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सुप्रीम कोर्ट का सख्त एक्शन: पार्श्वनाथ डेवलपर्स के डायरेक्टरों के बैंक अकाउंट फ्रीज, जारी किया वारंट

सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को हरियाणा की कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किए हैं, क्योंकि कंपनी हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) के आदेशों का पालन करने में विफल रही थी। कोर्ट ने पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स लिमिटेड और पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड के डायरेक्टरों के बैंक अकाउंट फ्रीज करने और उनके खिलाफ वारंट जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही, अगली सुनवाई में सभी डायरेक्टरों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि वे पेश नहीं हुए, तो गैर-जमानती वारंट जारी किए जाएंगे।

⏳ 36 महीने का वादा, 2 दशक का इंतजार

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस वी. मोहना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच गुरुग्राम में पार्श्वनाथ एक्सोटिका प्रोजेक्ट के होमबायर्स द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन खरीदारों ने करीब 2 दशक पहले घर की पूरी कीमत चुका दी थी, लेकिन उन्हें आज तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। अनुबंध के अनुसार, 2013 तक कब्जा मिलना था, लेकिन बिल्डर की लापरवाही के कारण खरीदार दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कोर्ट ने इसे ‘घर खरीदने वालों की बेहद मुश्किल स्थिति’ करार दिया है।

💰 1 करोड़ की लागत और अधूरा निर्माण

याचिकाकर्ताओं को 2006-07 में फ्लैट आवंटित किए गए थे, जिनकी कीमत उस समय 1 करोड़ रुपये से अधिक थी। 2021 में HRERA ने खरीदारों के पक्ष में मुआवजा देने का आदेश दिया था, जिसे बिल्डर ने कभी चुनौती नहीं दी, लेकिन उसका पालन भी नहीं किया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि गुरुग्राम कलेक्टर बार-बार कोशिशों के बावजूद बिल्डर से एक पैसा भी वसूल नहीं सके, जो सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।

⚖️ सिस्टम की कमियों पर कोर्ट की चिंता

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि अधिकारी या तो बिल्डर के साथ मिलीभगत कर रहे थे या अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे। एक मामले में तो बेलिफ को दफ्तर में घुसने तक नहीं दिया गया। कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और संबंधित बैंकों को निर्देश दिया है कि वे इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और अनुपालन हलफनामा दाखिल करें।

🚫 प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर रोक

लगातार आदेशों की अवहेलना पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को अगले आदेश तक प्रोजेक्ट में किसी भी तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने या यूनिट का कब्जा सौंपने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। कोर्ट की यह टिप्पणी रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट को लागू करने में आने वाली बड़ी खामियों को उजागर करती है।