महाघोटाला या मेहरबानी ? भोपाल नगर निगम के झील संरक्षण प्रकोष्ठ में नियमों की धज्जियाँ; अनुकंपा और डीजल घोटाले में बड़े अधिकारियों का संरक्षण
भोपाल: राजधानी की झीलों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाला नगर निगम भोपाल (BMC) का झील संरक्षण प्रकोष्ठ भ्रष्टाचार, नियमों की अनदेखी और रसूखदारों की मेहरबानी के आरोपों में घिर गया है। विभाग में बिना वैधानिक प्रक्रिया के चहेतों को लाभ पहुंचाने और वित्तीय अनियमितताओं का एक गंभीर मामला सामने आया है।
अनुकंपा नियुक्ति में नियमों का मखौल
मध्य प्रदेश शासन के GAD निर्देशों के अनुसार, अनुकंपा पर कनिष्ठ लिपिक (LDC) पद पर नियुक्ति के लिए CPCT (कंप्यूटर प्रवीणता परीक्षा) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। यदि नियुक्ति के समय प्रमाण-पत्र नहीं है तो 3 वर्ष के अंदर जमा करना जरूरी है, अन्यथा सेवा समाप्त या पदावनत करने का प्रावधान है।
लेकिन झील संरक्षण प्रकोष्ठ में पदस्थ संदीप सिंह ठाकुर बिना CPCT के सालों से पद पर काबिज हैं। नियुक्ति के बाद आज तक उन्होंने यह अनिवार्य प्रमाण-पत्र जमा नहीं किया है। जबकि अन्य अनुकंपा आश्रित कर्मचारी इस नियम का पालन करने या नौकरी गंवाने के दबाव में हैं, ठाकुर पर विभाग के बड़े अधिकारियों की खास मेहरबानी बरती जा रही है।

बिना आदेश के ‘सुपर बॉस’ बने AHO
विभाग में एक और बड़ी अनियमितता सहायक स्वास्थ्य अधिकारी (AHO) की है। बिना किसी लिखित कार्य आदेश के यह अधिकारी पूरे झील संरक्षण प्रकोष्ठ का प्रशासनिक और वित्तीय प्रभार संभाल रहे हैं। शासकीय नियमों के अनुसार, बिना आधिकारिक आदेश के किसी अन्य विभाग का कार्यभार संभालना अवैध है।
डीजल पर्चियों पर अवैध हस्ताक्षर: AHO झील संरक्षण प्रकोष्ठ के वाहनों के डीजल स्लिप्स पर खुद हस्ताक्षर कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक यह अधिकार केवल DDO या सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिखित रूप से अधिकृत अधिकारी को ही होता है। AHO के पास ऐसा कोई आदेश नहीं है, फिर भी वे करोड़ों रुपये के बजट वाले विभाग के संसाधनों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, जो वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है।

बड़े अधिकारियों का वरदहस्त?
विभाग के अंदर चर्चा है कि इन दोनों कर्मचारियों को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। लॉगबुक, ऑडिट और स्थापना शाखा की जांच में ये बातें छिप नहीं सकतीं। जानबूझकर फाइलें दबाई जा रही हैं और नियमों की अनदेखी की जा रही है।
मुख्य सवाल: क्या झील संरक्षण प्रकोष्ठ जैसे महत्वपूर्ण विभाग में बड़े अफसरों की मिलीभगत से नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं? मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
(संपादित और संक्षिप्त रूप — सभी महत्वपूर्ण तथ्य, आरोप और नियमों का उल्लेख बरकरार रखा गया है।)