ब्रेकिंग
NEET Protest Controversy: जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन से पहले भारी तनाव; हिंदू रक्... NEET Controversy: नीट विवाद पर जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का हल्लाबोल; TMC सांसद सागरिका घोष ... Indore Gopal Mandir History: इंदौर के गोपाल मंदिर का अनोखा इतिहास; जब छत की मजबूती जांचने के लिए ऊपर... Ratlam Weather Update: रतलाम में रातभर हुई रिमझिम बारिश से बदला मौसम; तापमान में गिरावट के बाद उमस स... Indore Dahod Rail Project: धार-इंदौर के बीच अक्टूबर से दौड़ेंगी ट्रेनें; 1 सितंबर तक पूरी होगी 3 किम... Mandla Bus Accident: मंडला में यात्रियों से भरी बस पलटी; छत्तीसगढ़ के दुर्ग से वृंदावन जा रहे 27 तीर... Ujjain Smuggler Arrest: उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर से ₹25 हजार का इनामी तस्कर गिरफ्तार; राजस्थान ANTF क... Bhopal Samagra ID Fraud: भोपाल में समग्र आईडी डेटा में बड़ा फर्जीवाड़ा; 11.64 लाख लोगों ने नहीं कराई... Ujjain Kala Bundela Arrest: उज्जैन का कुख्यात बदमाश काला बुंदेला गुजरात से गिरफ्तार; एमडी ड्रग्स तस्... Gwalior Water Crisis: ग्वालियर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई का प्रस्ताव MIC ने लौटाया; तिघरा बांध म...

Indore Gopal Mandir History: इंदौर के गोपाल मंदिर का अनोखा इतिहास; जब छत की मजबूती जांचने के लिए ऊपर चलाए गए थे हाथी

इंदौर। इंदौर केवल मध्य प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक राजधानी ही नहीं है, बल्कि अपनी गहरी सांस्कृतिक संपन्नता और अनूठी विरासत की खूबी वाला एक बेहद जीवंत शहर भी है. भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो यहाँ बेशक कोई मुख्य ज्योतिर्लिंग, बड़ा शक्तिपीठ, पवित्र राष्ट्रीय नदी या हजारों वर्ष पुराने अति-प्राचीन मंदिर स्थापित नहीं हैं; लेकिन इसके बावजूद इंदौर की जनता के दिलों में आस्था का दीप सदैव पूरी प्रखरता के साथ प्रज्वलित रहता है. आधुनिकता की दौड़ में दौड़ने वाले इस शहर की खूबी और गरिमा को बढ़ाते कई दर्शनीय ऐतिहासिक स्थल भी मौजूद हैं और अपने भीतर सदियों पुराना ऐतिहासिक महत्व समेटे हुए कई भव्य मंदिर भी हैं, जो यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

🐘 राजबाड़ा के प्रसिद्ध ‘गोपाल मंदिर’ का रोचक इतिहास: कृष्णाबाई होलकर ने कराया था निर्माण, छत की मजबूती जांचने के लिए चलाए गए थे हाथी

इंदौर की स्थानीय इतिहासकार शर्वाणी के अनुसार, यहाँ के हर एक मंदिर की अपनी अलग धार्मिक मान्यता, पौराणिक कहानी और वास्तुकला की विशेषता है. यूं तो आज के समय में पूरे शहर में हजारों छोटे-बड़े मंदिर स्थापित हैं, पर कुछ मंदिर इतिहास के पन्नों में बहुत प्रसिद्ध हैं और इन्हीं प्राचीन धरोहरों में से एक है राजबाड़ा क्षेत्र में स्थित ‘गोपाल मंदिर’. राजबाड़ा के समीप स्थित इस भव्य गोपाल मंदिर का निर्माण होलकर राजवंश की कृष्णाबाई होलकर ने करवाया था. इस मंदिर के निर्माण काल से जुड़ी सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि जब इसकी छत बनकर तैयार हुई, तो तत्कालीन इंजीनियरों द्वारा इसकी मजबूती का कड़ा परीक्षण (Strength Test) करने के लिए बकायदा छत के ऊपर विशालकाय हाथी चलवाकर देखे गए थे. हाथियों का वजन सहने के बाद ही इस भव्य मंदिर को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया गया था, जो होलकर कालीन बेहतरीन स्थापत्य कला का एक बेमिसाल उदाहरण है.