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Gwalior JAH Parking Scam: ग्वालियर के JAH में स्मार्ट पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली, मरीज भुगत रहे खामियाजा; ठेका निरस्त करने का अल्टीमेटम

ग्वालियर। जयारोग्य अस्पताल (JAH) में प्रबंधन के लापरवाह रवैए के चलते आरएफआईडी (रेडियो फ़्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) आधारित पार्किंग व्यवस्था का दावा मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। अस्पताल में सिस्टम पूरी तरह लागू किए बिना ही मरीजों और उनके स्वजनों से पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है। निर्धारित 20 रुपये की जगह 50 रुपये तक अवैध तरीके से वसूले जा रहे हैं। वहीं एक ही दिन में अस्पताल के अलग-अलग परिसरों में जाने पर दोबारा पार्किंग शुल्क भी लिया जा रहा है।

⚠️ स्टिंग के बाद भी मनमानी जारी, अस्पताल प्रबंधन ने ठेका निरस्त और ब्लैकलिस्ट करने की दी चेतावनी

हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन को इस अनियमितता की जानकारी होने के बावजूद लंबे समय से वसूली जारी है। इतना ही नहीं, सहायक अधीक्षक डॉ. एमएल माहौर स्वयं स्टिंग कर इस अवैध वसूली का खुलासा कर चुके हैं, बावजूद इसके ठेकेदार की मनमानी जारी है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि शिकायतों के बाद ‘वैष्णवी इंफ्राटेक’ को तीन नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं आया। अब प्रबंधन ने अंतिम नोटिस जारी कर निविदा शर्तों का पालन नहीं करने पर ठेका निरस्त करने, धरोहर राशि राजसात करने और फर्म को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी है।

🎟️ आरएफआईडी के नाम पर सिर्फ पर्ची, डिजिटल एंट्री और स्मार्ट सिस्टम पूरी तरह गायब

अस्पताल परिसर में पार्किंग के दौरान पीओएस (POS) मशीन से केवल प्रवेश की पर्ची काटी जाती है, जिसमें समय, तारीख और शुल्क दर्ज रहता है। लेकिन वाहन बाहर निकलते समय न तो किसी आरएफआईडी सिस्टम का उपयोग होता है और न ही एग्जिट की डिजिटल एंट्री की जाती है। कर्मचारी सिर्फ पर्ची फाड़कर वाहन बाहर निकाल देते हैं। ऐसे में आरएफआईडी आधारित स्मार्ट पार्किंग व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित नजर आती है।

🚧 बूम बैरियर न होने से अधूरा पड़ा सिस्टम, अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए हो रही खिलवाड़

आरएफआईडी आधारित पार्किंग व्यवस्था के लिए बूम बैरियर अनिवार्य होते हैं। पुराने ठेकेदार ने कुछ स्थानों पर इन्हें लगाया था, लेकिन उनका उपयोग कभी नहीं किया गया। वहीं ‘हजार बिस्तर अस्पताल’ में अब तक बूम बैरियर लगाए ही नहीं गए। बताया जा रहा है कि अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए पूरी व्यवस्था लागू नहीं की गई, जिसका खामियाजा अब मरीजों को अतिरिक्त शुल्क देकर भुगतना पड़ रहा है।

🚗 एक ही दिन में दो-दो बार वसूला जा रहा शुल्क, इंटरनेट मीडिया पर वीडियो वायरल

मरीजों और उनके स्वजनों का आरोप है कि यदि उन्हें इलाज के दौरान अस्पताल के एक परिसर से दूसरे परिसर में जाना पड़ता है, तो हर बार नई पार्किंग पर्ची काटकर शुल्क लिया जाता है। अगर आरएफआईडी सिस्टम सही से लागू होता तो वाहन का रिकॉर्ड एक बार दर्ज होने के बाद दोबारा शुल्क लेने की नौबत ही नहीं आती। बीते रोज पुराने जेएएच परिसर में पार्किंग शुल्क लिए जाने के बाद ‘हजार बिस्तर अस्पताल’ में दोबारा शुल्क लिए जाने की शिकायत सामने आई है। इसका इंटरनेट मीडिया पर वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।

🛑 शुल्क पूरा, लेकिन जिम्मेदारी शून्य! पर्ची पर लिखा होता है ‘आनर्स रिस्क’

पार्किंग की रसीद पर साफ लिखा होता है कि वाहन “आनर्स रिस्क” (Owner’s Risk) पर पार्क किया गया है, यानी वाहन की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल वाहन मालिक की होगी। स्वजनों का सवाल है कि जब निर्धारित से ज्यादा पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है, तो वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी पार्किंग संचालक की क्यों नहीं तय की जाती?