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ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग हादसा: CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, MCD अधिकारियों को मिली बड़ी राहत

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित RAU’s IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी सप्लीमेंट्री फाइनल रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है। इस रिपोर्ट में CBI ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि नगर निगम (MCD) के किसी वरिष्ठ अधिकारी ने जानबूझकर लापरवाही की या अपने पद का दुरुपयोग किया। इसी आधार पर एजेंसी ने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए उन्हें अभियोजन से बाहर रखने की सिफारिश की है।

🔍 CBI ने हर पहलू पर की गहन जांच

CBI ने अपनी जांच में कोचिंग सेंटर से जुड़े दस्तावेजों, MCD की फाइलों, निरीक्षण रिपोर्टों, निर्माण रिकॉर्ड और जलभराव से जुड़े तकनीकी पहलुओं का विस्तार से अध्ययन किया। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे किसी वरिष्ठ MCD अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी तय की जा सके। कानूनी रूप से, किसी भी अधिकारी पर केवल संदेह या आशंका के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जिसके लिए CBI को कोई ठोस दस्तावेजी या प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले।

⚖️ अदालत लेगी अंतिम फैसला

CBI द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद अब अंतिम निर्णय अदालत को करना है। न्यायालय इस रिपोर्ट को स्वीकार कर सकता है, इसे खारिज कर सकता है या आवश्यकता महसूस होने पर आगे की जांच के निर्देश भी दे सकता है। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, पीड़ित परिवारों या याचिकाकर्ताओं के पास क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका (Protest Petition) दाखिल करने का विकल्प भी खुला है।

📢 हादसे ने खड़े किए थे प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल

RAU’s IAS कोचिंग सेंटर का यह हादसा महज एक आपराधिक जांच का मामला नहीं था, बल्कि इसने राजधानी के कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े किए थे। घटना के बाद दिल्ली में बड़े पैमाने पर अवैध बेसमेंट सील किए गए थे और फायर सेफ्टी तथा आपदा प्रबंधन मानकों की सख्ती से जांच की गई थी।

💼 MCD अधिकारियों को मिली बड़ी राहत

फिलहाल CBI की सप्लीमेंट्री फाइनल रिपोर्ट ने वरिष्ठ MCD अधिकारियों को बड़ी राहत दी है, क्योंकि एजेंसी ने उनके विरुद्ध आपराधिक लापरवाही का मामला चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए। हालांकि, इस चर्चित मामले का कानूनी अध्याय अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और अब सभी की निगाहें अदालत के रुख पर टिकी हैं।