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Operation Sankalp to Urja Suraksha: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारतीय नौसेना का सबसे खतरनाक और बड़ा रेस्क्यू मिशन

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के दौरान जब होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी हुई, तब भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरे संकट के बादल मंडरा गए थे। इसी दौरान भारतीय नौसेना ने अपने इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण मिशन ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ को अंजाम दिया। इसका मुख्य लक्ष्य युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारत के उन कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी जहाजों को सुरक्षित निकालना था, जो देश की जीवन रेखा हैं।

🚢 खाड़ी में फंसी थी भारत की ‘एनर्जी लाइफलाइन’

युद्ध की आहट के साथ ही होर्मुज स्ट्रेट में भारत के 22 से 24 ‘हाई-प्रायोरिटी’ मर्चेंट वेसल्स फंस गए थे, जिनमें 600 से अधिक भारतीय नाविक सवार थे। भारत अपनी जरूरतों का 40% क्रूड ऑयल और 90% कमर्शियल एलपीजी इसी रास्ते से आयात करता है। कुल मिलाकर 36 से 38 वाणिज्यिक जहाजों पर सवार 1,100 से ज्यादा नाविकों की सुरक्षा का जिम्मा नौसेना पर था।

🛡️ त्रिशक्ति का कड़ा पहरा: लेयर्ड सिक्योरिटी ग्रिड

भारतीय नौसेना ने किसी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बने बिना, अकेले दम पर एक ‘लेयर्ड सिक्योरिटी ग्रिड’ तैयार किया। शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस और जग वसंत जैसे महत्वपूर्ण जहाजों को नौसेना ने ओमान की खाड़ी से अरब सागर तक सुरक्षित एस्कॉर्ट किया। इस दौरान 6 से 7 फ्रंटलाइन युद्धपोत—जिनमें INS कोलकाता जैसे आधुनिक डिस्ट्रॉयर्स शामिल थे—चौबीसों घंटे तैनात रहे।

🪖 मार्कोस और आधुनिक हवाई ताकत

जहाजों पर तैनात भारतीय नौसेना के ‘मार्कोस कमांडोज’ ने ‘बोर्डिंग ऑपरेशन्स’ के जरिए सुरक्षा का भरोसा दिया। वहीं, आसमान से P-8I पोसाइडन विमानों और MQ-9B सी-गार्डियन ड्रोन्स ने दुश्मन की हर चाल पर नजर रखी। 2,000 से अधिक नौसैनिकों ने युद्धक तैयारी के साथ इस मिशन को सफल बनाया, जिससे भारत के तेल और गैस टैंकर बिना किसी नुकसान के गुजरात के मुंद्रा और कांडला पोर्ट तक पहुंच सके।