ब्रेकिंग
NEET Protest Controversy: जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन से पहले भारी तनाव; हिंदू रक्... NEET Controversy: नीट विवाद पर जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का हल्लाबोल; TMC सांसद सागरिका घोष ... Indore Gopal Mandir History: इंदौर के गोपाल मंदिर का अनोखा इतिहास; जब छत की मजबूती जांचने के लिए ऊपर... Ratlam Weather Update: रतलाम में रातभर हुई रिमझिम बारिश से बदला मौसम; तापमान में गिरावट के बाद उमस स... Indore Dahod Rail Project: धार-इंदौर के बीच अक्टूबर से दौड़ेंगी ट्रेनें; 1 सितंबर तक पूरी होगी 3 किम... Mandla Bus Accident: मंडला में यात्रियों से भरी बस पलटी; छत्तीसगढ़ के दुर्ग से वृंदावन जा रहे 27 तीर... Ujjain Smuggler Arrest: उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर से ₹25 हजार का इनामी तस्कर गिरफ्तार; राजस्थान ANTF क... Bhopal Samagra ID Fraud: भोपाल में समग्र आईडी डेटा में बड़ा फर्जीवाड़ा; 11.64 लाख लोगों ने नहीं कराई... Ujjain Kala Bundela Arrest: उज्जैन का कुख्यात बदमाश काला बुंदेला गुजरात से गिरफ्तार; एमडी ड्रग्स तस्... Gwalior Water Crisis: ग्वालियर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई का प्रस्ताव MIC ने लौटाया; तिघरा बांध म...

Delhi Hotel Fire: मालवीय नगर अग्निकांड ने हिलाया; दिल्ली में बीते 6 साल में आग से 543 लोगों की मौत

दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में लगी भीषण आग ने पूरी राष्ट्रीय राजधानी को हिलाकर रख दिया है. इस दिल दहला देने वाले हादसे में 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. इस भीषण अग्निकांड के बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और फायर एनओसी (Fire NOC) को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अगर सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते 6 वर्षों में शहर में आग संबंधी विभिन्न हादसों में 500 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. ये आंकड़े दिल्ली के अग्नि सुरक्षा इंतजामों की जमीनी हकीकत और लापरवाही को उजागर करते हैं. इनमें कुछ हादसे तो ऐसे हैं जिनका खौफनाक मंजर आज भी दिल्लीवासियों के जहन में खौफ पैदा कर देता है. बुधवार को दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर की एक संकरी गली में स्थित ‘फ्लोरिश स्टेज’ Bed & Breakfast (B&B) होटल में लगी आग में 21 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर विदेशी नागरिक थे. इस हादसे में 25 लोग गंभीर रूप से झुलस भी गए, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. होटल की आग इतनी भयंकर थी कि देखते ही देखते बहुमंजिला इमारत आग के विकराल गोले में तब्दील हो गई, जिससे राहत और बचाव कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हुआ.

📊 साल 2019 से मार्च 2026 तक आग ने ली कुल 543 मासूम जानें: विवेक विहार, पालम से लेकर मालवीय नगर तक मौतों का तांडव

दिल्ली सरकार के आधिकारिक और नए आंकड़ों के अनुसार, साल 2019 से मार्च 2026 तक राजधानी में आग से जुड़ी तमाम छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं में कुल 543 लोगों की असमय मौत हुई है. हाल ही के दिनों में विवेक विहार के बेबी केयर सेंटर और पालम इलाके की रिहायशी इमारतों में हुई आग की घटनाओं में भी 9-9 लोगों की मौत हुई थी. लगातार हो रहे ये हादसे साबित करते हैं कि व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है.

📉 चालू वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ही 65 मौतें दर्ज: आंकड़ों की जुबानी समझिए दिल्ली में कितनी बढ़ी है आग की चुनौती

सिर्फ वर्तमान वर्ष 2026 के शुरुआती कुछ महीनों में ही दिल्ली में आग से जुड़ी दुर्घटनाओं में 65 लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है. इससे साफ है कि आग की घटनाएं राजधानी के लिए इस वर्ष की सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनी हुई हैं. केवल मौतें ही नहीं, बल्कि इस दौरान घायल होने वालों की संख्या भी डराने वाली है; साल 2019 से 2025 के बीच आग की विभिन्न घटनाओं में 4,403 लोग गंभीर रूप से घायल या अपाहिज हुए हैं. दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के वार्षिक आंकड़ों के मुताबिक मौतों का ग्राफ इस प्रकार रहा है:

  • 🗓️ वर्ष 2025-2026: आगजनी के हादसों में कुल 84 लोगों की जान गई.

  • 🗓️ वर्ष 2024-2025: यह आंकड़ा और भी भयावह था, जहां 90 लोगों की मौत हुई.

  • 🗓️ वर्ष 2023-2024: राजधानी के विभिन्न इलाकों में आग से 77 लोगों की मौत दर्ज की गई.

😷 कोविड काल के बाद आगजनी की घटनाओं में आया भारी उछाल: साल 2022-23 में दर्ज की गई थीं रिकॉर्ड 95 मौतें

कोविड-19 महामारी के दौर में जब लॉकडाउन और पाबंदियां लागू थीं, तब भी मौतों का सिलसिला थमा नहीं था. कोविड काल के दौरान वर्ष 2020-21 में 41 और वर्ष 2021-22 में 55 लोगों की मौत दम घुटने और जलने से हुई थी. हालांकि, जैसे ही बाजार और वाणिज्यिक गतिविधियां दोबारा पूरी तरह खुलीं, इन मामलों में अचानक तीव्र तेजी आई और वर्ष 2022-23 में आग की घटनाओं में 95 लोगों की जान चली गई, जो हाल के सालों का सबसे उच्चतम और डरावना स्तर था.

🏪 दिल्ली के इतिहास का सबसे काला पन्ना है ‘अनाज मंडी’ और ‘उपहार सिनेमा’ अग्निकांड: संकरी गलियों ने बनाया मौत का कुआँ

दिल्ली में आग लगने से होने वाली मौतों की सबसे अधिक संख्या वर्ष 2019-20 के दौरान दर्ज की गई थी. यह छह साल का सबसे घातक और त्रासद वर्ष रहा. इसी दौरान रानी झांसी रोड पर स्थित अवैध फैक्ट्रियों वाले ‘अनाज मंडी’ अग्निकांड में 44 मजदूरों की दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई थी. यह हादसा राजधानी के इतिहास की सबसे बड़ी आग की त्रासदियों में गिना जाता है. इससे पहले वर्ष 1997 में हुए मशहूर ‘उपहार सिनेमा’ अग्निकांड में 59 लोगों की जान गई थी. इन दोनों ही बड़े हादसों में संकरी गलियां और इमरजेंसी एग्जिट (निकास द्वार) का न होना मौतों का मुख्य कारण बना था.

📞 दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के पास बढ़ीं आपातकालीन कॉल्स: होटलों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के फायर ऑडिट की उठी मांग

शहर में बढ़ती लापरवाही के साथ-साथ दिल्ली फायर सर्विस को मिलने वाली आपातकालीन कॉल्स (Emergency Calls) में भी भारी इजाफा हुआ है. वर्ष 2019-20 में जहां DFS को 17,231 आपातकालीन कॉल मिली थीं, वहीं पिछले वित्तीय वर्ष में यह संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 20,379 तक पहुंच गई. लगातार बढ़ते ये आंकड़े और मौतों का ग्राफ इस बात को कड़ाई से रेखांकित करते हैं कि अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट, अवैध रूप से चल रहे बेसमेंट और इमारतों की भौतिक जांच तथा बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की तत्काल जरूरत है. मालवीय नगर हादसे के बाद अब दिल्ली नगर निगम (MCD) और गृह मंत्रालय पर भारी दबाव है कि वह रिहायशी इलाकों में चल रहे होटलों, गेस्ट हाउसों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा मानकों की सख्ती से जांच कर उन्हें सील करे.