ब्रेकिंग
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव, जलपाईगुड़ी से भारतीय किसान दीपांकर गोप को जबरन उठा ले गए बांग्लाद... Apple Pay की भारत में एंट्री: शुरुआती चरण में केवल वीजा और मास्टरकार्ड सपोर्ट, यूपीआई यूजर्स को करना... एलन मस्क की xAI ने लॉन्च किया 'इमेजिन इमेज 2.0': AI से फोटो जनरेट और एडिट करना हुआ आसान, OpenAI को म... बुंदेलखंड की पावन धरा पर स्थित झांसी का केदारेश्वर मंदिर, सावन में उमड़ा आस्था का अगाध सैलाब दिमाग को कंप्यूटर जैसा तेज और एक्टिव बनाएंगे ये 7 सुपरफूड्स, आज ही डाइट में करें शामिल बिहार में अनोखी शवयात्रा: ढोल-नगाड़ों और आर्केस्ट्रा डांस के साथ निकली बुजुर्ग की अंतिम यात्रा, बेटे... बरेली में बड़ा रेल हादसा टला: बंद फाटक तोड़कर ट्रैक पर पहुंचा ट्रैक्टर, गोरखपुर-इज्जतनगर एक्सप्रेस स... आंध्र प्रदेश: शक के चलते बीटेक छात्रा की निर्मम हत्या, प्रेमी ने सुनसान नहर किनारे दिया वारदात को अं... पूर्णिया के रेणु नगर में दिल दहला देने वाली वारदात, घरेलू विवाद में बैंक मैनेजर ने शिक्षिका पत्नी की... अयोध्या राम मंदिर के CEO पद के लिए आए 5300 आवेदन: संत समाज की मांग— 'रामानंदी परंपरा और मठ-मंदिर की ...

TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस में बगावत पर अभिषेक बनर्जी का बड़ा कदम; स्पीकर से की अलग गुट को मान्यता न देने की अपील

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संसदीय पार्टी के भीतर मचे विवाद के बीच, पार्टी के महासचिव और संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। रविवार को टीएमसी सांसद कार्ति झा आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अभिषेक बनर्जी का पत्र सौंपा। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि टीएमसी एक एकीकृत और अविभाज्य दल है, और भीतर किसी भी प्रकार के ‘समांतर गुट’ का कोई संवैधानिक आधार नहीं है।

📜 सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

पत्र में ‘सुभाष देसाई बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले (2023) के ऐतिहासिक निर्णय का जिक्र करते हुए कहा गया है कि 91वें संविधान संशोधन के बाद ‘पार्टी के भीतर विभाजन’ (Split) का बचाव समाप्त हो चुका है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि:

  • राजनीतिक दल सर्वोच्च है, विधायी दल नहीं।

  • व्हिप की नियुक्ति का अधिकार केवल मूल राजनीतिक दल के पास है।

  • अलग गुट बनाकर स्वतंत्र मान्यता का दावा करना कानूनन अवैध है।

🚫 विलय ही एकमात्र संवैधानिक रास्ता

अभिषेक बनर्जी के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि दसवीं अनुसूची के तहत केवल ‘विलय’ (Merger) ही एकमात्र वैध रास्ता है। इसके लिए दो शर्तें अनिवार्य हैं: पहली, राजनीतिक दल स्वयं किसी अन्य दल में विलय करे, और दूसरी, विधायी दल के कम-से-कम दो-तिहाई सदस्य उस विलय का समर्थन करें। केवल दो-तिहाई सदस्यों का अलग हो जाना ही उन्हें स्वतंत्र इकाई का दर्जा नहीं दिला सकता।

⚠️ पार्टी व्हिप के उल्लंघन पर अयोग्यता की चेतावनी

पार्टी नेतृत्व ने स्पीकर को आगाह किया है कि यदि कोई सदस्य या समूह पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है या नेतृत्व को चुनौती देता है, तो वह दसवीं अनुसूची के तहत ‘अयोग्यता’ (Disqualification) का पात्र है। टीएमसी ने अनुरोध किया है कि बागी गुट को मान्यता देने जैसा कोई भी निर्णय लेने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर जरूर दिया जाए।