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Mumbai Flyover Controversy: 250 करोड़ का मृणालताई गोरे फ्लाईओवर विवादों में; उद्घाटन के बाद ही सतह पर दिखे दरार और निशान

मुंबई: आर्थिक राजधानी मुंबई में ट्रैफिक जाम से राहत देने के लिए बनाया गया गोरेगांव-ओशिवरा स्थित ‘मृणालताई गोरे फ्लाईओवर’ चर्चा का विषय बन गया है। 250 करोड़ रुपये की लागत और 8 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद तैयार हुए इस 750 मीटर लंबे फ्लाईओवर पर उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद टायरों के निशान और असमान सतह दिखाई देने लगी है, जिसने निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

⏳ 8 वर्षों का लंबा संघर्ष और देरी

यह परियोजना 2018 में शुरू हुई थी, जिसे महज 2 वर्षों में पूरा किया जाना था। हालांकि, प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियों के कारण इसे पूरा होने में 8 साल का समय लग गया। इतनी लंबी देरी के बाद जब यह फ्लाईओवर जनता को समर्पित हुआ, तो लोगों को उम्मीद थी कि शहर का आवागमन सुगम होगा, लेकिन उद्घाटन की तस्वीरों ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

🏢 बीएमसी का तर्क vs जनता का अविश्वास

फ्लाईओवर की सतह पर दिख रहे निशानों को लेकर बीएमसी (BMC) अधिकारियों का कहना है कि यह ‘सामान्य प्रक्रिया’ है और विशेष सामग्री के उपयोग के कारण ऐसा हो सकता है, जो समय के साथ सामान्य हो जाएगा। लेकिन मुंबई के जागरूक नागरिक इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं। उनका तर्क है कि मानकों के अनुरूप बने किसी भी नए निर्माण में शुरुआती दिनों में ही सतह असमान क्यों होनी चाहिए?

⛈️ मानसून और भविष्य की चिंताएं

मुंबई में मानसून की दस्तक देने के साथ ही नागरिकों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। लोगों का सवाल है कि यदि अभी स्थिति ऐसी है, तो भारी बारिश और यातायात के दबाव के बाद फ्लाईओवर की क्या हालत होगी? क्या यह गड्ढों का घर बन जाएगा? क्या भविष्य में इसके रखरखाव पर जनता के टैक्स का और अधिक पैसा खर्च होगा?

🗣️ भ्रष्टाचार के आरोपों पर राजनीति

इस मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। विपक्ष ने बीएमसी के कामकाज पर तीखे हमले किए हैं। पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर ने निर्माण कार्य को भ्रष्टाचार का नमूना बताते हुए इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि इतनी भारी लागत के बाद भी ऐसी खराब गुणवत्ता बिना मिलीभगत के संभव नहीं है।