Gwalior Water Crisis: ग्वालियर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई का प्रस्ताव MIC ने लौटाया; तिघरा बांध में सिर्फ 85 दिनों का स्टॉक
ग्वालियर। शहर की प्यास बुझाने वाले मुख्य जल स्रोत ‘तिघरा बांध’ के लगातार घटते जलस्तर को देखते हुए ग्वालियर में पानी का बड़ा संकट खड़ा होता नजर आ रहा है. जल संकट की इसी गंभीरता के मद्देनजर नगर निगम प्रशासन द्वारा आगामी एक जुलाई से शहर में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति (Alternate Day Water Supply) करने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किया गया था. हालांकि, इस प्रस्ताव को मेयर इन काउंसिल (MIC) के सदस्यों ने सर्वसम्मति से फिलहाल वापस लौटा दिया है. इस हाई-प्रोफाइल बैठक में निगमायुक्त संघ प्रिय ने वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जल संसाधन विभाग द्वारा गत 27 मई को भेजे गए आधिकारिक पत्र के मुताबिक, तिघरा बांध में अब सिर्फ 85 दिनों का पानी ही शेष बचा है. इस सीमित जल स्टॉक से नगर निगम केवल सितंबर महीने तक ही शहरवासियों को नियमित पानी की आपूर्ति कर सकेगा.
💧 महापौर डॉ. शोभा सिकरवार का कड़ा रुख: ‘अभी कटौती का प्रस्ताव मंजूर नहीं, एक जुलाई से पहले फोन पर हमसे लें स्वीकृति’
निगमायुक्त द्वारा आंकड़ों की चेतावनी दिए जाने पर ग्वालियर की महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने कड़ा रुख अपनाते हुए जनता के हित में फैसला सुनाया. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि एक जुलाई से एक दिन पहले फोन पर हमसे इस विषय पर दोबारा फीडबैक और स्वीकृति ले लें, लेकिन अभी हम जनता पर पानी की कटौती का बोझ नहीं डाल सकते, इसलिए इस प्रस्ताव को अभी वापस लौटाया जा रहा है. इस पर निगमायुक्त का तर्क था कि यदि पानी की कटौती का यह संदेश समय रहते मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंच जाएगा, तो आम जनता भी पानी की बर्बादी रोकने के प्रति जागरूक होगी और संकट से निपटना आसान होगा.
🧹 ‘स्वच्छता अभियान की तरह चलाएं पानी बचाओ मुहिम’: एमआइसी सदस्यों ने निगमायुक्त को दी विशेष सलाह
जब निगमायुक्त ने जनता को जागरूक करने की बात कही, तो बैठक में मौजूद एमआइसी (MIC) के अन्य सदस्यों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. सदस्यों का साफ तौर पर कहना था कि यदि नगर निगम प्रशासन पानी को लेकर गंभीर है, तो अचानक पानी की सप्लाई काटने के बजाय जमीनी स्तर पर प्रयास करे. सदस्यों ने कहा, “जैसे आप अभी पूरे ग्वालियर शहर में स्वच्छता अभियान (Cleanliness Drive) चला रहे हैं और खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ठीक उसी तरह पानी की बर्बादी रोकने और जल संरक्षण के लिए एक व्यापक ‘पानी बचाने की मुहिम’ की शुरुआत करें.” पार्षदों और सदस्यों ने सुझाव दिया कि अवैध नल कनेक्शनों पर कार्रवाई की जाए और पानी बहने वाले मुख्य लीकेज को तुरंत ठीक किया जाए, ताकि बिना कटौती के भी सितंबर के आगे तक पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से चलाई जा सके.