ब्रेकिंग
Ram Mandir Donation Scam SIT: सुप्रीम कोर्ट में SIT का खुलासा; राम मंदिर काउंटिंग रूम से चोरी के 105... Delhi High Court PIL: डीटीसी बस हड़ताल से थमीं दिल्ली की रफ्तार; जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की पीठ करे... Faridabad CM Flying Raid: तिगांव में अवैध बुलेटप्रूफ कार वर्कशॉप पर CM फ्लाइंग का छापा; 4 लग्जरी गाड... Gurugram MCG Action: भोंडसी में नगर निगम का बड़ा बुलडोजर एक्शन; 6 अवैध भवन सील, 4 ध्वस्त Gurugram Crime News: गुड़गांव की नाथूपुर सब्जी मंडी में हिताची ATM में लगी भीषण आग; मशीन में रखा कैश... Raipur News: रायपुर उत्तर में विधायक पुरन्दर मिश्रा की 8 दिवसीय पदयात्रा; सीएम साय करेंगे आगाज, राज्... Kanker Yuva Udaan Event: '2047 तक विकसित भारत का सपना युवाओं के कंधे पर'; कांकेर में बोले युवा आयोग ... Kanker BSF Camp News: माओवाद के साये से निकलकर वर्दी के सपने; कांकेर के तुमापाल में BSF कैंप में उमड... Raipur News: भाटागांव सब्जी बाजार विवाद में आयुक्त का आश्वासन; 7 दिनों में सामने आएंगे लॉटरी आवंटन क... Chhattisgarh News: कोरबा के पूछपारा में शर्मनाक घटना; नमाजी बुजुर्ग पर हमला कर युवक फरार, मेडिकल कॉल...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: FSL की 20% DNA रिपोर्ट्स की होगी रैंडम जांच, कट-पेस्ट की सफाई खारिज

जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) द्वारा तैयार की जाने वाली डीएनए (DNA) रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक ऐतिहासिक एवं सख्त दिशा-निर्देश जारी किया है।

अदालत में विगत 5 वर्षों में प्रस्तुत की गई विभिन्न फॉरेंसिक रिपोर्टों में भारी अनिमितताओं व गड़बड़ियों की आशंका को देखते हुए, अब तक पेश की गईं कुल रिपोर्ट्स में से 20 प्रतिशत रिपोर्ट्स की रैंडम (Random) निष्पक्ष जांच कराने के कड़े आदेश दिए गए हैं। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) को निर्देशित किया है कि इसके लिए तीन सदस्यीय वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों (Senior Scientific Officers) की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जिसमें अन्य राज्यों के विशेषज्ञ सदस्यों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए।

⚖️ इटारसी दुष्कर्म केस में उजागर हुई FSL की लापरवाही, पीड़िता व आरोपी के सैंपल में मिला तीसरे व्यक्ति का नाम

दरअस्ल, नर्मदापुरम जिले के इटारसी निवासी पंकज कुमार ने पोक्सो एक्ट (POCSO Act) एवं दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा के विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, भोपाल में डीएनए परीक्षण हेतु पीड़िता एवं आरोपी के जो सैंपल भेजे गए थे, FSL द्वारा पेश की गई अंतिम रिपोर्ट में किसी तीसरे ही अज्ञात व्यक्ति के सैंपल का उल्लेख कर दिया गया, जिसे ‘M’ के रूप में दर्शाया गया। इतना ही नहीं, घटना रिपोर्ट के अनुसार वारदात 14 नवंबर 2022 से 3 जनवरी 2023 के मध्य हुई थी, जबकि एफआईआर 3 मई 2023 को दर्ज की गई। घटना के चार माह बाद सील किए गए सैंपलों की शुद्धता और वैधता पर भी अदालत ने कड़े सवाल खड़े किए।

🔬 सैंपलिंग प्रक्रिया पर उठा सवाल: ब्लड के स्थान पर लिया सीमेन सैंपल, कोर्ट ने जताई गंभीर आपत्ति

अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी रेखांकित किया कि डीएनए जांच परीक्षण के लिए आरोपी का सीमेन सैंपल लिया गया, जबकि यह परीक्षण केवल ब्लड सैंपल (रक्त नमूने) से भी वैज्ञानिक रूप से संभव था।

इससे फॉरेंसिक सैंपलिंग प्रक्रिया की प्रभावशीलता, शुद्धता और सटीकता पर शुरुआती स्तर पर ही गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने माना कि मानव जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े आपराधिक मामलों में ऐसी बुनियादी खामियां किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।

👨‍⚖️ FSL डायरेक्टर की ‘कट-एंड-पेस्ट’ की सफाई खारिज, हाईकोर्ट बोले- “यह किसी के जीवन-मरण का सवाल है”

युगलपीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डायरेक्टर FSL भोपाल एवं एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान FSL डायरेक्टर की ओर से पेश किए गए हलफनामे पर युगलपीठ ने घोर असंतोष व्यक्त किया। जब FSL की ओर से तर्क दिया गया कि यह त्रुटि ‘कट-एंड-पेस्ट’ या टाइपिंग की गलती के कारण हो सकती है, तो हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा— “यह जानते हुए भी कि यह किसी व्यक्ति के जीवन और मरण का प्रश्न है, ‘टाइपिंग की गलती’ का बहाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि इस तर्क को मान लिया जाए, तो क्या डीएनए क्रोमोसोम के मिलान से जुड़े आंकड़ों में भी कट-एंड-पेस्ट की गलती नहीं हुई होगी?”

💬 “मध्य प्रदेश FSL की डीएनए रिपोर्ट्स भरोसेमंद नहीं मानी जा सकतीं”: हाईकोर्ट युगलपीठ

“उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि इस प्रकार की लापरवाही से यह सिद्ध होता है कि मध्य प्रदेश राज्य की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी द्वारा तैयार की जाने वाली डीएनए रिपोर्ट्स पूर्णतः भरोसेमंद नहीं हैं। यदि वैज्ञानिक ने कोई गंभीर त्रुटि की है, तो उसे उचित दंडात्मक सजा मिलनी चाहिए, न कि मामले को दबाने का प्रयास किया जाना चाहिए। इसी आधार पर विगत 5 वर्षों की रिपोर्ट्स की निष्पक्ष बाहरी कमेटी से जांच कराने का आदेश पारित किया गया है।”