ब्रेकिंग
Kanker News: कांकेर में सरंगपाल महानदी पुल से बुजुर्ग ने लगाई छलांग, मोपेड और मोबाइल छोड़कर नदी में ... Bank Strike News: 28 से 30 सितंबर तक देशव्यापी बैंक हड़ताल, झारखंड में 60,000 करोड़ का कारोबार होगा ... MMDR Act 2026: केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी का झारखंड सरकार पर हमला, गिनाए संशोधन कानून के फायदे Ashish Agarwal BJP: राष्ट्रीय मीडिया संयोजक आशीष अग्रवाल की नई पहल, ग्वालियर में 'नो होर्डिंग-बैनर' ... Katni News: कटनी जिला अस्पताल की तीसरी मंजिल से महिला ने लगाई छलांग, हालत गंभीर Morena Crime News: थाने से 100 मीटर दूर बदमाशों का आतंक, FIR कराकर लौट रहे 3 लोगों पर जानलेवा हमला MP News: भोपाल मास्टर प्लान 2047 में मकान-दुकान होंगे साथ, CM मोहन यादव ने मांगे सुझाव, जानें बड़ी ब... Ganesh Visarjan Tragedy: महाराष्ट्र के पालम में विसर्जन के दौरान 2 युवक नदी में डूबे, रेस्क्यू ऑपरेश... Farmers Relief Maharashtra: फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, 75% राज्य सूखाग्रस्त, बिजली बिल और कर्ज में ... Hooghly News: श्रीरामपुर में TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हमला, ममता बनर्जी ने BJP को घेरा

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा ईंधन, नए वाहनों की बीमा अवधि भी बढ़ाई

नई दिल्ली: देश में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत वाहनों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस (Third-Party Insurance) स्टेटस को फ्यूल (पेट्रोल/डीजल) पंपों से सीधे जोड़ा जाएगा, ताकि बिना वैध बीमा वाली गाड़ियों की त्वरित पहचान की जा सके और उन्हें तब तक ईंधन न दिया जाए जब तक वे बीमा न करवा लें।

⚖️ देश में 56% वाहन बिना इंश्योरेंस के, पीड़ितों को मुआवजे के लिए भटकने से बचाएगा सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने देश में वाहनों के इंश्योरेंस की बदहाल स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए आंकड़े उजागर किए।

अदालत ने बताया कि देश के कुल 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ (यानी करीब 56 प्रतिशत) वाहन बिना किसी इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटना का शिकार होने वाले निर्दोष पीड़ितों अथवा उनके परिवारों को कानूनी अड़चनों के कारण समय पर वैधानिक मुआवजा प्राप्त नहीं हो पाता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146 का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को लंबे मुकदमों से राहत दिलाकर तुरंत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

🚗 नए चार-पहिया वाहनों के लिए 4 साल और दो-पहिया के लिए 6 साल अनिवार्य हुआ थर्ड-पार्टी कवर

सड़क सुरक्षा के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्चतम न्यायालय ने नए वाहनों की अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अवधि को बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है।

वर्ष 2018 में कोर्ट ने नए चार-पहिया वाहनों हेतु 3 वर्ष तथा दो-पहिया वाहनों हेतु 5 वर्ष का कवर अनिवार्य किया था। अब 8 वर्ष उपरांत समीक्षा करते हुए कोर्ट ने नए 4-व्हीलर के लिए इस अवधि को 3 से बढ़ाकर 4 साल और 2-व्हीलर के लिए 5 से बढ़ाकर 6 साल करने का आदेश IRDAI को जारी किया है। इससे वाहन मालिकों को बार-बार नवीनीकरण की परेशानी से मुक्ति मिलेगी और सड़क पर बीमाहीन वाहनों की संख्या घटेगी।

📷 ANPR कैमरे, ऑटोमैटिक ई-चालान और पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस देने के निर्देश

वाहनों की वास्तविक समय पर डिजिटल निगरानी सुनिश्चित करने हेतु शीर्ष अदालत ने राज्यों में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं।

ये कैमरे सीधे ‘बीमा सूचना ब्यूरो’ और केंद्रीय ‘वाहन’ पोर्टल के डेटाबेस से जुड़े होंगे, जिससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों का स्वतः ई-चालान (e-Challan) जनरेट हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, राज्य पुलिस बलों को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या विशेष मोबाइल ऐप्स उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे नाकेबंदी के दौरान मौके पर ही वाहन के इंश्योरेंस की प्रामाणिक जांच संभव हो सके।

🏛️ तेलंगाना हाईकोर्ट का 10 लाख का मुआवजा आदेश बरकरार, 14 अगस्त तक मांगी गई अनुपालन रिपोर्ट

यह ऐतिहासिक दिशानिर्देश तेलंगाना हाईकोर्ट के एक सड़क दुर्घटना मुआवजे से जुड़े फैसले की अपील पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा, जिसमें दुर्घटना में मारे गए वाहन मालिक के परिजनों को ₹10.005 लाख और 7.5% वार्षिक ब्याज के साथ मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीमा दावों में अत्यधिक तकनीकी अड़चनें नहीं लगानी चाहिए। अदालत ने सभी संबंधित मंत्रालयों एवं IRDAI को 14 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करने का निर्देश दिया है, जबकि मामले की अगली औपचारिक सुनवाई 18 अगस्त को नियत की गई है।