कार्यपालन यंत्री आर.के. त्रिवेदी के अधीन स्वच्छ भारत मिशन ग्लोबल इन्वेस्टर समिट 2025: के फाउंटेन कार्यों में पर उठे गंभीर सवाल; NON-SOR मदों में हेरफेर कर शासकीय राशि के दुरुपयोग की शिकायत
भोपाल (विशेष संवाददाता) शाहिद इकबाल:
राजधानी भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (GIS) 2025 के दौरान शहर के सौंदर्यीकरण और स्वच्छ भारत मिशन (SBM) के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। नगर निगम भोपाल की स्वच्छ भारत मिशन शाखा द्वारा कराए गए फाउंटेन (फव्वारे) स्थापना कार्यों में नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह पूरा कार्य तत्कालीन अधीक्षक यंत्री उदित गर्ग और कार्यपालन यंत्री आर.के. त्रिवेदी के सीधे प्रशासनिक और तकनीकी नियंत्रण में संपादित किया गया था।
प्राप्त दस्तावेजों और शिकायत प्रति के अनुसार, एयरपोर्ट ब्रिज के नीचे फव्वारे लगाने (Providing and Fixing of Foam Jet Fountain) के काम में भारी गड़बड़ी पाई गई है। इस कार्य के ‘फर्स्ट एंड फाइनल बिल’ (माप पुस्तिका संख्या 3625, पृष्ठ 01 से 10) के सूक्ष्म परीक्षण से यह चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ है कि कार्य में शामिल की गई NON-SOR (नॉन-शेड्यूल ऑफ रेट्स) मदों की दरों को प्रचलित बाजार मूल्य की तुलना में अत्यधिक और असामान्य रूप से बढ़ाकर स्वीकृत किया गया और भुगतान भी कर दिया गया।

इन सामग्रियों की दरों में हुआ बड़ा खेल (प्रति इकाई ₹70 से ₹14,000 तक की वृद्धि):
फोम जेट नोजल (Foam Jet Nozzle)
आरजीबी लाइट्स (RGB Light)
सबमर्सिबल पंप (Submersible Pump)
कंट्रोल पैनल (Control Panel)
केबल्स (Cables) और पीवीसी पाइप (PVC Pipe)
एम्प्लीफायर (Amplifier) एवं इंस्टॉलेशन (Installation) कार्य
दस्तावेजों के मुताबिक, केवल एयरपोर्ट ब्रिज के नीचे किए गए इस एक अकेले कार्य में ही लगभग 2 लाख से 3 लाख रुपये तक के अतिरिक्त और नियम विरुद्ध भुगतान की स्पष्ट संभावना परिलक्षित हो रही है। यह स्थिति शासकीय वित्तीय नियमों, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का खुला उल्लंघन दर्शाती है।
19 अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की गड़बड़ी की आशंका:
मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट 2025 के नाम पर भोपाल शहर के लगभग 19 विभिन्न प्रमुख स्थानों पर फव्वारे (फाउंटेन) स्थापित करने के कार्य कराए गए थे। प्रारंभिक जांच और शिकायत के अनुसार, उन सभी 19 स्थानों पर भी इसी सुनियोजित कार्यप्रणाली के तहत NON-SOR मदों की दरों को बाजार दर से जानबूझकर कई गुना बढ़ाकर स्वीकृत किया गया और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई। यदि सभी 19 स्थानों के बिलों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की जाती है, तो यह घोटाला लाखों-करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।
कार्यपालन यंत्री आर.के. त्रिवेदी के अधीन हुए इन संदिग्ध भुगतानों को लेकर विभाग और नगर निगम प्रशासन द्वारा कोई जांच या कार्रवाई अब तक नहीं की गई। सूत्रों का कहना है कि इस मामले की शिकायत उच्च स्तर पर की जा चुकी है, जिसमें शासकीय राशि के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।