ब्रेकिंग
आसाराम के बेटे नारायण साईं को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं: गुजरात हाईकोर्ट वापस भेजा मामला, 3 महीने म... "राजनीति में आकर भी अंडों से डर लगता है?" TMC सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, याचिका खा... छिंदवाड़ा में सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन, शिकायतों पर CMHO, तहसीलदार और पटवारी तत्काल सस्पेंड NEET 2026 धांधली: परीक्षा से 3 दिन पहले लीक हुए थे पेपर! CBI चार्जशीट में NTA विषय विशेषज्ञों और सीक... E20 इथेनॉल पेट्रोल पर सियासत तेज: राहुल गांधी बोले— 'जनता की जेब से चुरा रहे पैसे', पेट्रोलियम मंत्र... महाराष्ट्र राजनीति में बड़ा उलटफेर: अजित पवार की NCP की रणनीति संभालेंगे प्रशांत किशोर? सुनेत्रा पवा... अतीक अहमद के बेटों उमर और अली को मिली हाईकोर्ट से पैरोल, छोटे भाई आबान के जनाजे में होंगे शामिल गाजियाबाद 4 साल की मासूम से रेप-हत्या मामला, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद दो प्राइवेट अस्पताल ₹12 ल... मुंबई के मुलुंड में पूरी सड़क ही हो गई 'गायब'! BJP विधायक मिहिर कोटेचा ने दर्ज कराई शिकायत, BMC से म... अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान की सड़क हादसे में मौत: झांसी जेल में बंद भाई अली से मिलने जाते वक्त...

Political Earthquake in Bengal: तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने किया NCPI में विलय; जानिए इस पार्टी का इतिहास और नेतृत्व

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में एक ऐसा नाम सुर्खियों में है, जिसे शायद ही किसी ने पहले कभी सुना हो—‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI)। महज 822 वोटों के साथ त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में अपनी चुनावी पारी शुरू करने वाली यह अनजान पार्टी, आज तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के विलय के बाद दिल्ली की राजनीति का केंद्र बन गई है।

🗳️ त्रिपुरा से चुनावी डेब्यू: एक गुमनाम शुरुआत

NCPI का रजिस्ट्रेशन पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन उसने अपना राजनीतिक सफर त्रिपुरा से शुरू किया। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने आदिवासी समुदायों की आवाज उठाने का दावा किया था, लेकिन उसे कोई खास सफलता नहीं मिली। पार्टी के कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए और जो मैदान में उतरे, उन्हें 1,000 से भी कम वोट मिले। चुनाव के बाद पार्टी की सक्रियता लगभग समाप्त हो गई थी।

💰 पार्टी का ढांचा और संदिग्ध वित्तीय स्थिति

चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, पार्टी को कुल 1.13 लाख रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था। पार्टी की कोषाध्यक्ष शेवली कुंडू हैं, जो हावड़ा स्थित कुछ निजी संस्थाओं की डायरेक्टर भी हैं। पार्टी अध्यक्ष उत्तिया कुंडू के नेतृत्व में संचालित यह पार्टी लंबे समय से संसाधनों की कमी और आंतरिक विवादों से जूझ रही थी। पार्टी के पूर्व उम्मीदवारों ने भी स्वीकार किया कि चुनाव के बाद नेतृत्व से उनका संपर्क टूट गया था।

🚀 विलय के बाद राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री

तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों द्वारा NCPI में विलय की घोषणा ने इसे रातों-रात ‘क्षेत्रीय पार्टी’ से ‘राष्ट्रीय चर्चा’ का विषय बना दिया है। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग की है। टीएमसी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने इस विलय की पुष्टि की है। यह घटनाक्रम न केवल टीएमसी के आंतरिक संकट को दर्शाता है, बल्कि एक छोटी सी पार्टी को अचानक से एक बड़े राजनीतिक मंच में तब्दील कर दिया है।

⚖️ भविष्य की राह और कानूनी चुनौतियां

राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए यह विलय कौतूहल का विषय है। जहां एक ओर बागी सांसद इसे अपनी नई राजनीतिक पहचान मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर NCPI का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड और उसकी कार्यप्रणाली कई सवाल खड़े करती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह अनजान पार्टी वाकई पश्चिम बंगाल की राजनीति को कोई नई दिशा दे पाएगी या यह केवल सत्ता के संघर्ष का एक कानूनी दांव भर है।