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MP Medical College Update: मध्य प्रदेश में खुलेंगे 6 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज, 2028 तक 7450 पहुंच जाएंगी MBBS सीटें

मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के महाआयोजन से पहले एक अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की भव्य तैयारी है. राज्य सरकार इसे प्रदेश की पहली ‘मेडिसिटी’ (Medicity) के तौर पर विकसित कर रही है. उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने संकल्प पत्र में भी राज्य में एक विश्वस्तरीय मेडिसिटी बनाने की आधिकारिक घोषणा की थी. अगला विधानसभा चुनाव साल 2028 के अंत में संभावित है, और सरकार उससे पहले ही इस मेडिसिटी को धरातल पर उतारने के प्रयास में जुट गई है. शैक्षणिक सत्र 2027-28 से ही इस नए मेडिकल कॉलेज को शुरू करने के लिए अगले वर्ष चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा, जहां शुरुआत में एमबीबीएस (MBBS) की 150 सीटें होंगी. उज्जैन के साथ-साथ मंडला और राजगढ़ जिलों में भी नए सरकारी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की प्रशासनिक तैयारी चल रही है. वहीं, वर्ष 2026 में बुधनी, दमोह और छतरपुर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने के लिए डीएमई की तरफ से एनएमसी को आवेदन पहले ही किया जा चुका है.

📈 दो साल में खुलेंगे 6 नए सरकारी कॉलेज, प्रदेश में कुल शासकीय और निजी मिलाकर 7450 तक पहुंच जाएंगी MBBS सीटें

मध्य प्रदेश में आगामी दो वर्षों के भीतर छह नए सरकारी कॉलेज खुलने से प्रदेश में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या बढ़कर 25 हो जाएगी, जिससे सरकारी कोटे में एमबीबीएस की कम से कम 3450 सीटें उपलब्ध हो सकेंगी. इसी के समानांतर, पीपीपी (PPP) मॉडल सहित करीब 13 नए निजी (Private) मेडिकल कॉलेज भी खुलने की स्थिति में हैं, जिनमें 1300 अतिरिक्त सीटें जोड़ी जाएंगी. इस प्रकार शासकीय और निजी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर प्रदेश में कुल 1900 सीटें बढ़ जाएंगी. वर्तमान आंकड़ों की बात करें तो अभी प्रदेश के 19 शासकीय कॉलेजों में एमबीबीएस की 2850 और 14 निजी कॉलेजों में 2700 सीटें मिलाकर कुल 5550 सीटें हैं, जो साल 2028 तक बढ़कर 7450 हो जाएंगी. यदि सब कुछ योजना के अनुरूप सही दिशा में चला, तो वर्ष 2033 तक मध्य प्रदेश में हर साल 7450 नए डॉक्टर तैयार होकर निकलने लगेंगे.

🏥 क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी उज्जैन की हाईटेक मेडिसिटी में? सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं से लेकर आयुष विंग तक की व्यवस्था

उज्जैन में बनने जा रही इस महत्वाकांक्षी मेडिसिटी को पूरी तरह से आत्मनिर्भर और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से लैस किया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित मुख्य सुविधाएं शामिल होंगी:

  • 🩺 अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज व अस्पताल: इसमें एमबीबीएस की 150 सीटों वाला शैक्षणिक ब्लॉक होगा, जिससे संबद्ध 550 बिस्तरों (Beds) का एक विशाल अस्पताल होगा, जहां एडवांस सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं मिलेंगी.

  • 🔬 सेंट्रलाइज्ड डायग्नोस्टिक सेंटर: एक ऐसा एकीकृत सेंटर बनाया जा रहा है, जिसमें सभी प्रकार की पैथोलॉजिकल, माइक्रोबायोलॉजिकल और रेडियोडायग्नोसिस की जटिल जांचें मरीजों को एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी.

  • 🧘 एकीकृत स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटर: प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (बीमारी से बचाव) को बढ़ावा देने के लिए आयुष (AYUSH) पद्धतियों से उपचार की सुविधा होगी, साथ ही योग और ध्यान (मेडिटेशन) के लिए विशेष वेलनेस सेंटर बनेंगे.

  • ✈️ मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा: इस मेडिसिटी के अनूठे ढांचे के माध्यम से वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य पर्यटन (Medical Tourism) को आकर्षित करने की बड़ी योजना है.

  • 🏠 स्टाफ के लिए आवासीय परिसर: संस्थान परिसर के भीतर ही डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के लिए आधुनिक आवास की उत्तम सुविधा भी उपलब्ध रहेगी.

💰 सीएम केयर योजना: 5 साल में खर्च होंगे ₹3628 करोड़, भोपाल या उज्जैन में बनेगा प्रदेश स्तरीय सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल

मध्य प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए इसी वर्ष ‘सीएम केयर योजना’ (CM Care Yojana) प्रारंभ करने का बड़ा निर्णय लिया है, जिसे कैबिनेट से मंजूरी भी मिल गई है. इस दूरगामी योजना के अंतर्गत आगामी पांच वर्षों में कुल 3628 करोड़ रुपये खर्च करने की वित्तीय तैयारी है. योजना के तहत मुख्य फोकस चिकित्सा के क्षेत्र में सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं (Super-specialty Services) को सुदृढ़ करने पर है. इसके तहत कैंसर के इलाज के लिए मेडिकल आंकोलॉजी, सर्जिकल आंकोलॉजी, रेडिएशन आंकोलॉजी के साथ-साथ कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट (अंग प्रत्यारोपण) जैसी अति-आधुनिक सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से जिलों में विकसित की जानी हैं.

इसके साथ ही, इन सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए एक प्रदेशस्तरीय अत्याधुनिक अस्पताल भी भोपाल या उज्जैन में बनाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है. बता दें कि वर्तमान में प्रदेश के लगभग 50 प्रतिशत मेडिकल कॉलेजों में ही ये सेवाएं आंशिक रूप से मिल पा रही हैं, जबकि कुछ जगहों पर तो अलग से विभाग तक मौजूद नहीं हैं और वहां संसाधनों की भारी कमी है. सीएम केयर योजना के दायरे में आने के बाद संबंधित सभी कॉलेजों में अलग से एक ‘सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक’ का निर्माण किया जाएगा और इसका बजट भी पूरी तरह पृथक होगा. इसका दूसरा सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य में सुपरस्पेशियलिटी (DM/MCh) की सीटें भी काफी बढ़ जाएंगी, जिससे प्रदेश को विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकेंगे.