नालंदा (बिहार): जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र अंतर्गत मध्य विद्यालय परासी में मंगलवार को मिड डे मील (MDM) के दौरान घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। भोजन करने के कुछ ही देर बाद दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई।
बच्चों ने पेट दर्द, चक्कर और उल्टी होने की शिकायत की, जिससे पूरे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों ने आनन-फानन में बीमार बच्चों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनका उपचार कर रही है। सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों की स्थिति का जायजा लिया और सभी बच्चों को खतरे से बाहर बताया है।
⚠️ नमक की जगह सर्फ (डिटर्जेंट) डालने से बिगड़ी तबीयत, प्राचार्य ने बताई वजह
विद्यालय के प्राचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह ने घटना के कारणों का खुलासा किया:
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मेन्यू में था सोयाबीन-चावल: स्कूल में मिड डे मील की आपूर्ति पास के एक एनजीओ द्वारा की जाती है। मंगलवार को मेन्यू के अनुसार बच्चों को सोयाबीन-चावल परोसा गया था।
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सर्फ और नमक एक जगह रखे थे: खाना खाते समय जब कुछ बच्चों ने नमक कम होने की बात कही, तो रसोइये ने पास में ही रखे डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ) के डिब्बे को गलती से नमक समझ लिया।
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भोजन में मिला दिया सर्फ: रसोइये ने खाने में नमक के बदले सर्फ डाल दिया और वही भोजन दोबारा बच्चों को परोस दिया, जिसे खाते ही बच्चे बीमार पड़ने लगे।
🏥 खाना खाते ही होने लगी उल्टी, दो दर्जन बच्चों का सदर अस्पताल में इलाज जारी
विषाक्त भोजन करने के कुछ ही मिनटों के भीतर बच्चों की हालत बिगड़ने लगी:
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प्राथमिक उपचार हुआ विफल: शिक्षकों ने तुरंत स्कूल में प्राथमिक उपचार देने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति गंभीर होते देख तुरंत अस्पताल रेफर किया गया।
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इलाजरत बच्चे: सदर अस्पताल में प्रीति कुमारी, आयुषी कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, नीतू कुमारी, शिवानी कुमारी, चांदनी कुमारी, सजनी कुमारी, सुहानी, अनु कुमारी, राखी कुमारी, वैष्णवी कुमारी सहित दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं का सघन उपचार चल रहा है।
😡 एक बेड पर दो-तीन बच्चों को देख भड़के परिजन, अस्पताल में किया हंगामा
घटना की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक सदर अस्पताल पहुंच गए, जहां अव्यवस्था देखकर उनका गुस्सा फूट पड़ा:
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बेड की कमी पर आक्रोश: अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने पर एक-एक बेड पर दो से तीन बच्चियों को लिटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही थी।
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सिविल सर्जन का आश्वासन: बदहाल व्यवस्था पर परिजनों ने जमकर विरोध दर्ज कराया। हंगामे की सूचना पर पहुंचे सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया और बच्चों को समुचित व बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
🛺 समय पर नहीं मिली सरकारी एंबुलेंस, ई-रिक्शा और ऑटो से बच्चों को लेकर दौड़े परिजन
स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाओं पर भी इस घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
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एंबुलेंस की अनुपलब्धता: स्कूल में इतने बड़े पैमाने पर बच्चों के बीमार होने के बावजूद स्थानीय नूरसराय अस्पताल से कोई एंबुलेंस या मेडिकल टीम मौके पर नहीं पहुंची।
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निजी वाहनों का सहारा: मजबूरी में परिजन और स्थानीय लोग अपने बच्चों को ई-रिक्शा, बाइक और ऑटो में बैठाकर बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले गए।
🔍 स्कूल और एनजीओ की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच के घेरे में लापरवाही
इस गंभीर घटना ने मध्याह्न भोजन की सुरक्षा और किचन प्रबंधन की पोल खोल दी है:
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रसोई प्रबंधन पर सवाल: खाद्य सामग्री और जहरीले रासायनिक डिटर्जेंट पाउडर को एक ही स्थान पर क्यों रखा गया था, इसे लेकर जांच बैठाई जा रही है।
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कड़ी कार्रवाई की मांग: स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने एनजीओ और लापरवाह स्कूल कर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।